कविता:-
आकाश अंधकार अब उगल रहा हैं
चारों दिशाओ में स्वार्थ का
मचा हैं हा-हाकार,
अमीरों को प्रसन्न करने में
और सोचते नहीं कभी
निःस्वार्थ भाव से
दीन-दुखियों की पीड़ा को
होता जा रहा हैं
झर-झर मनुष्य का जीव
अब तो जगा लो जगत में
दीन- दुखियों के कल्याण के दीप।।
:-ईराम
आज प्रभार क्षेत्र जालौर जिले के बागोड़ा में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026” के अंतर्गत आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार साथियों से संवाद कर अभियान के उद्देश्यों, जल संरक्षण की आवश्यकता एवं जनभागीदारी की महत्ता पर विस्तृत चर्चा की।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के जल संरक्षण के संकल्प एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी के नेतृत्व में संचालित यह अभियान जल बचाने, जल स्रोतों के संरक्षण तथा पर्यावरण संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस दौरान जालौर भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जसराज पुरोहित जी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
#VandeGanga
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राजस्थान के सरकारी महाविद्यालयों में संविदा शिक्षकों की भर्ती, शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम है। अस्थायी नियुक्तियाँ न तो शिक्षकों को स्थिरता देती हैं, न ही छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
NSUI मांग करता है कि @BhajanlalBjp सरकार तुरंत स्थायी भर्तियाँ निकाले, सख्त योग्यता मानकों को लागू करे और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहा यह खिलवाड़ बंद करे। ✊
#ग्रीष्मावकाश_कटौती_नहीं_चलेगी
शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार ने हठधर्मिता अपना ली है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को 20 जून तक ही ग्रीष्मावकाश दिया जायेगा। शिक्षक संघों व शिक्षकों ने सरकार द्वारा 1 अप्रैल से नवीन सत्र प्रारंभ करने के फैसले का स्वागत किया और इसे सफल बनाने में समर्पित होकर कार्य किया लेकिन यह कैसी असंवेदनशीलता है कि विषम परिस्थितियों वाले राजस्थान में जहां मई व जून के महीने में एक व्यस्क व्यक्ति के भीष्ण गर्मी से पसीने छूट जाते हैं वहां 6 वर्ष से लेकर 17 वर्ष तक के बच्चों को स्कूल बुलायेंगे।
एक तरफ हीटवेव, आंधियां, लू, भीष्ण गर्मी, सूर्य की तीखी किरणों का प्रकोप रहता है और दूसरी तरफ आवागमन के संसाधन क्या है सरकारी विद्यालयों के बच्चों के पास कुछ नहीं। क्या उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
शिक्षकों से विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत कार्य करवाया गया लगातार चार महीने रविवार का भी अवकाश नहीं लिया। चुनाव के लिए कार्य किया, अब ग्रीष्मावकाश में भी अधिकतर शिक्षक जनगणना का कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक रविवार को प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करवाते हैं तो फिर सरकार आखिर चाहती क्या है शिक्षकों से? जिस तरीके से सरकार लगातार शिक्षकों पर काम का दबाव बढ़ा रही है यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। बच्चों का स्वास्थ्य व शिक्षकों का अधिकार हमारे लिए केंद्र बिंदु है और सभी शिक्षक मिलकर इस फैसले का हम विरोध करते हैं।
जहां केंद्रीय विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश 49 दिन, नवोदय विद्यालय में 60 दिन यहां तक की महाविद्यालयों में 61 दिन तो फिर विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राजस्थान में 35 दिन क्यों?? सरकार तत्काल ग्रीष्मावकाश पूर्ववत 17 मई से 30 जून तक करें और इसके साथ ही ग्रीष्मावकाश कम से कम 50 दिन करने पर विचार करें।
शिक्षकों के अवकाश कटौती कर सरकार कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। ग्रीष्मावकाश कटौती पर शिक्षक संगठन व शिक्षक एकजुट हैं और लामबंद होकर बड़े आंदोलन की तरफ अग्रसर हो रहें हैं, सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करें तथा ग्रीष्मावकाश 50 दिन करने का विचार करें।
मई व जून माह में मौसम विभाग की लगातार एडवायजरी जारी होती है कि सब अपने घरों में रहें मौसम बिगड़ने की संभावना है, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि, तेज आंधियों का खतरा रहता है और इन सबके अलावा भीषण गर्मी तो लगातार रहती है और सरकारी विद्यालयों में आने वाला बच्चा अभावग्रस्त पृष्ठभूमि से होता है, वो ना तो पीने के लिए पानी की बोतल लाते हैं और दो तीन किलोमीटर का सफर भी पैदल तय करते हैं , इसलिए सरकार को राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षकों के अवकाश में कटौती नहीं करते हुए अवकाश पुनः 17 मई से 30 जून तक किये जाये , अन्यथा विरोध किया जायेगा।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी आप संज्ञान लेकर फैसले पर विचार कीजिए।
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प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में बड़े पैमाने पर संविदा शिक्षकों की भर्ती शुरू करना शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। यह कदम न केवल शिक्षकों के सुरक्षित और स्थायी ढांचे को कमजोर करता है, बल्कि छात्रों के भविष्य पर भी असर डालता है।
संविदा पर कार्यरत शिक्षक नौकरी की अनिश्चितता के कारण लंबे समय तक संस्थान से जुड़ाव और पूर्ण समर्पण नहीं दे पाते, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। अगर भर्ती में योग्यता के मापदंडों से भी समझौता हुआ, तो कॉलेज स्तर की पढ़ाई की नींव ही कमजोर पड़ सकती है।
सरकार प्रदेश के युवाओं और शिक्षा के हित में संविदा भर्ती के बजाय पूर्णकालिक (स्थायी) भर्ती को प्राथमिकता दे और सख्त योग्यता मापदंडों के साथ नियमित भर्तियां निकालें।
@BhajanlalBjp
NET, SET, PhD किए हुए राजस्थान के उच्च शिक्षित युवाओं के साथ यह एक मज़ाक की तरह है। यह युवाओं को हतोत्साहित करने का प्रयास है।
राजस्थान में कर्मचारी चयन बोर्ड ने College Education में असिस्टेंट प्रोफेसर की परमानेंट पोस्ट्स की जगह टीचिंग एसोसिएट नाम से संविदा (Contract) पर भर्तियों का विज्ञापन जारी किया है।
कंप्यूटर से लेकर इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, जियोग्राफी, हिंदी, हिस्ट्री, साइंस सहित कई सब्जेक्ट्स के लिए टीचिंग एसोसिएट की वैकेंसी निकाली गई है। जो पहले असिस्टेंट प्रोफेसर की परमानेंट पोस्ट होती थी, अब उसे संविदा यानी ठेके पर कर दिया गया है, और बेहद कम सैलेरी रखी गई है।
इसके लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन भी होंगे, परीक्षा भी होगी और Educational Qualification भी वही रखी गई है, जो असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए होती थी।
इतना सब कुछ होने के बाद भी युवाओं को जॉब सिक्योरिटी नहीं दी गई है। NET, SET, PhD किए हुए उच्च शिक्षित युवाओं के साथ यह एक भद्दे मज़ाक की तरह है।
BJP सरकार के इस रवैये से समझ आता है कि ये लोग रिसर्च, इनोवेशन और हायर एजुकेशन के विरोध में खड़े हैं। यह उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को हतोत्साहित करने का प्रयास है।
जिन युवाओं को आगे बढ़ाने का काम सरकारों को करना चाहिए, उन युवाओं को पीछे धकेलने की साजिश की जा रही है। PhD किए हुए युवाओं की क्षमता का उपयोग पॉलिसी मेकिंग से लेकर तमाम ऐसे कार्यों में किया जाना चाहिए, जिससे शासन-प्रशासन बेहतर होता हो, देश में growth model तैयार होते हो।
राजस्थान सरकार को अपने इस युवा और शिक्षा विरोधी फैसले को वापस लेना चाहिए।
संविदा पर Teaching Associates की जगह Assistant Professors की परमानेंट पोस्ट निकालनी चाहिए।
युवाओं और उच्च शिक्षा को सम्मान भाजपा सरकार दे नहीं सकती, पर कम से कम Job Security और Career stability तो दे।
#Rajasthan
कितना ग़लत हुआ है …!
कॉलेज में टीचिंग एसोसिएट की भर्ती का नोटिफिकेशन महज़ एक प्रयोग है , अब अगला पायदान स्कूल शिक्षा में इसको लागू करना होगा ।
टीचिंग एसोसिएट समान योग्यता , समान पाठ्यक्रम की परीक्षा और समान शर्तों के साथ नियुक्त होंगे, पर वेतन के मामले में इनको दिहाड़ी मजदूर बना दिया है , मात्र 28850₹ प्रतिमाह , इतना भेदभाव किसलिए ? और ये केवल पाँच वर्ष के लिए नियुक्त किए जाएँगे , आगे का सेवाकाल सोसाइटी की कृपा दृष्टि पर निर्भर करेगा, जो तीन तीन वर्षों के लिए साठ वर्ष की उम्र तक ले जा सकतें है ।
आप कल्पना करके देखिए , एक ही महाविद्यालय में एक व्यक्ति लाखों की तनख्वाह प्राप्त करें और दूसरा 28850 रुपये , वो भी समान काम के लिए , तो इससे बड़ा भेदभाव क्या ही होगा ! JRF की स्कालरशिप इससे अधिक होती है।
कहा गया था कि , अधीनस्थ बोर्ड 3600 ग्रेड पे या उससे कम के पे ग्रेड वाली भर्तियों का आयोजन करेगा, टीचिंग एसोसिएट असिस्टेंस प्रोफेसर के समक्ष होंगे , अर्थात् 6000 ग्रेड पे । फिर ये बोर्ड के ज़िम्मे किसलिए ?
माननीय न्यायालय से उम्मीद की जा सकती है .. वो भी शिक्षा से जुड़े संगठन आगे आयें तो , अन्यथा व्यक्तिगत प्रयास असफल रहेंगे ।
✍️डॉ गणपत सिंह राजपुरोहित
बेलगाम भाजपा❓
श्रीगंगानगर से बीजेपी विधायक जयदीप बियानी ने AEN जगनलाल बैरवा को पीटा, न कि बैरवा ने विधायक को। बैरवा की आंख सहित शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आई हैं।
बैरवा का आरोप है कि उनकी शर्ट पर खून के धब्बे लग गए और शर्ट फट गई, तो उन्हें नई शर्ट पहनाई गई। इसके बाद पुलिस को बुलाकर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया गया।
बैरवा ने कहा कि विधायक के साथ 20–25 लोग मौजूद थे, ऐसे में वह अकेले कैसे मारपीट कर सकते थे। उनका आरोप है कि सभी ने मिलकर उन्हें पटक-पटक कर पीटा।
अब बैरवा ने अपनी चोटों की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड से जांच कराने की मांग की है।
भाजपा की पर्ची सरकार राजस्थान में स्थायी नौकरियां ख़त्म कर युवाओं को असुरक्षा, शोषण और अस्थायी रोजगार की तरफ धकेल रही है। असिस्टेंट प्रोफेसर की जगह टीचिंग एसोसिएट की संविदा पर भर्ती नौकरी नहीं, "ठेका" प्रथा पर काम बांटना है।
सत्ता के लिए युवाओं को भ्रमित करने वाली भाजपा अब युवाओं को करियर नहीं, कॉन्ट्रैक्ट जॉब दे रही है। नियमित नौकरी की जगह सरकारी कॉलेजों में 3540 पदों पर टीचर एसोसिएट की भर्ती और वो भी 5 साल की संविदा और 28,850 वेतन पर। ये न सिर्फ UGC मापदंड़ों की अनदेखी है, बल्कि युवाओं के भविष्य, शिक्षा, योग्यता और काबिलियत से साथ कुठाराघात है। भाजपा सरकार ने इससे पहले राजमेस के मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में भी 1267 पद संविदा पर निकाले थे।
भाजपा जब विपक्ष में थी तो संविदा भर्ती को युवाओं के साथ अन्याय बताकर विरोध करती थी। और आज जब सत्ता में है तो यही भाजपा संविदा और ठेका व्यवस्था की सबसे बड़ी समर्थक बन गई है। जबकि हमारी कांग्रेस सरकार ने 1.10 लाख से अधिक संविदाकर्मियों को नियमित किया और ठेका पर नौकरियों को बंद किया।
असम के हर परिवार से अपील है - भ्रष्टाचार में एक भी और दिन नहीं गुज़ारना।
हिमंता ने असम को लूटा है - यह असम जानता है, देश जानता है।
कल बदलाव का दिन है।
कांग्रेस गठबंधन को वोट दें।
जय असम, जय हिंद।
❌ डिग्री क्यों छिपाई? – नहीं बताएंगे
❌ CCTV क्यों गायब हुए? – नहीं बताएंगे
❌ डिजिटल वोटर लिस्ट - नहीं दिखाएंगे
❌ लाखों वोट क्यों चोरी किये? – नहीं बताएंगे
❌ उपराष्ट्रपति को क्यों नज़रबंद किया? – नहीं बताएंगे
❌ अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के सामने क्यों सरेंडर किया? – नहीं बताएंगे
❌ 2 करोड़ रोजगार कहाँ गए? – नहीं बताएंगे
❌ महंगाई-बेरोज़गारी पर जवाब क्यों नहीं? – नहीं बताएंगे
👉 इनकी हकीकत यही है:
असली सवालों से भागना 🏃♂️
जवाबदेही से डरना 😨
और फिर दिन-रात “नेहरू-नेहरू” का रोना रोना 🎭
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💡 सोचिए…
11 साल सत्ता में रहने के बाद भी:
अपनी हर नाकामी का ठीकरा पंडित नेहरू जी पर फोड़ना
कहाँ तक जायज है?
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🚨 आज देश की सच्चाई:
युवाओं को नौकरी नहीं 👨🎓
किसानों को दाम नहीं 🚜
महिलाओं को सुरक्षा नहीं 👩🦰
छात्रों को न्याय नहीं 📚
लेकिन TV पर और मंचों से सुनने को मिलेगा बस:
📢 “नेहरू ने ये किया… नेहरू ने वो किया…”
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✊ ये लड़ाई अतीत के झूठे बहानों की नहीं है,
ये लड़ाई है आज के सवालों और कल के भविष्य की।
ये लड़ाई है लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की।
#VoteChorGaddiChhod 👊
एक ऐसा भारत - जहां हर नागरिक को सम्मान मिले, जहां सद्भावना हो, लोकतंत्र और संविधान से देश मजबूती से खड़ा हो।
पापा, आपके देखे इस सपने को पूरा करना ही मेरा जीवन लक्ष्य है।