*सीकर जिले की 16 पंचायत समितियों में प्रधान पद का आरक्षण*
एससी ओपन
*रामगढ़ शेखावाटी, खाचरियावास व धोद ग्रामीण*
एससी महिला
*धोद ग्रामीण*
एसटी ओपन
*पाटन*
ओबीसी ओपन
*नीमकाथाना, फतेहपुर, धोद*
ओबीसी महिला
*नीमकाथाना*
अनारक्षित ओपन
*पिपराली, अजीतगढ़, दांतारामगढ़*
अनारक्षित महिला
*पलसाना, खंडेला, लक्ष्मणगढ़, नेछवा, बलारां, श्रीमाधोपुर*
कल परसो पीसीसी और अशोक गहलोत द्वारा एक स्टेटस शेयर किया गया जिसमे दोनों ने ही सीएमओ में बैठे एक सीनियर आईएएस ऑफिसर के बारे में बताया गया की वो अफसर किस तरह हर निकाय में बीजेपी का ही बोर्ड बने उसके लिए किसी भी हद्द तक जाने को तैयार है ।
बस फर्क इतना था कि अशोक गहलोत ने नाम नहीं लिया और आरोप लगाया लेकिन उसमे भी संशय रखा जबकि पीसीसी ने आरोप लगाया पुख्ता तरीके से बाते रखी के उस अधिकारी का नाम लेकर उसे आगाह किया की अपनी हरकतों से बाज आओ ।
जिसपर गहलोत के चेले चपाते निकल पड़े पीसीसी को नाम नहीं लेना चाहिए ,आरोपो में भी एक मर्यादा होनी चाहिए ,वो तो ग़ैर कानूनी काम कर रहे है और हम उनकी चोरी को बाहर बताए तो मर्यादा का ध्यान रखें ।
किस तरह का क़ानून के नाम पर लोकतंत्र के साथ ज़्यादती हुई है ,लोगो को जेलों में डाला गया ,उनके घरों ,दुकानों को बंद करवा दिया गया ,गिरफ़्तार कर लिया गया ,परिवार पर दवाब बनया गया ,किडनैपिंग और पता नहीं क्या क्या किया गया ।
वैसे अशोक गहलोत का ये शुरुवात से ही रहा है ,बीजेपी /आरएसएस की सरकार आए तो गहलोत के काम नहीं रुकने चाहिए और कांग्रेस सरकार आए और गहलोत सीएम आए तो बीजेपी /आरएसएस के काम नहीं रुकने चाहिए ।
अधिकारी का नाम लेने का जवाब है ये है जो नीचे न्यूज़ है ,ग्यानेश कुमार ने सत्ता के पैरो तले रख दी है पूरे भारत की आत्मा ,जनता के लिए ,जनता द्वारा ,जनता से तीनो ही उद्घोष ऐसे लग रहा है जैसे अपने अंतिम समय गिन रहे हो और तुम चाहते हो इस सीईसी का नाम नहीं लिया जाए ,इसको चेतावनी नहीं दी जाए ,अगर तुम्हारी बात राहुल गांधी या सीनियर लीडरशिप मान लेती तो अब तक मोदी इलेक्शन कमीशन के साथ मिलकर भारत में डिक्टेटर शिप ला चुका होता ।
तो हमारा तो इतना ही कहना है की प्रशासन को भी चेताओ और सरकार को भी समय एक जैसा नहीं रहता ,बदलेगा तब ये मंजर हमने तो सहन कर लिया लेकिन तुम्हारी रूह काँप जाएगी ।
🎯चुनाव आयोग के अंदर किसकी मनमर्जी चल रही है?
🎯दो चुनाव आयुक्तों ने नियम पालन न होने की शिकायत क्यों की?
🎯नए वोटर जोड़ने की प्रक्रिया में कैसे अड़चन पैदा की गई?
🎯फ़ॉर्म 6 के मामले में सरकार की शक्तियों को ठेंगा क्यों दिखाया गया?
🎯आयोग के जिन अधिकारियों को वोटर जोड़ने और हटाने का हक़ है, उनके हाथ क्यों बांध दिए गए?
🎯देशभर के वोटरों के डेटा को दिल्ली से कंट्रोल करने का चलन क्यों शुरू किया गया?
🎯क्यों 10 महीनों में कम से कम 14 बार और एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज करनी पड़ी?
🎯आपत्तियों के बाद फैसले कैसे ले लिए गए?
🎯और ऐसी नौबत क्यों आई कि चुनाव आयुक्तों के कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत करनी पड़ी?
जानिए इन सभी सवालों के जवाब. हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में. वीडियो देखने के लिए आएं इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इशारे पर चुनाव आयोग की इसी "चोरी" के खिलाफ नेता विपक्ष @RahulGandhi जी पिछले 2 साल से पुख्ता सबूतों के साथ देश को आगाह कर रहे हैं।
राहुल जी ने जिस "वोट चोरी" और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठाया, उस सब के बीच चुनाव आयोग के भीतर से उठी ये आवाज़ और आपत्तियां लोकतांत्रिक व्यवस्था व चुनाव प्रक्रिया के लिए बेहद गंभीर एवं चिंताजनक है।
इंडियन एक्सप्रेस के इस खुलासे के बाद ज्ञानेश कुमार को 1 मिनट भी अपने पद पर रहने का अधिकार नहीं है। देश के चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। उनकी बिना सहमति और जानकारी के फैसले लिए गए जाने, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
देशभर में भाजपा की सरकारें बनाने के लिए जिस तरह चुनाव आयोग की मिलीभगत से लोकतंत्र लूटा गया, वो शर्मनाक है।
सवाल ये है कि 3 सदस्यीय संवैधानिक संस्था के भीतर 2 चुनाव आयुक्तों ने बार-बार फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई, बावजूद इसके उन्हें गुमराह रखकर निर्णय कैसे लिए गए? ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूचियों में फेरबदल से लेकर SIR प्रक्रिया में वोट काटने का खेल किसके आदेश पर किया? देश को जवाब दीजिए।
@ECISVEEP
वोट चोरी ।
सबसे ज़्यादा एंटी नेशनल है ,
ये हर जगह बीजेपी के लोगो द्वारा चुनाव आयोग के हाथो हो रही है ,जयपुर नगर निगम में कांग्रेस को बीजेपी से ज़्यादा वोट मिले लेकिन सीट कम आई ,क्योकि बीजेपी ने परिसीमन में ऐसे वार्ड बनाये जीसमें एक वार्ड में मात्र पाँच हज़ार जनसख्या तो दूसरे वार्ड में तीस हज़ार ।
#ExpressInvestigation | SIR, which began in Bihar in June 2025, an otherwise routine clean-up of the rolls, has struck more than 13 crore names off the draft voter rolls in 30 States and Union Territories. This has put the Election Commission at the centre of intense public debate over its role in deciding who gets to vote — and who doesn’t.
An investigation by The Indian Express reveals that questions were raised on these very issues within the three-member Election Commission itself, time and again through much of this same period. By two of the three Election Commissioners, Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi, no less.
Reported by: @RitikaChopra__
Read: https://t.co/5wxH2BOWkG
संगठन सर्जन के द्वारा राहुल की सोच के अनुसार ,कांग्रेस विचारधारा की लड़ाई सड़क पर जनता के लिए करने वाले लोग चुने गए है ।
सीकर जिलाध्यक्ष @GathalaSunita पीसीसी अध्यक्ष @GovindDotasra के जिले से है और जितना बेख़ौफ़ ,दमदार उनका प्रदेश अध्यक्ष है उतनी ही जिलाध्यक्ष है ।
प्रशासन और पुलिस तंत्र की अनैतिक कारवाइयो के विरुद्ध सीकर जिलाध्यक्ष ने भी बढ़िया लड़ाई लड़ी और माकूल जवाब दिया ,प्रशासन और पूरा तंत्र सामने होते हुए भी लोसल में कांग्रेस का चेयरमैन बनवा ही दिया ।
तिजारा नगर पालिका के पार्षदों को कितना सहन करना पड़ा है वो इस वीडियो को देख कर समझ सकते है ।
पहले हरियाणा पुलिस ने अनैतिक /इलीगल उन्हें डिटेन किया और वे किस तरह इस बीजेपी /आरएसएस के चंगुल से छूठे वो भी देखिए ।
ऐसे लगा रहा है जैसे डाकुओं के चंगुल से कोई दर्शनयात्री छूठरहे है ।
वर्तमान सरकार को वो अधिकारी चाहिए जो इनके सामने झुककर चले और इनके हर अनैतिक कार्यों में सहयोग करे ।
वर्तमान निकाय चुनावो में हमने लगभग जगह ऐसा प्रशासन देखा जो ऐसे लग रहा था जैसे बीजेपी /आरएसएस के लिए कार्य कर रहे हो ,तो ऐसे दमदार आदमी का चुभना बीजेपी के लिए जायज है जिसमे रीढ़ हो ।
सवाईमाधोपुर में चुनाव ड्यूटी के दौरान अपना फर्ज निभाने वाले पुलिस अधिकारी राजेंद्र मीणा जी का हौसला एवं संविधान और नियमों के प्रति निष्ठा देखकर शायद कुर्सी पर जमे कुछ "दरबारियों" को जरूर शर्म आएगी।
कोई तो है खाकी वर्दी वाला, जिसकी वफादारी सत्ता के प्रति नहीं, बल्कि अपने फर्ज के प्रति है।
लेकिन सवाल ये है कि राजस्थान पुलिस इतनी बेबस क्यों हैं? सत्ता के अहंकार में BJP के नेता, कानून के दायरे में अपना फर्ज निभा रहे अधिकारी के साथ हाथापाई और बदसलूकी कर रहे हैं, और पुलिस महकमा तमाशा देख रहा है।
ऊपर से मुख्यमंत्री को फोन लगाने और नौकरी करना भुला देने की धमकी दी जा रही है। एक पुलिस अधिकारी को खुलेआम इस तरह धमकाया जा रहा है। ऐसा लगता है सत्ता का तांडव चरम पर है, और सरकारी तंत्र भी बेबस बना हुआ है।
अगर अब भी इस तानाशाही के खिलाफ आवाज बुलंद नहीं की, तो याद रखिए.. आज राजेंद्र जी का नंबर है, कल आपका नंबर भी आएगा।
@PoliceRajasthan
एक एमएलए वो भी दूसरी बार के साथ इस तरह का व्यवहार अत्यंत निंदनीय है ,ये तो @MukeshBhakar_ दमदार व्यक्ति है वरना इस पुलिस प्रशासन ने सरकार की देखरेख में काफ़ी अनैतिक कार्य पिछले दस दिनों में किए है ।
रुमाल से ऐसे मुंह पूछ रहा व्यक्ति मंत्री जी का कोई खास चमचा ही होगा ,
वैसे संज्य शर्मा जी मान गए ये तो आपकी आँखे और मुंह ही गिला हुआ ,चमचे आपके वफ़ादार है ,कुछ भी पूछने को तैयार रहते है ।
कोई इसे अशोक गहलोत जब मुख्यमंत्री थे तो उनके द्वारा उपकृत हुए बीजेपी /आरएसएस के लोगो से जोड़ कर ना देखे या फिर अभी बीजेपी राज में अशोक गहलोत के दाये बाये के सभी लोग जेल में है लेकिन उनपर कोई आंच नहीं है इससे भी जोड़कर ना देखे ।
बीजेपी से दोस्ती निभाने वालों को ठिकाने लगाए कांग्रेस
छुपे हुए संघी कांग्रेस में बैठे है
पहली बार मजबूत अध्यक्ष पार्टी ने राजस्थान में दिया है
राजस्थान में जो( तू मेरे पाप छुपा, में तेरे पाप छुपाऊ)
ये खेल समाप्त होगा
राम मंदिर के महंत की कहानी ।
महंत बाबा लाल दास अयोध्या में रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी थे। 1980 और 1990 के दशक में जब अयोध्या विवाद देश की राजनीति के केंद्र में था, तब वे अपनी तटस्थता, शांतिप्रिय दृष्टिकोण और निडर बयानों के लिए जाने जाते थे।
महंत लाल दास भगवान राम के अनन्य भक्त थे, लेकिन वे धर्म को राजनीति से जोड़ने के सख्त खिलाफ थे
उन्होंने कहा था कि भगवान राम आस्था के प्रतीक हैं, उन्हें चुनाव जीतने का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्हें बीच में केवल इसलिए हटा दिया गया ,की उन पर आरोप लगा दस रुपये के दान की चोरी का ,या यू कहे हिसाब का मिलान का जो कभी पुष्ठ नहीं हुआ ,लेकिन षड्यंत्र द्वारा बीजेपी /आरएसएस के लोगो ने उन्हें राम मंदिर के महंत पद से हटा दिया गया ।
खेर उसके बाद उनकी गोली मार कर हत्या कर दी जाती है जिसके क़ातिलो का कोई पता नहीं चल पाया ।
लेकिन बात यह है कि दस रुपये की दान चोरी पर हटाने वाले आज करोड़ो अरबों की हेर-फेर कर रहे है ,बाकयदा ऑन रिकॉर्ड कर रहे है लेकिन उनपर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है ।
@tribalvoice99@DharmendraS_inc पैसे और संसाधन में बेशक कांग्रेस कमजोर है लेकिन धर्मेंद्र राठौड़ कमजोर नहीं है ।
आज के समय में एक साथ कितनी भी मोटी रकम का जुगाड़ धर्मेंद्र राठौड़ के लिए करना बाये हाथ का खेल है ।
Congress State Prez narrating the misuse of Power in a peaceful state like Rajasthan show's the way how BJP dictates.
It's shameful that biggest democracy on the globe is at all time low in that perspective.
BJP need to rethink what they are giving will comeback someday.
धर्मेंद्र राठौड़ ,जिसे अशोक गहलोत का बिल्कुल खासमखास माना जाता है ,वो धरातलीय नेता नहीं है ,ब्रोकरेज का काम करता है गहलोत के लिए ,सत्ता में हो तब भी और बाहर हो तब भी ,गहलोत के ज्यादातर कांग्रेस सरकार में कांग्रेस विचारधारा के विपरीत जो भी निर्णय लिए गए उसमे इसका भी उतना ही योगदान है जितना गहलोत का है ।
केसरी सिंह को आरपीएससी सदस्य नियुक्त करने में भी इनका बहुत महत्वपूर्ण योगदान है ,अगर राजपूत को ही आरपीएससी सदस्य नियुक्त करना था तो कांग्रेस विचारधारा के राजपूत पढ़े लिखे व्यक्ति बहुत थे ,लेकिन एक बीजेपी विचारधारा के व्यक्ति को लाया गया ,जिसकी सोच और जातीयों के प्रति हीन भावना की है ।
रही बात अजमेर के नगर निगम की तो इसे बेफालतू की हाइप दे रखी थी ,पार्षद जिताने में इसका कोई योगदान नहीं थी ,हाँ अगर अजमेर नगर निगम में कांग्रेस का चेयरमैन बन जाता तो उन चार निर्दलीय को लाने में जरूर माना जाता ,लेकिन देखी कर्नाटक तक शेखी बखार आए मान्यवर और चार निर्दलीय नहीं ला सके ।
ये नहीं होना शक भी पैदा करता है आखिरकार ऐसा क्यों हुआ की छ निर्दलीय एमएलए जुगाड़ने वाला आदमी चार पार्षद नहीं जुग़ाड पाया ??
शहरी क्षेत्र जो की मुख्य रूप से बीजेपी का स्ट्रॉंग होल्ड माना जाता है ,उसके बाद बीजेपी ने अपने मन मुताबिक वार्डो का परिसीमन भी किया है ।
प्रशासन ने पूर्ण सहयोग किया है जिताऊ उम्मीदवार खोज निकालने में उनके नॉमिनेशन फॉर्म से लेकर वोट डलवाने तक का रिकॉर्ड प्रशासन रख रहा था ।
बाक़यादा थानाधिकारियों को टारगेट दिए गए ।
फिर भी बीजेपी निकाय चुनावो में मात्र आधे प्रतिशत से आगे रह पाई ,अब जब जनता ने वोट नहीं दिया तो चुनाव आयोग ,प्रशासन को खुलकर सरकार की तरफ़ से धरातल पर बीजेपी का चेयरमैन बनाने के लिए कहा गया
उसके बाद
निर्दलीय,कांग्रेस से जीते हुए पार्षदों पर केस दर्ज हर ,उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर रेड डाली गई ,कई जगह काम धंधों को सील कर दिया गया ,जीते हुए पार्षदों के परिवार वालो को धमकाया गया ,जहाँ कांग्रेस पार्षद ठहरे हुए थे वहाँ पुलिस प्रशासन जाता है और डील बिठाने की कोशिशे करता है ।
कांग्रेस के पार्षदों को डिटेन किया गया ,गंगानगर में तो अपहरण तक हो गया ,गोलिया चली बाक़्यदा पुलिस सरक्षण में ,हैरानी की बात है इसके बाद भी बीजेपी के अनुकूल रिजल्ट नहीं रहा।
बाक़ी कांग्रेस संगठन ने बाखूब काम किया इतनी विपरीत परिस्थियों में भी और ये संगठन का कमाल था की लगभग बीजेपी के बराबर वोट कांग्रेस को मिले ।
@GovindDotasra@TikaRamJullyINC ने पूरे राजस्थान को एकसूत्र में ऐसा पिरोया की सब कांग्रेस के कार्यकर्ता एक होकर इस फासीवादी विचारधारा के ख़िलाफ़ लड़े और जीते ।
Held an in-depth meeting in Jaipur with Rajasthan PCC President Sh. @GovindDotasra ji, LOP Sh. @TikaRamJullyINC ji and senior party leaders to review our performance in the recently concluded urban local body elections. This election cycle, we saw a significant growth in our urban support base and our grassroots organisation gave a formidable fight to the BJP.
This, despite the BJP's best efforts to rig the elections through a patently unfair delimitation exercise and by misusing the police machinery in their favour. We are confident that we will only grow further from this performance in the coming days.
We also assessed our preparedness for the upcoming Panchayati Raj elections, and chalked out a clear plan of action to defeat the BJP and emerge victorious across the rural landscape of Rajasthan.