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जय श्री राम 🕉️ 🔱 🚩🇮🇳 वंदेमातरम
🚨 THE STRANGEST PART OF THE SUSHANT SINGH RAJPUT CASE MAY NOT BE WHAT HAPPENED BEFORE HIS DEATH… BUT WHO APPEARED TO TAKE CHARGE AFTER IT.
Sandip Singh was suddenly highly visible—around the hospital, the funeral and in the public narrative.
Who authorised his role at the hospital and funeral?
What exactly was his relationship with Sushant before June 14, 2020?
And what did investigators ultimately establish about his role?
He presented himself as a close friend who deeply cared about Sushant and his family.
But that raises a bigger question:
Why was he so deeply involved immediately after Sushant’s death—and what exactly was his role?
The answers should come from evidence, records and a transparent investigation.
#SushantSinghRajput #SSR #JusticeForSSR
एक सच्ची घटना बता रहा हूँ। आग्रह है कि इसे जातीय दृष्टिकोण से न देखा जाय।
मेरे एक परिचित क्षत्रिय हैं। बहुत सभ्य, कुलीन, संपन्न और शिक्षित।
उनकी पुत्री थी। बहुत सुंदर, स्वभाव की अच्छी, सरलमना।
कॉलेज में पहुँची तो एक दलित लड़के से प्यार हो गया। लड़का भी पढ़ाई में जहीन था लेकिन रंगरूप, शक्लसूरत में लड़की से कोई तुलना नहीं। कौवे और हंसिनी का प्रेम था वह।
लड़की को पता था कि घर पर बताकर यह ब्याह नहीं हो पायेगा। माँ- बाप किसी भी सूरत में कोई राजी नहीं होंगे।
सो उसने चुपचाप उस लड़के से कोर्ट मैरेज कर ली और घर से भाग गयी।
घर वाले सन्न। खून में उबाल आना स्वाभविक था। लेकिन उनके अपने लोग समझदार थे और उन्होंने लड़की के माँ-बाप को उचित तरीके से समझाया कि बदले की आग में जलकर कोई लाभ नहीं होगा। सब लोग बर्बाद होंगे। बेहतर है कि उससे सदा के लिए सम्बन्ध समाप्त कर लिया जाय।
उस परिवार ने खून का घूँट पीकर ऐसा ही किया।
इधर लड़की ससुराल पहुंची तो ससुराल वालों ने इस घटना का प्रचार इस तरह से करना शुरू किया जैसे उन्होंने एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली हो।
बात-बात पर उद्घोष करना कि हमारे लड़के ने ठाकुर की बेटी भगा लाया, कोई एक बाल भी नहीं उखाड़ पाया।
लड़की को बुरा लगा तो उसने एकाध बार प्रतिरोध भी किया।
फलतः उसके आत्मसम्मान को कुचलने का कोई भी प्रयास ससुरालियों ने नहीं छोड़ा। घर का कार्य कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन उससे पूरे परिवार के जबरन चप्पल उठवाये जाते, घर की लड़कियों की पैंटियाँ धुलवायी जातीं।
वे हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानते थे, इसलिए उसे पूजा पाठ करने से रोका जाता था, देवी देवताओं को गालियाँ बकी जाती थीं।
अब उसे अपनी करनी पर पछतावा होने लगा, लेकिन अब तक पांच साल बीत चुके थे और दो बच्चे भी हो गए थे।
हालांकि पति उससे प्रेम तो करता था लेकिन था वह भी हिंदू- विरोधी ही।
मायके वालों ने सदा के लिए मुँह मोड़ लिया था, सो वहाँ से कोई उम्मीद नहीं थी।
किसी तरह से उसका हम लोगों से संपर्क हुआ। उसने अपनी परेशानी बताई। पहले तो हमने भी जो जी में आया, उसे सुनाया लेकिन उसके बाद दया लगी तो फिर यही सलाह दिया कि कोशिश करो अपने पति के स्वभाव को बदलने की। उसे छोड़कर भी तुम्हारा कोई कल्याण नहीं होने वाला। तुमने जो भीषण अपराध किया है, जो अपने परिजनों को मृत्युदायी कष्ट दिया है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। उत्तम यही है कि जिस जीवन का चयन तुमने अपने लिए कर लिया है, उसे ही बेहतर बनाओ।
बाद में लड़का कहीं इंजीनियर हो गया। वह अपने अन्य ससुरालीजनों से दूर हुई। उसने धीरे- धीरे लड़के को अनुकूल बनाया।
जीवन तो ठीक चलने लगा लेकिन मन से अपराधबोध नहीं गया।
उसने हमसे अनुरोध किया कि उसके माँ- बाप से बात करके एक बार मिलवा दें तो हमने सख्ती से यह कहते हुए मना कर दिया कि जैसे तुम्हें अपना जीवनसाथी बिना जन्मदाता की अनुमति के चुन लेने का संवैधानिक अधिकार है, वैसे ही उन्हें भी तुम्हें सदा के लिए त्यागने का अधिकार है। मैं उनके नासूर पर चाकू क्यों चलाऊँ?
अभी बिहार से एक खबर आई है कि एक ब्राह्मण की लड़की ने पासवान के लड़के से प्रेमविवाह कर लिया और दुखी पिता ने अपनी बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया।
मैं उस पिता की पीड़ा को समझ सकता हूँ कि इस समय वह क्या झेल रहा होगा?
व्यक्तिगत रूप से उस दुखी पिता का यह कृत्य मुझे बहुत ही उचित लगा। ऑनर किलिंग से अच्छा किसी को मरा हुआ मान लेना है।
अगर आप के आस- पास कोई माँ- बाप ऐसे दंश से गुजर रहे हों तो उसका मजाक उड़ाने के बजाय उसे उस अपयश की ग्लानि से बाहर लाने का प्रयास होना चाहिए। ऐसी दुर्घटना हमारे - आप किसी के साथ भी घटित हो सकती है।
राकेश मिश्र 'सरयूपारीण'
Courtesy raj k sharma fb post
दिल्ली के बुद्ध विहार निवासी लोकेश गुप्ता को घटिया व छोटे आकार की काली मिर्च को प्रोसेस करके बड़े आकार की ए-ग्रेड काली मिर्च बनाते हुए पकड़ा गया है। मिलवाटखोरी गंभीर अपराध है, इससे कैंसर जैसी घातक बीमारियां होती हैं। खाद्य सामग्री में मिलावट करने वालो को सख्त सज़ा दी जाए।
@SamarRaj_ देखो तुम्हारा कटाक्ष अनायास ही नहीं है पर संस्कृति के ऊपर दोष मढ़ना कोई हल नहीं है। जिसने भी मारा उन्हें, घृणित कार्य किया है और वे दंड के भागी हैं।
जन्माष्टमी पर केरल की सड़कों को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से भर देने के बाद, अब Gen Z और Gen Alpha के हिंदू बच्चे गणेशोत्सव के लिए भी सड़कों पर उतर आए हैं।
धीरे-धीरे लेकिन लगातार, केरल अपनी सांस्कृतिक जड़ों को फिर से पहचान रहा है और उनसे जुड़ रहा है। 🙏🕉️🚩
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काल भैरव काशी के कोतवाल हैं🖤
#HarHarMahadev#KaalBhairav#Hanuman#SanatanRahasya
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