#WATCH | On #DelhiElectionResults, former AAP leader & poet Kumar Vishwas says, "I congratulate the BJP for the victory and I hope that they'll work for the people of Delhi... I have no sympathy for a man who crushed the dreams of AAP party workers. Delhi is now free from him... He used those dreams for his personal ambitions. Today, justice has been delivered. When we got the news of Manish Sisodia losing from Jangpura - my wife who is apolitical cried..."
ये कुहुक अग्रवाल हैं, ये कल हैदराबाद में मिल गईं ! अपने पिताजी की गोद में चढ़कर मुझ तक पहुँची, कल इनका जन्मदिन था ये देवी जी मात्र सात वर्ष की हैं किंतु इनकी स्मरण शक्ति सत्तर वर्ष की है और मोहिनीशक्ति ? इसे आप इनका यह विडियो देखकर स्वयं ही निश्चित कर लें। इन्होंने प्रिय @AalokTweet द्वारा रचित शिवतांडव स्तोत्र के हिंदी भावानुवाद को पूरा कंठस्थ किया हुआ है। ❤️👏👏👏👏👏
सत्य ही, बच्चे राष्ट्र की आत्मा होते है�� क���योंकि यही हैं जिनके मस्तिष्क में अतीत सोया हुआ है, यही हैं जिनके पहलुओं में वर्तमान करवटें ले रहा है और यही हैं जिनके क़दमों के नीचे भविष्य के अदृश्य बीज बोये जाते हैं। प्रिय कुहुक आप खूब यशस्वी हों दीर्घायु हों ❤️💐🤗
ये दृश्य जब आने वाली पीढ़ीयां देखेंगी
तो बोला जायेगा.. कि एक संत हुआ करता था
जो उस वक्त उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री था
और उस संत ने महाकुम्भ का जो आयोजन किया था वो सारी दुनिया टकटकी लगाए देख रही थी
क्या आप उस संत को पहचानते हैं ?
इसे
हर कोई पुरा सुने बहुत महत्वपूर्ण कथा है।
कुमार विश्वास आजकल श्रीराम को समझाने के लिए एक दिन में 3 घंटे के लिए 40 लाख रु चार्ज लेते है और तीन ��िन में 1 करोड़ रु ...
जिस राम के चरित को समझाने के लिए वाल्मिकी जी ने और श्रीं तुलसीदास जी ने कोई धन नहीं लिया ... आज सुधांशु जी को मैं प्रणाम करता हूं कि,
उन्होंने निःशुल्क समझा दिया ।। 🙏🏻
सोचिए कोई राम को समझाने का लाखों रू ले रहा, कोई शिव को समझाने के लाखों रू ले रहा तो कोई कृष्ण के लीला बताने के लिए लाखों रू ले रहा पर एक भी किसी का हृदय परिवर्तन नहीं कर पा रहा ...
इन लोगों से तो सुधांशु जी जैसे कई गुना ज्ञानवान है जो राम को उतनी सरल भाषा में समझा देते है। 🙏🏻
🚩🚩🚩🚩🚩
जय श्री राम !!
Zepto के Dark Pattern में फंस गए आप ! महंगे फोन वालों को ठग रहा है Zepto
Zepto की हेराफेरी का LIVE DEMO, आईफोन पर ज्यादा रेट...एंड्रॉयट पर कम र��ट
#DNA #Zepto
@Anant_Tyagii
जाट मुजफ्फरनगर भूल गये...
पंडित कश्मीर भूल गये...
सिख 1984 भूल गये...
लेकिन मुसलमान...
गुजरात नहीं भूल पा रहे...😠
हिन्दुओं अभी ��ी संभल जाओ 🫵 एक-जुट हो जाओ...
वर्ना हर जगह
"संभल" जैसे हालात होंगे...
तब फिर संभलना चाह कर भी संभल न पाओगे..!!
क्या आपको पता है ...?
कस्मे वादे प्यार वफ़ा सब बातें है बातों का क्या ?
फ़िल्म उपकार के गीत का यह अंतिम भाग तब की सरकार ने सेंसर कर दिया था।
क्योंकि
इसमे कुछ आपत्तिजनक सत्य परोसा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड का तंबू फाड़ डाला है...
मोदी है तो मुमकिन है
सभी लोग पूरा पढ़ें और सब जगह शेयर करें..
"मुस्लिम वक्फ बोर्ड Vs जिंदल ग्रुप and others केस"
बीते शुक्रवार को जिस दिन देश भर में मुस्लिमों द्वारा अलविदा नमाज पढ़ी जा रही थी... देश की सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे अहम मामले में फैसला सुना रहा था..
जो कि, आगामी समय में देश की दशा और दिशा बदल सकता है.
वो केस था... "मु स्लिम वक्फ बोर्ड बनाम जिंदल ग्रुप केस"
ये केस कुछ इस तरह का था कि... राजस्थान सरकार ने 2010 में जिंदल ग्रुप ऑफ कम्पनीज को एक जमीन माइनिंग के लिए अलॉट की.
उ�� जमीन के एक भाग पर एक छोटा सा चबूतरा और उससे लगा एक दीवार बना हुआ था.
इसी ग्राउंड पर वक्फ बोर्ड ने इस जमीन पर दावा किया परंतु सुप्रीम कोर्ट ने उसके इस दावे की हवा निकाल कर ��क माईल स्टोन जजमेंट दे दिया.
लेकिन, इस घटना को ठीक से समझने के लिए पहले हमें नियम कानून को ठीक से जानने की आवश्यकता है.
असल में नियम यह है कि जब कोई जमीन / प्रोपर्टी किसी से खरीदी या बेची जाती है तो उस जमीन का सर्वे होता है जो कि कोई सरकारी अमीन या तहसीलदार करते हैं..
उसके बाद उस जमीन के बारे में आपत्ति मांगी जाती है.
अगर कहीं से कोई आपत्ति नहीं आई तो फिर उस जमीन का नए मालिक के नाम पर दाखिल खारिज क�� दिया जाता है.
इस... वक्फ के मामले में भी कुछ ऐसा ही है.
वक्फ Act 1965 और 1995 के अनुसार... अगर वक्फ बोर्ड किसी जमीन पर अपना दावा करता है तो वक्फ के सर्वेयर उस जमीन पर जाकर उसका सर्वे करते हैं और अगर उन्हें ऐसा लगा ( if they feel) कि ये वक्फ बोर्ड की जमीन है तो वे उसे अपने रिकॉर्ड में चढ़ा लेते हैं.
लेकिन, अगर किसी को वक्फ बोर्ड के इस कृत्य पर आपत्ति हो तो वो "वक्फ ट्रिब्यूनल" में उसकी शिकायत कर सकता है.
��र, वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला उसके लिए बाध्यकारी होगा.. क्योंकि, इसे कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता है.
(ये नियम खान्ग्रेस सरकार का बनाया हुआ है)
खैर... तो राजस्थान के जमीन के मामले में भी ऐसा ही हुआ.
उस जमीन पर मौजूद चबूतरे और दीवार की वजह से वक्फ बोर्ड के सर्वेयर 1965 में उस जमीन पर गए और उस जमीन को वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर उसे वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में चढ़ा लिया.
कालांतर में... 1995 में नया Act ��ने के बाद वक्फ बोर्ड के सर्वेयर ने फिर उसे वक्फ की संपत्ति घोषित करते हुए उसे अपने रिकॉर्ड में चढ़ा लिया.
इसीलिए... जब 2010 में राजस्थान सरकार ने इस जमीन को माइनिंग हेतु जिंदल ग्रुप को दिया तो वहां के लोकल अंजुमन कमिटी ने इस पर आपत्ति की और इसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए वक्फ बोर्ड को चिट्ठी लिख दी.
इसके बाद वक्फ बोर्ड इसे अपनी संपत्ति बताते हुए सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताई और वहाँ बाउंड्���ी करना शुरू कर दिया.
इस पर मामला राजस्थान हाईकोर्ट चला गया जहाँ फिर वक्फ बोर्ड ने आपत्ति जताई कि 1965 और 1995 की वक्फ एक्ट के तहत ये संपत्ति हमारी है और ये हमारे रिकॉर्ड में भी चढ़ा हुआ है.
इसीलिए, सरकार इसे किसी को नहीं दे सकती है और न ही कोर्ट इस केस क�� सुन सकती है क्योंकि अगर कोई डिस्प्यूट है भी...
तो, उसे हमारा वक्फ ट्रिब्यूनल सुनेगा न कि कोर्ट.
इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्टिकल 226 का हवाला देते हुए वक्फ बोर्ड को क्लियर किया कि...
वो किसी भी ट्रिब्यूनल या लोअर कोर्ट से ऊपर है और आर्टिकल 226 के तहत वो इस केस को सुन सकता है.
और, हाईकोर्ट ने इस मामले में एक स्पेशलाइज्ड कमेटी बिठा दी.
2012 में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी एवं उसके बाद कोर्ट ��े आदेश दे दिया कि ये वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं है और इसे माइनिंग के लिए दिया जा सकता है.
इस फैसले से वक्फ बोर्ड नाखुश होकर सुप्रीम कोर्ट चला गया.
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में मामला फंस गया.
क्योंकि... सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आपने क्या सर्वे किया है अथवा आपके रिकॉर्ड में क्या चढ़ा है... वो सब जाने दो.
हम तो कानून जानते हैं...
और, कानून के अनुसार (वक्फ एक्ट 1995 की धारा 3 R के अनुसार) कोई भी प्रोपर्टी वक्फ की प्रॉपर्टी तभी हो सकती है अगर वो निम्न शर्तों को पूरा करता है ...
👉वो जिसकी प्रोपर्टी है अगर वो इसे वक्फ के तौर पर अर्थात इस्लामिक पूजा प्रार्थना के लिए सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल करता हो/ करता था.
👉वो संपत्ति वक्फ के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए दान की गई हो.
👉राज्य सरकार द्वारा उस जमीन को किसी रिलिजियस काम के लिए ग्रांट की हो.
👉अथवा, उस जमीन के मजहबी उपयोग के लिए जमीन के मालिक ने डीड बना कर दी हो.
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि वक्फ एक्ट 1995 के अनुसार उपरोक्त शर्तों को पूरा करने वाली प्रोपर्टी ही वक्फ की प्रॉपर्टी मानी जायेगी.
इसके अलावा कोई भी संपत्ति वक्फ की संपत्ति नहीं है.
इ���के अनुसार... जिस प्रॉपर्टी पर आप दावा कर रहे हो...
उस प्रॉपर्टी को न तो आपको किसी ने दान में दी है, न ही उसकी कोई डीड है और न ही वो आपने खरीदी है.
इसीलिए, वो संपत्ति आपकी नहीं है और उसे माइनिंग के लिए दिया जाना बिल्कुल कानून सम्मत है.
👉अब सवाल है कि ये तो महज एक फैसला है और इसमें माइल स्टोन जैसा क्या है ?
तो, इसके लिए हम थोड़़ा इतिहास में जाते हैं कि असल में हुआ क्या है।
जब 1945 के आसपास लगभग ये तय हो चुका था कि भारत अब आजाद हो जाएगा और भारत का विभाजन भी लगभग तय ही था...
तो, भारत के वैसे मुसलमान जो.. पिग्गिस्तान जाने का मन बना चुके थे.. (जिसमें से बहुत सारे नबाब और छोटे छोटे रियासतों के राजा, जमींदार वगैरह थे) ने आनन फानन में अपनी जमीनों पर वक्फ बना दिया और भारत छोड़कर पिग्गिस्तान चले गए.
जिसके बाद देश में मुसरिम तुष्टिकरण में आकंठ डूबी सरकार के आ जाने के बाद वो संपत्ति/जमीन वक्फ बोर्ड के पास चली गई.
ऐसी लगभग 6-8 लाख स्क्वायर किलोमीटर जमीन होने का अंदेशा है.
इसके अलावा... कालांतर में रेलवे एवं नगर निगम की खाली जमीन, सार्वजनिक मैदानों, किसी नि���ी व्यक्ति के खाली प्लाटों आदि पर यहाँ के मूतलमानों अथवा शरारती तत्वों ने मिट्टी के कुछेक ढेर जमा कर दिए और ये दावा कर दिया कि.... यहाँ हमारी मस्जिद/ ईदगाह/ कब्रिस्तान है...
इसीलिए, ये वक्फ की संपत्ति है.
और, चूंकि 2014 से पहले लगभग हर जगह इनकी तुष्टिकरण वाली सरकारें थी तो उन्होंने इनके दावे को आंख बंद कर मान लिया और उन संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में जाने दिया.
लेकिन, अब सुप्रीम कोर्ट ने ये ���्पष्ट ��देश पारित कर दिया है कि...
👉1947 से पहले ट्रांसफर किये गए किसी भी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का अधिकार नहीं होगा क्योंकि उसके कागज मान्य नहीं होंगे.
👉इसके अलावा... 1947 के बाद भी जिन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड अपना अधिकार जताता है.... उनके कागज उसे दिखाने होंगे कि वे संपत्तियां उसके पास आईं कहाँ से ?
और, वक्फ बोर्ड के पास संपत्ति आने के लिए वही शर्त हैं जो ऊपर उल्लेखित किया गया है.
👉अगर... वक्फ बोर्ड अपने किस��� संपत्ति का प्रॉपर कागज नहीं दिखा पाता है तो सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले के आलोक में वो जमीन/संपत्ति अपने मूल मालिक को वापस दे दी जाएगी.
👉और, अगर जमीन/ संपत्ति का मूल मालिक बंटवारे के बाद देश छोड़कर जा चुका है अथवा 1962, 1965 & 1971 के युद्ध में पिग्गिस्तान का साथ देने के आरोप के कारण भाग गया है.
तो, उस स्थिति में वो संपत्ति "शत्रु संपत्ति अधिनियम 2017" के तहत सरकार की हो जाएगी.
अब इसमें हमें और आपको सिर्फ करना ये है कि...
अगर आपके आसपास कोई ऐसी संपत्ति/जमीन है जो कि आपके अनुसार वक्फ बोर्ड का नहीं होना चाहिए तो आप इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का हवाला देते हुए संबंधित सरकार अथवा कोर्ट क�� सूचित कर सकते हैं.
और, सरकार / कोर्ट उस जमीन को वक्फ बोर्ड के अतिक्रमण से मुक्त करवाने के लिए बाध्य होगी क्योंकि ये सुप्रीम कोर्ट का आदेश है.
और हाँ... अगर आपकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है तो भी आप इस पोस्ट को अधिकाधिक लोगों/ग्रुप्स तक प्रचारित कर दें..
ताकि, अगर किसी के जानकारी में ऐसा विषय आए तो वो इस संबंध में उचित कदम उठा सके.
ध्यान रहे कि... 1947 में बंटवारे के समय पूर्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) को मिलाकर उन्हें लगभग 10 लाख 32 हजार स्क्वायर किलोमीटर जमीन दी गई थी और एक अनुमान के मुताबिक कम से कम इतनी ही जमीन/संपत्ति आज भारत में वक्फ बोर्ड के कब्जे /रिकॉर्ड में है.
इसीलिए, इस संबंध में आपका इस मैसेज को प्रचारित कर लोगों को जागरूक करना ही राष्ट्र हित में बहुत बड़ा कार्य होगा होगी.
जय मातृ भूमि
कैसे रामानंद सागर जी को रामायण बनाने में व टेलीकास्ट करने कांग्रेस सरकार ने दिक्कतें उत्पन्न की थी
पूरा वीडियो देखिए फिर आप आगे फॉरवर्ड कर दे धन्यवाद 🙏
जब से ये वीडियो देखी है मेरा तो दिमाग ही खराब हो गया 🙆♀️ फिर मैने सोचा कि सिर्फ मेरा ही दिमाग खराब क्यूँ हो ,, आपका भी तो होना चाहिए 🫵 😏
है कोई पढ़ा-लिखा भारतीय मौलवी जो हिसाब किताब देखकर इस 'गुस्ताख-ए-रशुल' की सजा मुकर्रर करे ?? 🙄
जम्मू में उमर अब्दुल्ला का हिंदुओं के प्रति नफरत का दौर शुरू हो चुका है ।।
उमर अब्दुल्ला के अधिकारियों द्वारा जम्मू में चालीस से ज्यादा कश्मीरी हिंदुओं की दुकानों को नष्ट करवा दिया गया है ।।
यह तो शायद नफरत के दौर की शुरुआत है ।। अंत और ���ी भयानक होने की संभावना है ।।
"Bharat का हाल Bangladesh जैसा करेंगे"
तीन कृषि कानुन वापस लेने के लिए किसान आंदोलन हुआ था, पर वो तीनों कानुन तो सरकार ने वापस ले लिया है,
वो तो 26 जनवरी थी,
25 लाख आदमी थे,
थोडी चूक रह गयी,
वरना तभी निपटा देते !
अब जैसे ही मौका लगेगा, बांग्लादेश जैसी हालत कर देंगे, हमारी तैयारी पूरी है, बस मौके की तलाश है"
मतलब साफ है,
लोकतंत्र द्वारा चुनी हुई सरकार को गिराना, देश में राष्ट्रपति शासन और अराजक��ा फैलाना ही इनका उद्देश्य है।
अब गंभीरता से सोचना पडेगा की ये किसके इशारे पर हो रहा है?
इनके पिछे जो भी होगा वो बचेगा नहीं।
: राकेश टिकैत, स्वघोषित किसान नेता
@HMOIndia
@MYogiadityanath जी
कर्नाटक में वक्फ बोर्ड के खिलाफ हजारों किसान सड़कों पर उतर गए हैं
वक्फ बोर्ड मंत्री जमीर अहमद तमाम हिंदू किसाने की जमीन छीनकर वक्फ बोर्ड को देने के लिए नोटिस पर नोटिस भेज रहे हैं
एक किसान ने तो आत्महत्या भी कर लिया
तथाकथित किसान संगठन और राकेश टिकैट इस पर खा��ोश है