वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर BJP पार्षद और BJP नेताओं ने नाव पर गंगा नदी में मीट मुर्गे और शराब की पार्टी की
लेकिन, इससे किसी की भावना आहत नहीं हुईं
इसी गंगा नदी पर नाव में इफ्तार करने के लिए 12 मुसलमानों को ईद के ठीक पहले गिरफ़्तार करके 2 महीने जेल में रखा था
पाखंडी कहीं के
NEET परीक्षा के शानदार इंतजाम देखिए नागपुर के एक छात्र को दुबई सेंटर अलॉट कर दिया गया है कि वहाँ जा कर परीक्षा दें। अब आनन फानन में बोल रहे है कि ठीक कर रहे है। मजाक बना रखा है शिक्षा व छात्रों के भविष्य को।
Re-NEET देने वाले सभी छात्रों को मेरी अनेक शुभकामनाएँ।
पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दीजिए। कुछ भी हो, मैं हमेशा आपके साथ हूं और आपकी रक्षा करता रहूंगा।
सरकार से अपेक्षा है कि इस बार NEET बिना किसी गड़बड़ी के होगी। छात्र पहले ही बहुत तनाव झेल चुके हैं - अब किसी बच्चे की उम्मीद न टूटने पाए।
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया।
ये उस भारत के लाचार युवा हैं - जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती।
चुनाव के वक़्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है। और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है - भीड़, घुटन, और बेबसी।
इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि मोदी सरकार छात्रों की गूंज सुनना ही नहीं चाहती।
पर मैं वादा करता हूँ - हम यह आवाज़ उन बहरे कानों तक पहुँचाएँगे। हर छात्र को उसका हक़ मिलेगा, उसका न्याय मिलेगा।
17 जून, कोटा। यही गूंज, अब हुंकार बनेगी।
#ChhatronKiGoonj
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में NEET पेपर लीक के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं पर किया गया लाठीचार्ज लोकतंत्र और छात्र आवाज़ को दबाने का प्रयास है।
दमन, लाठी और डराने की राजनीति से न हम पहले रुके हैं, न आगे रुकेंगे।
जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और NTA को बैन नहीं किया जाता, तब तक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा..
#BANNTA #SackDharmendraPradhan
भाई साहब को केजरीवाल और आप पार्टी जनता के मुद्दे नहीं उठाने दे रही थी। इसलिए भाई साहब भाजपा में चले गये थे। लेकिन तब से भाई जी जाग ही नहीं रहे, CBSE हो गया, NEET हो गया, लेखपाल पेपर लीक हो गया। Gen जी सड़कों पर है। पर प्रिय मित्र राघव जाग ही नहीं रहे। उनकी तबियत की दुआ करता हूँ।
उत्कर्ष कोचिंग के कुमार गौरव सर (स्वयं बोलित )अंजना ओम मोदी को अच्छे से जवाब दे दिए रैंकिंग 157 के साथ
बताइए @anjanaomkashyap
को कोई की सबके तरफ उंगली उठा देना आसान है पर इस देश के युवा और शिक्षकों के ऊपर उंगली उठाना भारी पड़ेगा अब देखो न चौतरफा रे Lae हो रही है भारतीय मीडिया की आज
एक तरह बोले तो अंजना ओम कश्यप ने मधुमक्खी के छत्ते में उंगली कर दिया परिणाम देखने को मिल रहा
बताइए विश्व भर में भारत के बेइज्जती कराने वाले भारतीय मीडिया के लोग आज शिक्षकों पर उंगली उठा रहे
मासूम बच्चों पर जब जब अत्याचार हुआ तब तब टीचर्स ने सामने से आके बच्चों के लिए लड़ाई लड़ी, ये गोदी पत्रकार हमेशा चाटुकारिता में लगे रहे और बस फ़िज़ूल की डिबेट, असल हीरो सच में बच्चे हैं जो अपने सपनों के लिए पढ़ते हैं और फिर सिस्टम से लड़ते हैं, गोदी न्यूज़ एंकरस की असलियत उन्हें मालूम है ! एक बार उन बच्चों को बुला को, और सामना कर लो कितना साथ दिया है तुमने उनका !