शिया मुस्लिम पार्टियों की इराक में शर्मनाक हरकत!
लड़कियों की शादी की उम्र घटाकर 9 साल करने का प्रस्ताव शिया मुस्लिम पार्टियों ने संसद में पेश किया है।
सभी शिया मुस्लिम पार्टियां एकजुट होकर इस कानून को लाने का प्रयास कर रही हैं।
पूरी दुनिया में हो रहा है इस प्रस्ताव का विरोध, बच्चियों पर होंगे जुल्म।
काकोरी कांड के सौ साल पूरे हो गए. बिस्मिल, अशफाकुल्लाह खान, चंद्रशेखर आज़ाद,राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह समेत कई क्रांतिकारियों की दास्तान समेटे काकोरी कांड पर काकोरी के शहीद स्मारक से ये खास प��शकश किस्सागो हि��ाशु के साथ .
एक बार देखेंगे तो देखते रह जाएंगे
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
क्या दिल्ली में विधानसभा ख़त्म कर जनता द्वार चुनी हुई सरकार की व्यवस्था समाप्त कर दी जानी चाहिए?
हम तीन इंसानी ज़िंदगियों को किसी आपदा की वज़ह से नहीं बल्कि एक अव्यवस्था की वज़ह से खो चुके हैं..
इस अव्यवस्था के एक तरफ़ है दिल्ली सरकार अर्थात उपराज्यपाल जिनके पास पॉवर है पर जवा��देही नहीं और दूसरी तरफ़ जनता द्वारा चुनी हुई सरकार जिसके पास ज़िम्मेदारी है पर पॉवर नहीं।
और अब आलम ये है कि जहाँ एक तरफ़ घोर बेशर्मी है वहीं दूसरी तरफ़ कोरी लाचारी।
आख़िर कब तक दिल्ली वाले इतनी बेशर्मी और लाचारी के बीच रहेंगे?
लिहाज़ा सुप्रीम कोर्ट से विनम्र् निवेदन हैं कि वो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 को चुनौती देने वाली याचिका को ठंडे बस्ते से निकालकर ��ुनवाई कर उस पर जल्द से जल्द फ़ैसला दे।
अगर सुप्रीम कोर्ट, संविधान द्वारा चिन्हित तीन विषयों को छोड़कर, दिल्ली की विधानसभा, दिल्ली के विधायक, दिल्ली के मुख्यमंत्री और मंत्री को वही अधिकार नहीं बहाल करती है जो देश के अन्य भाग में इसी नाम से पुकारे जाने वाले लोगों को प्राप्त है, तो वर्तमान व्यवस्था को हटाकर 1991 के पहले वाली व्यवस्था ही लागू कर दी जानी चाहिए।
जानकारी के लिए बता दें की 1991 के पहले दिल्ली सिर्फ़ केंद्र शासित प्रदेश थी। यहाँ केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल, प्रशासक थे।
उस वक़्त देश के ज़िम्मेदार लोगों को लगा कि दिल्ली में तब रह रहे लगभग एक करोड़ लोगों के द्वारा उनके प्रति ज़िम्मेदार और जवाबदेह सरकार होनी चाहिए।
लिहाज़ा, संविधान संशोधन के द्वारा तीन विषयों- पुलिस, लॉ एंड ऑर्डर और ��ैंड, को छोड़कर सभी विषयों पर जनता द्वारा चुनी गईं सरकार को दिल्ली की सत्ता चलाने की बागडोर सौंपी गई।
अब त्रासदी ये है कि, 1991 में हुए इस बदलाव के बारे में किसी ने उपराज्यपाल महोदय को बताया ही नहीं। लिहाज़ा वो हमेशा किसी भी मामले में जब तब अपनी टांग अड़ाते रहे।
पर 2015 से हालात और बिगड़ गए।
देश में प्राप्त विशाल जनादेश के नशे में मदहोश केंद्र सरकार को ये क़तई मंज़ूर न था कि उनकी नाक के नीचे एक ऐस�� सरकार काम करे जिसे देश में तो नहीं पर दिल्ली ��ें उनसे भी विशाल जनादेश मिला हो।
लिहाज़ा, मात्र एक आदेश के ज़रिये 2015 में केंद्र सरकार ने दिल्ली के सर्विसेज़ विभाग, जोकि अधिकारियों और कर्मचारियों को कंट्रोल करता है, उसे अपने कंट्रोल में ले लिया।
आठ साल की लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के आदेश को निरस्त करते हुए फिर से सर्विसेज़ को दिल्ली की चुनी हुई सरकार के हवाले कर दिया।
पर मात्र कुछ ही दिनों में के��द्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के डिसिजन को पलटते हुए सर्विसेज़ फिर से अपने क़ब्ज़े में ले लिया।
अब मुद्दा बस इतना सा है कि जब संविधान ने सिर्फ़ तीन विषयों को दिल्ली की चुनी हुई सरकार के दायरे से बाहर रखा है तो बिना संविधान संशोधन के चौथा विषय कैसे दिल्ली सरकार से छीना गया है?
और बात सिर्फ़ अधिकारों की नहीं है।
अगर प्रैक्टि��ली देखें तो आख़िर बिना अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियंत्रण के कोई कैसे प्रशासन चला सकता है?
जवाबदेही और ज़िम्मेदारी में स्पष्टता न होने का ताज़ा एग्जाम्पल आप इन तीन छात्रों की मौत के मामले में ही देख���ए।
हुक्मरानों ने उस रास्ते से अपनी कार ड्राइव करने वाले व्यक्ति को भी मौत का ज़िम्मेदार मानते हुए गिरफ़्तार कर लिया।
पर जो वाक़ई ज़िम्मेदार हैं जैसे दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड और लोकल थाने के अफ़सर, उनकी कोई जवाबदेही ही नहीं है। इन लोगों के ख़िलाफ़ तो शायद हत्या का मुक़दमा ही दर्ज न होगा।
तो इसलिए अब ये तय हो जाना चाहिए कि दिल्ली में जनता की सरकार होगी या 1991 के पहले कि उपराज्यपाल वा��ी सरकार?
ये दो नावों का सफ़र ठीक नहीं है, ज़िम्मेदारी और जवाबदेही एक साथ, एक जगह होनी चाहिए।
इंसानों की ज़िंदगियों का सवाल है…
ईमानदार टैक्सपेयर निराश न हों. उनके लिए मोदी जी ने 10 साल से कुछ सोच रखा है. सैलरी वाले लोगों के लिए मोदी जी विशेषकर चिंतित हैं क्योंकि उन्हीं के शब्दों में 'उन बेचारों को कोई चारा नहीं है, उनका इनकम तो यूं ही कट जाता है.'
हम डिजिटल के विरोध में नहीं व्यवस्था के विरोध में है कोई नहीं कह रहा कि हम उपस्थिति नही देंगे हमारी मांग व समस्याएं है,इनके निस्तारण के पश्चात ही डिजिटल उपस्थिति को प्रभावी करना चाहिए 31EL,15 half डे लीव,15 CL व कैशलेस चिकित्सा #boycottऑनलाइनहाज़िरी#BasicEducation#UpBasicSchool
#bycott_online_attendance#BasicEducation#UpBasicSchool
1. 15 CL
1. 15 हॉफ डे CL
2. 30 EL
3. राज्यकर्मचारी का दर्जा
4. 30 km की परिधि में हर ��िसी को विद्यालय
5. कैशलेस चिकित्सा सुविधा परिवार सहित
6. ससमय प्रमोशन
7. कलर्क की व्यवस्था
8. पुरानी पेंशन
हम डिजिटल उपस्थिति के विरोध में नहीं व्यवस्था के विरोध में है कोई यह नहीं कह रहा कि हम ���पस्थिति नही देंगे। हमारी मांग, क्या समस्याएं है, इन पर गौर कर समस्याओं के निस्तारण के पश्चात ही डिजिटल उपस्थिति को प्रभावी करना चाहिए।
#boycottऑनलाइनहाज़िरी
#BasicEducation
#UpBasicSchool
रास्ते क्रिटिकल, हाजिरी डिजिटल।
हम शिक्षक वैसे तो टाईम पर स्कूल पहुंच जाते हैं।लेकिन कभी क्रॉसिंग बंद, जाम, रूट डायवर्सन, कावड़ियों की भीड़,बारिश,आंधी इन सब वजहों से जब हम कभी लेट होते हैं तो इसमें हमारा क्या दोष है?
#boycottऑनलाइनह��ज़िरी
ये घटना कब घटी भाई कब भारतीय सेना असहाय हो गई कब ये लोग कब गोला बारूद लेकर पहुंच गए.??🤔🤔
हद्द होती है यार 😃😃
; @NayakRagini
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यूके की संसद में सवाल उठ गया कि ‘पीएम बोरिस जॉनसन ने बुलडोज़र पर चढ़ फ़ोटो क्यों खिंचवाई जबकि बुलडोज़र से मुसलमानों के घर, दुकान, मस्जिद तोड़े जा रहे हैं... @NadiaWhittomeMP
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इतनी गरमी और बाज़ार में है केवल सफ़ेदा। सफ़ेदे से नीरस आम क्या होगा। कथित “रत्नागिरि-हाफूस” भी मिल रहा है। ज़्यादातर खट्टा। कहते हैं दो रोज़ बाद प्रयोग करें। घर मे��� रखा हो तो रखा कब तक रह सकता है? वैसे भी हाफूस या अल्फोंसो का नाम-दाम ही ऊँचा है, स्वाद नहीं। लंगड़ा आवे तो मन भावे।
झांसी
➡ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा का बयान
➡बिजली कटौती के सवाल पर बोले ऊर्जा मंत्री एके शर्मा
➡पिछली सरकारों में बिजली पर काम नहीं हुआ – शर्मा
➡काम हुआ होता तो ये दिन नहीं देखने पड़ते – शर्मा
➡बिजली नहीं आना कोई आज की समस्या नहीं- शर्मा
क्या आप जानते हैं कि निखिल गांधी कौन है? किसी ज़माने में कोलकाता से जाकर मुंबई में पान का पत्ता बेचा करता था। आज हजारों करोड़ की संपत्ति का मालिक है। उम्र सिर्फ 55-56 साल होगी। तरक्की का अंदाज़ा लगा सकते हैं। मुंबई के सबसे पॉश कहे जाने वाले नेपियन सी इलाके में रहता है।
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