Penguin Worldwide is ready to publish Smt. Sonia Gandhi ji's upcoming book worldwide in its original form, but Penguin Random House India wants changes made to launch it in India. After all, what is the reason or what pressure is there that what is being published across the world cannot be published in India?
Smt. Sonia Gandhi ji's life is an example of sacrifice and dedication. The integrity and dignity with which she has served the country is exemplary. Suppressing the book of Smt. Sonia Gandhi ji, a person of such stature, a senior leader of the nation, and former Leader of the Opposition, under pressure is tantamount to the murder of freedom of expression.
The real issue is that pressure was put on Penguin India to remove the portions related to Modi, the RSS, and the occupation of Indian territory by China during Modi's rule. This is the murder of democracy.
Why is this truth being hidden from the people of India? Will the Modi government alter even the facts by pressuring publishers?
कांग्रेस के पक्ष में जो माहौल आज नगरीय निकाय चुनावों में बना है, वैसा वर्षों बाद देखने को मिला है। जनता का रुख साफ कांग्रेस के पक्ष में झुका हुआ है, और यह जीत तय मानी जा रही है।
इस जीत को और बड़ा और मजबूत बनाने का रास्ता, टिकट जीतने की संभावना देखकर दिया जाना है। हो सकता है जिसे टिकट मिलने की संभावना है, उससे हमारे मतभेद हो पर पार्टी के हित और अपने निकाय में बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस के हर प्रत्याशी की जीत जरूरी है। हमें व्यक्तिगत अनुराग और द्वेष छोड़कर पार्टी के हित में सोचना है। मैंने जोधपुर नगर निगम में भी यही फॉर्मूला रखा है।
जिसको टिकट मिले उसके लिए अपना सर्वस्व लगाकर मेहनत करना हम सब कार्यकर्ताओं का धर्म है। पार्टी हम सबसे बड़ी है, और पार्टी का हित ही हम सबका हित होना चाहिए।
The Election Commission of India, once hailed globally as a benchmark of impartiality, has fallen to a state where it appears to be acting in favor of the ruling party. This is the very Commission that trained election officials from countries including Namibia, South Africa, and Nigeria, served as a founding member of the International Institute for Democracy and Electoral Assistance, and commanded global credibility. Today, its working style faces serious questions at home.
West Bengal presents a glaring example. Of the 82,782 appeals disposed of so far by the SIR Appellate Tribunal, 91 percent revealed that voters' names were wrongfully deleted and must now be restored. With complaints regarding nearly 27 lakh deleted names in Bengal and only a fraction addressed to date, what will become of the remaining lakhs of appeals? These figures substantiate the issue of 'Vote Chori' that Shri @RahulGandhi has been consistently and forcefully raising.
Most distressing is that the judiciary appears to be turning a blind eye. The Supreme Court's observation during the elections that those unable to vote this time due to SIR could do so next time was deeply unfortunate. The nation must now seriously introspect on the functioning of the Election Commission, or the very foundations of our democracy will be hollowed out.
राजस्थान के अलग-अलग जिलों से आ रही इन खबरों से स्पष्ट है कि भाजपा सरकार बेरोजगारी भत्ता योजना को भी बाकी योजनाओं की तरह अनौपचारिक रूप से बंद करने के रास्ते पर है। प्रदेश के करीब 2 लाख बेरोजगार युवा 7 महीने से मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत मिलने वाले 4,000 रुपए के भत्ते के लिए तरस रहे हैं, 17 जिलों में तो मार्च तक की ही राशि पहुंच पाई है।
चुनाव से पहले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने खुद गारंटी दी थी कि कांग्रेस सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं बंद नहीं होंगी। आज वही "मोदी की गारंटी" दम तोड़ती नजर आ रही है, योजनाओं को औपचारिक रूप से बंद करने की हिम्मत नहीं, इसलिए भुगतान रोककर चुपचाप खत्म किया जा रहा है।
यह लापरवाही नहीं, बेरोजगार युवाओं के साथ खुला विश्वासघात है। जो सरकार खुद प्रधानमंत्री की दी गई गारंटी तक नहीं निभा सकती, वह बेरोजगार हितैषी होने के दावे किस मुंह से करती है? सरकार तुरंत सभी बकाया भत्ते जारी करे और सुनिश्चित करे कि आगे समय पर भुगतान हो।
जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया है। यह कोई संयोग नहीं बल्कि केंद्र सरकार की सोची-समझी रणनीति लगती है, ताकि जाति जनगणना का मुख्य उद्देश्य ही खत्म हो जाए और सही आंकड़े कभी सामने न आएं। जब जातिगत जनगणना की घोषणा की गई तब सबने इसका स्वागत किया था परन्तु अब जिस तरह भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है, वह दिखाता है कि मोदी सरकार की नीयत ठीक नहीं है।
सरकार ने "मुक्त प्रश्न" (Open ended questions) का तरीका चुना है, जिसमें हर व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज होगा। भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है। नतीजा यह होगा कि एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी और पूरा आंकड़ा ही अनुपयोगी हो जाएगा। सबसे गंभीर बात, इस जनगणना में "पिछड़ा वर्ग" शब्द तक शामिल नहीं है, यानी पिछड़ा वर्ग की सही आबादी का पता ही नहीं चलेगा।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे और श्री राहुल गांधी ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि जातियों की एक सूची पहले से बनाई जाए, ठीक वैसे ही जैसे तेलंगाना (2024) और बिहार (2022) के जाति सर्वेक्षणों में किया गया था।
केंद्र सरकार को इस त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया को तुरंत रद्द कर, राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से बातचीत कर नई प्रश्नावली बनानी चाहिए, ताकि जाति जनगणना सटीक, सार्थक और लाभकारी साबित हो।
राजस्थान में भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार इतना बढ़ चुका है कि कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए निशुल्क दवा के रूप में दिया जाने वाला इंजेक्शन दिल्ली में ब्लैक मार्केट में बेचा जाता हुआ पकड़ा गया। इस एक इंजेक्शन की कीमत करीब 1 लाख रूपये है जिसे सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है। यह बेहद गंभीर मामला है जिसमें सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
इससे पहले उड़ान योजना के निशुल्क सैनिटरी नैपकिन, बाल गोपाल योजना के निशुल्क दूध पाउडर की भी कालाबाजारी पकड़ी गई परन्तु सरकार ने कोई सख्त कार्रवाई या उच्च स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जिससे भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है।
अब जनता भी महसूस कर रही है कि भाजपा सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई है और जनहित की योजनाओं को दीमक की तरह खाते जा रही है। इस भ्रष्ट सरकार को अब जवाब देने का समय आ गया है।
Modi government’s short-sightedness and flawed decisions are once again evident in its decision to increase ethanol blending in petrol without adequate preparation. The people of the country are having to bear the consequences of this decision on multiple fronts.
A large share of sugarcane is being diverted from sugar production towards ethanol production, resulting in reduced availability of sugar in the market.
In just 15 days, sugar prices have surged by ₹14–17 per kg. This is not merely an issue of price rise, ethanol blending is also affecting vehicle engines and reducing mileage, putting an additional financial burden on ordinary citizens.
This amounts to nothing less than a direct assault on the hard-earned money of the common people. In this entire arrangement, a handful of industrialists and the government are benefiting, while it is the common people who are suffering.
There have also been growing concerns about air and water pollution linked to ethanol production. The union government took this decision without making adequate preparations, and it is now the people of the country who are paying the price.
The Modi government has now lost the trust of the people & as a result, is unable to convince them.
निकाय चुनावों की तैयारी को लेकर पूछे प्रश्न का जवाब :
प्रदेश के अंदर पूरा माहौल अच्छा है। टिकट वितरण की पूरी प्रक्रिया के लिए अभी बातचीत की गई और सब मिलकर इलेक्शन लड़ेंगे और मैं सब से अपील भी करना चाहूंगा कि तमाम हमारे जो MLA's, MP's हैं, तमाम हमारे जिला कांग्रेस कमेटी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, मंडल कांग्रेस कमेटी और पंचायतों के भी जो अध्यक्ष बनाए जा रहे हैं, उन सबको और आम कार्यकर्ताओं को भी कि यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस सरकार के ढाई साल में देखा हमने जो पट्टे हम पाँच सौ में दे रहे थे, बारह लाख पट्टे हमने बांट दिए, इस सरकार के वक्त में बार बार अभियान चलाते हैं। अभियान फेल हो रहा है। कोई विकास हो ही नहीं रहा है शहरों के अंदर। नरेगा की तरह हमारी जो योजना थी शहरी रोजगार योजना वो इतना क्रांतिकारी फैसला था, देश के अंदर मेरे ख्याल से आंध्र प्रदेश के बाद में राजस्थान था जिसने यह योजना शुरू करी जिसमें नरेगा के पैटर्न पर शहरों में रोजगार मिले, उसको बंद कर दिया है। तो कई योजनाएं जिनमें राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय लोन आता है वो योजनाएं बंद पड़ी है। अभी ये हमारा आईपीडी टावर बन रहा है, यह भी हमने जो स्मार्ट सिटी की स्कीम थी उसको बनाया साथ में लिया, तो बड़े बड़े काम हमने किए हमारे वक्त में। मिस्टर शांति धारीवाल के वक्त में ऐतिहासिक काम हुए हैं यूडीएच- एलसीजी , स्वायत्तशासी संस्थाओं को लेकर और यह बर्बाद कर दिया पूरा इन्होंने, इस मंत्रालय पर ध्यान दे नहीं रहे हैं। ये मंत्रालय बहुत इम्पोर्टेन्ट है शहरों के लिए। शहरों में विस्तार के काम आ गए, जेडीए के अंडर आ गए, जो डेवलपमेंट अथॉरिटी बनी हैं उसमें आ गए हैं, उन गाँवों की तरफ कोई ध्यान दे नहीं रहा है ।
यह डिपार्टमेंट, यह मंत्रालय बहुत इम्पोर्टेन्ट है। उसी के चुनाव हो रहे हैं और सरकार को लेकर लोगों में बहुत गुस्सा है । मैं उम्मीद करता हूं कि कांग्रेस भारी बहुमत से जीतेगी। टिकट का वितरण ढंग से हो जाए, उसके लिए बातचीत हुई है। उम्मीद करते हैं जो जाएंगे ऑब्ज़र्वर उनको ही पीसीसी पूरा अधिकार देकर भेजेगी। आप फैसला वहां की स्थिति, वहां के मेरिट पर करो।
एक भी टिकट सिफारिश पर मत दो। सिफारिश टिकट दिया नहीं वो हारा नहीं, जो जेन्युइन कार्यकर्ता है उसको टिकट मिले बस। चाहे मैं भी सिफारिश करूं, मेरे पास जयपुर कोई आदमी आ गए, मैं किसी के लिए सिफारिश करूंगा। बीकानेर में करूं, भरतपुर में करूं तो मुझे क्या पता वहां स्थिति क्या है। मैं सिफारिश करूंगा, भाई पूर्व मुख्यमंत्री कह रहे हैं, दे दो टिकट इसको। कैसे जीतेगा वो? जीतेगा तभी जब जमीनी हकीकत क्या है, उसके आधार पर टिकट बंटेंगे तो जीतेंगे। बस ये मेरा मानना है।
पत्रकार: साठ फ़ीसदी युवाओं को टिकट देने पर चर्चा चल रही है ?
जवाब : वो मैंने कहा पचास परसेंट से ज्यादा टिकट जेन -जी को, युवाओं को दें। क्योंकि जेन -जी आने के बाद में एक पूरा देश के अंदर जमाना बदल रहा है, नई पीढ़ी आगे आ रही है। सीनियर का अनुभव काम लो, उनको भी साथ रखो। पर जो जेन -जी कहला दीजिए युवा पीढ़ी कहला दीजिए, इसका जो महत्व है, उससे कोई इनकार कर नहीं सकता।
जंतर मंतर पर जो एक आंदोलन किया इन्होंने, और राहुल गांधी जी ने जो धरने दिए पीएम हाउस के बाहर, फिर कांग्रेस कमेटी ने सब जगह धरने दिए, प्रदर्शन किए। मैंने भी भाग लिया दो बार यहां पर जयपुर की सड़कों पर। उसके बाद में एक माहौल बन चुका है कि बदलाव पीढ़ी का हो रहा है, हमें उस भावना को पहचानना चाहिए। युवाओं को जहां मौका मिले, उनको भी काम करना पड़ेगा, उनको भी समर्पित होना पड़ेगा, प्रतिबद्ध होना पड़ेगा पार्टियों के साथ में और जो हमारी नीतियां कांग्रेस की है, कार्यक्रम है, सिद्धांत है, गांधी जी के वक्त के हैं और डॉ. अम्बेडकर के संविधान के अंतर्गत हैं और पंडित नेहरू, मौलाना आजाद, सरदार पटेल ,बड़े - बड़े नेताओं का योगदान है, सब जानते हैं। लंबी कहानी है हमारे इतिहास की।
आज सिविल लाइंस आवास पर राजस्थान एआईसीसी प्रभारी श्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गोविंद सिंह डोटासरा एवं राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली ने शिष्टाचार भेंट की।
@Sukhjinder_INC@GovindDotasra@TikaRamJullyINC
आज का दिन हमारे प्यारे भारत के सामूहिक साहस, शौर्य और सत्य-अहिंसा जैसे पवित्र मूल्यों की जीत का पर्व है। यह करोड़ों भारतवासियों की आकांक्षाओं के साकार होने का पर्व है। यह लोकतंत्र के उस संकल्प का पर्व है जिसने हर एक भारतीय को समानता, न्याय व एकता की गारंटी, और हर एक भारतीय की अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता दी। आइए, हम सब मिलकर प्रण करें कि हम अपनी स्वतंत्रता, अपने संविधान और इसके उसूलों की हर हाल में रक्षा करेंगे।
सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। जय हिंद! जय भारत!
अंकिता भंडारी के परिवार से 2 दिन पहले मिला। चार साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी वो न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं - अपनी बच्ची के ख़िलाफ़ एक ऐसे अपराध के लिए जिसकी कोई माफी नहीं।
सिर्फ 19 साल की अंकिता वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं जहां एक "VIP" मेहमान की शर्मनाक मांग का विरोध करने पर चीला नहर में डुबो कर उनकी हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हिंसा और डुबोने के सबूतों की पुष्टि भी की।
मगर, रिज़ॉर्ट में अंकिता के रूम को किसी भी तरह की जांच होने से पहले ध्वस्त कर दिया गया जो खुद में संदेहपूर्ण है।
इस दुखद मामले में सबसे शर्मनाक बात है कि राज्य सरकार खुद आज तक उस "VIP" को संरक्षण दे रही है। क्यों? क्योंकि वह BJP-RSS का बड़ा नेता है।
यही BJP की विकृत मानसिकता है बलात्कारियों और अपराधियों को बचाना, उनका राजनीतिक संरक्षण करना, यहां तक कि बलात्कार के दोषियों का फूल-मालाओं से स्वागत करना। दुनिया में सबसे घिनौने इंसान वो होते हैं जो बलात्कारियों की रक्षा करते हैं और BJP में ऐसे लोगों की भरमार है।
भारत तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक महिलाओं को पुरुषों के इस्तेमाल की वस्तु समझने वाली यह अमानवीय मानसिकता खत्म नहीं होती। भारत तभी आगे बढ़ेगा, जब भारत की महिलाएं आगे बढ़ेंगी - सम्मान, सुरक्षा, समानता और न्याय के साथ।
विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर प्रकृति पूजक आदिवासी समाज एवं सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आज का दिन आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के संकल्प को मजबूत करने तथा उनकी संस्कृति एवं जल-जंगल-जमीन की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है।
नागौर के डांगावास हत्याकांड में 11 साल बाद आया फैसला बेहद चिंताजनक है। 2015 में जमीन विवाद में 5 दलितों समेत 6 लोगों की निर्मम हत्या हुई थी, और अब एससी-एसटी विशेष अदालत ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। पीड़ित परिवारों का सवाल जायज है, अगर 40 आरोपी बरी हो गए तो इन 6 लोगों की हत्या आखिर किसने की?
11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई, सीबीआई जांच और ट्रायल के बावजूद इंसाफ न मिलना जांच और अभियोजन की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। भाजपा सरकार के शासन में 11 साल पहले ऐसी घटना होना और अब उन्हीं के शासन में प्रतिकूल फैसला आना दिखाता है कि भाजपा न्याय के पक्ष में नहीं है। दलित समाज के साथ हुए इस अन्याय में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कांग्रेस हमेशा दलित समाज के सम्मान और अधिकारों के लिए खड़ी रही है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की प्रक्रिया मजबूती से आगे बढ़नी चाहिए, राज्य सरकार को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इस बात में अब कोई शक नहीं रह गया है कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी जी के लिए आदिवासी अस्मिता का कोई मोल नहीं है, आदिवासी समाज इनके लिए केवल वोट बैंक है।
मानगढ़ धाम वह पवित्र भूमि है जहां 1913 में गोविंद गुरु के नेतृत्व में एकत्र सैकड़ों आदिवासी भाई-बहनों को अंग्रेजी हुकूमत ने गोलियों से भून दिया था। यह आदिवासियों का जलियांवाला बाग है। प्रधानमंत्री जी जब मानगढ़ धाम आए थे, तब ऐसा माहौल बनाया गया कि अब इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिल ही जाएगा। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसके लिए पुरजोर प्रयास किए, परन्तु मोदी जी ने आदिवासी समाज की भावनाओं का ध्यान न रखते हुए इस विषय को टरका दिया।
अब केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट कह दिया है कि मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक घोषित होने योग्य नहीं है। विडंबना देखिए कि यह इनकार उस मंत्रालय से आया है जिसके मंत्री राजस्थान के ही श्री गजेंद्र सिंह शेखावत हैं।
और तो और, 6 जुलाई 2022 को राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष श्री तरुण विजय ने स्वयं मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल को सौंपी थी। यानी सिफारिश भी इनके अपने लोगों की, फाइल भी इन्हीं के पास, और इनकार भी इन्हीं का।
राजस्थान के दोनों केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के सांसद बताएं कि क्या वे राजस्थान की भावनाओं और आदिवासी समाज के संघर्ष को भूल गए? भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में मानगढ़ धाम को भव्य ट्राइबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का वादा किया था। हकीकत यह है कि दर्जा देना तो दूर, यह सरकार उसकी पात्रता तक नकार रही है। मैं मांग करता हूं कि केंद्र सरकार अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करे और गोविंद गुरु के बलिदान स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दे।
कल जयपुर में हुए प्रदर्शन में युवाओं पर लाठीचार्ज एवं वॉटर कैनन का प्रयोग किया गया था जिसमें घायल हुए एक युवक की आज इलाज के दौरान मृत्यु हो जाना अत्यंत पीड़ादायक है। दिवंगत आत्मा को शांति मिले, शोकाकुल परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदना है।
भाजपा सरकार तानाशाही रवैया अपना चुकी है, जिसमें हर प्रदर्शन में अनावश्यक वॉटर कैनन चलाना, लाठीचार्ज करना और पैलेट गन तक का प्रयोग किया जा रहा है। भाजपा सरकारें बात सुनने की बजाय दमन का रास्ता अपनाती हैं। असहमति व्यक्त करना लोकतंत्र में नागरिक का अधिकार है, अपराध नहीं। जहां-जहां भाजपा सरकारें हैं वहीं ऐसा क्यों हो रहा है? कब तक हमारे युवा भाजपा के बल-प्रयोग का शिकार होते रहेंगे?
राज्य सरकार को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए एवं पीड़ित परिवार को उचित सहायता देनी चाहिए।