कुणाल कमरा की गांव तोड़ना इसको बोलते है
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सीतामाता के पति के भक्त ने कुणाल कामरा की जलालत की
😁कामरा सुनता सबकी है करता काँग्रेस की
😁अगर कुणाल कामरा के दोनों बबले दबाओ तो काँग्रेस को वोट जाता है
😁कामरा को लगता है Latent बलराज का शो हैक्योंकि कश्मीरी पंडित तो इसे दिखते नही
लास्ट वाली लाइन ने तो रगड़ दिया
AMU दीक्षांत समारोह में कुरान की आयतें पढ़ी जाएं
तो वह सुंदर 'धर्मनिरपेक्षता' (Secularism) है!
IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में शिक्षा पर आधारित 'तैत्तिरीय उपनिषद' की शिक्षावल्ली के श्लोक पढ़े जाएं
तो वह 'सांप्रदायिक' और लोकतंत्र के लिए खतरा बन जाता है!
"एएमयू में जो 'सेक्युलर' है,
वही आईआईटी में 'सांप्रदायिक' कैसे हो गया?"
इस दोहरे रवैये का पर्दाफाश करने के लिए रीपोस्ट (RT) करें!
This Toilet cleaner of Kejriwal, Ashutosh Ranka released a video today after Police did Lathicharge & tear gas against students in Jharkhand
He is very happy today and announcing CJPs next "MEET UP" In Bangalore
2 mins silence for students who thought CJP was fighting for them
कम नम्बर और ज़्यादा नम्बर वाला भेदभाव…
आख़िर कब पीछा छोड़ेगा छात्रों का…!!!
IIT में चयन होने के बाद भी कुछ साबित करने की ज़रूरत बाक़ी रहती है क्या…??
दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी IIT दिल्ली के 57 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे…
छात्रों को डिग्रियाँ दी…
सुनिए वहाँ के एक छात्र की व्यथा…??
अभिजीत दिपके से एक इंटरव्यू… और फिर सन्नाटा! 😶
रिपोर्टर: आप कहते हैं कि भारत को युवा प्रधानमंत्री चाहिए और मोदी जी अब फिट नहीं हैं। आधार क्या है?
अभिजीत: भारत की औसत उम्र 28–29 साल है। मोदी जी 75 के हैं। युवा समस्याओं को युवा ही बेहतर समझ सकता है।
रिपोर्टर: लेकिन मोदी जी को चुना किसने?
उन्हीं युवाओं ने!
2014 में…
2019 में…
और फिर 2024 में भी।
जनता ने बार-बार अपना फैसला सुनाया।
अभिजीत: मैं चुनाव की बात नहीं कर रहा। मैं उनकी फिटनेस की बात कर रहा हूं। वह रील बनाते हैं, इन्फ्लुएंसर बन गए हैं…
रिपोर्टर: तो सोशल मीडिया पर युवाओं से जुड़ना अयोग्यता की निशानी है?
फिर Instagram और YouTube पर सक्रिय हर युवा नेता को राजनीति छोड़ देनी चाहिए?
और आप खुद सोशल मीडिया के जरिए ही लोकप्रिय हुए हैं—तो क्या वह भी गलत है? 😏
अभिजीत: मेरा मतलब है कि उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़कर फुल-टाइम इन्फ्लुएंसर बन जाना चाहिए।
रिपोर्टर: अच्छा! आपने AAP के साथ वर्षों तक काम किया। जब अरविंद केजरीवाल की उम्र बढ़ रही थी, तब क्या आपने उनके लिए भी यही मांग की थी?
या फिर उम्र का सिद्धांत सिर्फ BJP नेताओं पर लागू होता है?
सवाल खत्म नहीं हुए थे…
पेपर लीक की बात हुई।
बेरोजगारी की बात हुई।
युवाओं की निराशा की बात हुई।
रिपोर्टर: समस्याएं हैं, उन्हें नकारा नहीं जा सकता। लेकिन क्या सरकार के काम भी गिनेंगे?
🏠 गरीबों को करोड़ों आवास
🚽 करोड़ों शौचालय
🔥 करोड़ों गैस कनेक्शन
🏦 करोड़ों जनधन खाते
💉 विशाल स्तर पर कोविड टीकाकरण
इन उपलब्धियों को भी चर्चा में शामिल करेंगे या सिर्फ कमियां ही दिखाई देंगी?
अभिजीत: काम तो हुआ है, लेकिन युवा निराश हैं…
रिपोर्टर: ठीक है। आप युवा नेतृत्व चाहते हैं।
तो अपनी तरफ से तीन ऐसे युवा नेताओं के नाम बताइए जिन्होंने—
• किसी बड़े राज्य का नेतृत्व किया हो
• लाखों करोड़ का बजट संभाला हो
• राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे जटिल विषयों पर निर्णय लिए हों
• और कई चुनावों में जनता का भरोसा जीता हो।
तीन नाम बताइए।
अभिजीत: हमें वह जगह बनानी होगी…
रिपोर्टर:
बिल्कुल! पहले जगह बनाइए।
सोशल मीडिया पर बैठकर किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री को अयोग्य घोषित करना आसान है।
लेकिन लोकतंत्र रील्स, ट्रेंड और वायरल पोस्ट से नहीं चलता।
लोकतंत्र चलता है—
जनता के वोट से। 🇮🇳
और जनता अपना फैसला 2014, 2019 और 2024—तीन बार सुना चुकी है।
राय आपकी हो सकती है…
लेकिन प्रधानमंत्री चुनने का अधिकार जनता का है।
अभिजीत दिपके: 😶
“No comments…”
🔥 बहस खत्म।
झारखंड में शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर जितने सर फूटे, जितने हाथ टूटे, जितनों को लाठियाँ लगी, हर विद्यार्थी निहत्था था। लड़कियों को भी नृशंसता से पीटा गया। पत्रकार डिटेन किए गए।
काँग्रेस हो या JMM या कोई भी अन्य पार्टी, यदि आपको लगता है कि इस तरीक़े से आप इस उबलते क्रोध को दबा दोगे, तो आप देखते रहो। आपकी आँखों के सामने पहले आपकी क्रेडिबिलिटी जाएगी और बाद में सत्ता।
“कम्युनिस्ट पूरी तरह कायर हैं! वे तथ्यों का सामना नहीं कर सकते।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जॉन ब्रिटास और उनके साथियों को तथ्यों के साथ जमकर घेरा।
बहस से भागना आसान है, लेकिन तथ्यों का सामना करना मुश्किल।
चेहरे बता रहे है कि भारत में प्लांट की गई टूल किट फिर से फेल होने की ओर है।
एक बड़ी प्लानिंग छात्र आंदोलन के पीछे की गई थी, पर क्या है यूनिवर्स अपने हिसाब से परिस्थितियां बनती है।
तो झारखंड इनके लिए “out of syllabus” आ गया - सारे प्लान धरे रह गए है, ख़ुद ही एक्सपोज़ हो गए है।
अब चाहे जितनी PC करो, जनता में विश्वास खो रहे हो।
एंजेला मर्केल ने कैमरे पर यह स्वीकार किया कि उन्होंने जानबूझकर जर्मनी में बड़ी संख्या में मुस्लिम प्रवासियों को आने दिया, ताकि “दक्षिणपंथी ताकतों को रोक सकें।”
उनकी प्राथमिकता अपने ही देश के लोगों की सुरक्षा से ज्यादा अपनी सत्ता बचाए रखना थी। उन्होंने कथित तौर पर अपने ही लोगों को खतरे में डालने और देश की जनसांख्यिकी बदलने का रास्ता चुना।
यह कोई हादसा नहीं था। यह सोच-समझकर किया गया जनसांख्यिकीय बदलाव था।
ठीक यही काम भारत में विपक्ष ने 2004-2014 के बीच किया... बस ये सच को स्वीकार नहीं करेंगे!
अमित शाह जी तो खड़े हो जाएंगे तुम्हारे पप्पू में दम है भागेगा तो नहीं
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माननीय श्री @AmitShah जी सदन में आते हैं तो खाली हाथ नहीं आते - तथ्य, तर्क और रिकॉर्ड साथ लाते हैं।
इस बार भी कांग्रेस के हर आरोप का जवाब लेकर आ रहे हैं।
#राहुल_भागना_नहीं