@chitraaum शायद देख पाओ,,
ओर अगर देख लो समझने से परहेज मत करना
क्योंकि जानबूझ कर सेलेक्टिव होना आदत हे आपकी,, राहुल गांधी ने बिल्कुल भी झूठ नहीं कहा था,, सच को सच ही कहा जाएगा,
भले सच कहने वालों की रिच कम हो लेकिन फिर भी वो सच रहेगा,,
'चाय की दुकान पर कहा जाता है - तुम लोग डोम जाति से हो, तुम्हें ग्लास में चाय नहीं देंगे'
- दलित महिला
चाय की दुकान पर दलितों के साथ भेदभाव नहीं होता. ऐसा कहने वाले इस महिला को भी झुठला देंगे
@drshekhar2789@RatanRanjan_ जब -40 का फायदा लेने वाले अधिकतर
सवर्ण हे तो ढोल sc st obc ka क्यों पीटा जा रहा,, आरक्षण से भी ज्यादा घातक तो, मैनेजमेंट कोटा और डोनेशन वाला स्टूडेंट हे,,
@abhinav_blogger लेकिन खुद जातिवाद के पक्ष धर रहेंगे
लेकिन जाती राजनीति के विरोधी
यही उस तीसरी पीढ़ी को विरासत में भी दे जायेंगे
वा क्या सफल मीटिंग रही...
@Ad_Mishra_01 बिल्कुल ,, सही बात जब किसी एप्पल कंपनी में कम करने वाले ब्राह्मण का मर्डर पुलिस करदे तो A ग्रेड ki नौकरी 50 लाख रुपया वही
कोई sc का बंदा फर्जी मार दिया जाए तो 3 लाख ये भेदभाव,, भी क्यों
@neha_laldas पहले ये दिखाएंगे हम बाहुबली हे,
फिर जब केश होते हे, इनके बचाव में सो कॉल्ड चुटिया वाले एक्टिविस्ट बिना जमीनी हकीकत जाने डिफेंड करते हे बस जाती के नाम पर,,
हद हे,, देश को तोड़ने वाले इन लोगों से सावधान रहने की जरूरत हे
@ManuvadiBrijesh अगर कुंठा को साइड रख के उसकी बाते भी सुनो तो पता लगेगी वो वही बता रहा,, दोनों के बीच का अंतर
लेकिन अंतर करते ही आपकी हकीकत आपके सामने आएगी जो तुमको बर्दाश्त नहीं
इसलिए ये इन्सान चूतियाँ हे,
लेकिन वो जिस बात पर हे उसको पब्लिक ने समझ लिया तो चूतियां बोलने वाले सबसे पहले दरबार होंगे
@Sivaji000000000@abhinav_blogger एक ऊपर कहता हे, समय हो हुआ आधा दरवाजा खुला होता हे कोई अंदर नहीं जाता,
एक अपने किसी सहयोगी द्वारा लिखा पैरा पोस्ट करता हे, और पूरा प्रयास करता हे लिखने का, की राष्ट्रपति की पत्नी को सीढ़ी चढ़ने में दिक्कत थी,, किसकी मानोगे,
*ओर सच यही हे जाती देखी जाती हे*
@KundanKuma12154@abhinav_blogger जाहिल कहने से सच्चाई नहीं बदलेगी,,,
ओर कवरअप कितना करोगे,
किताबों में लिखी बातों के अर्थ भी बदल दिए
अब तो लेकिन दिमाग में जो गोबर हे जातिवाद का वो कैसे निकालोगे,,, नहीं निकलेगा यही सच्चाई हे,, ओर एक बात
राष्ट्रपति गए थे गई थी वो घटना दूसरी हे
@kalisenachief तो बहरूपिए,, आंबेडकर को इस आरक्षण के लिए दोष देने से पहले उस गांधी को क्यों नहीं कठगड़े में खड़ा करता हे क्यों उसने अनशन की,
होने देता अलग कम से कम तुम चोटियों से तो
इनको इतना भेदभाव नहीं सहना पड़ता आज तक जारी हे, जब तो संख्या बल कम था बड़ी चालाकी से हिंदू बना लिया अब फिर हरिजन,