Born blind in a tiny village in Bundelkhand, Madhya Pradesh, 25-year-old Suneel Lodhi found what he couldn’t find through sight... his voice.❤️
From singing bhajans and Bundeli folk songs at village gatherings and local trains to his songs crossing millions of views online, Suneel’s journey took an extraordinary turn when filmmaker Pankaj VRK discovered him.
Today, his voice features in Hanuman Ansh with “Maine Tere Hi Bharose.”
From local trains to the big screen, Suneel’s story is one of hope, talent and perseverance.
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🚨बड़ी खबर
मैथिली ठाकुर ने स्वरा भास्कर के ‘पद्मावती जौहर’ वाले बयान पर जमकर निशाना साधा।
“यह बेहद अनुचित बयान था। अगर विषय की पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो बोलने से पहले उसे ठीक से पढ़ना चाहिए।”
पहले तथ्य जानिए, फिर बयान दीजिए।
उत्तराखंड सरकार को धमकी देने वाले मौलाना को लगा हो���ा कि धमकी से कानून रुक जाएगा।
कहा गया—“मदरसे बंद करके देखो, फिर बताते हैं हम क्या करते हैं!”
अगले ही दिन पुलिस की कार्रवाई हुई और कथित तौर पर बिना पंजीकरण चल रहे मदरसे पर भी सील लग गई और मौलाना साहब की गाँव पर पुलिस के लट्ठ भी बाज गए।
ये रबीया सेंटर, सदर हैदराबाद, पाकिस्तान का दृश्य है....
ये भीड़ यहाँ किसी सिनेमा के टिकट या मॉल की छूट के लिए नहीं जुटी..
यहाँ काम करने वाले एक व्यक्ति अशोक कुमार जो बेचारा सफाई कर्मी है, उस पर आरोप लगा दिया गया blasphemy का
कोई सबूत... कोई गवाह नहीं..
बस भीड़ उस मासूम की जान लेने यहाँ जुट गयी...
इस बिल्डिंग के ल���गों ने दरवाजे बंद कर दिये तो वो ऐसे चढ़कर अंदर घुसने लगे...
वो तो एक व्यक्ति द्वारा सीसीटीवी फुटेज से ये बात साफ की गयी कि हरकत एक महिला द्वारा की गयी थी और शायद फँसाने के उद्देश्य से की गयी थी... ऐसा लोकल मीडिया द्वारा बताया गया
बड़ी मुश्किल से उस मासूम की जान बच पायी...
वैसे ऐसा पाकिस्तान में कम ही होता है कि ऐसे केस में बचाव हो... पर अशोक की शायद किस्मत अच्छी थी.... जो ईश्वर ने उसके प्राण बचाये!
घटना थोड़ी पुरानी (अगस्त 2022) है पर पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति बताने को काफी है!
सोशल मीडिया के प्रताप से वैसे भी ये भली तरह से "निर्वस्त्र"हो गए हैं;और"खदेड़े"जा रहे हैं!
नालायक और भ्रष्ट छवि वाले नेताओं व दलों से जनता अजिज आ चुकी है!
विपक्ष यदि अपने इस वर्तमान"नेतृत्व व नीतियों"
के दम पर सत्ता की सोच रहे हैं तो भूल जाएं!
लोग अब इन घाघ और चालक नेत���ओं से ज्यादा चतुर और सजग हो गए हैं! वे दिन गए!
"ग़रीबी हटाओ व बैंक खाते में खटाखट"जैसे नारे
हवा हवाई होते हैं; लोग जानते हैं!
चाहे वर्तमान सरकार भी सौ टका सही से काम ना कर रही हो;पर"पुर्ववर्ती सरकारों"से बेहतर है!
ये आप डिजिटल और प्रिंट मीडिया की रिपोर्टिंगों से समझ सकते हैं!
आज काॅक्रोच कार्यकर्ताओं के साथ जो हो रहा है वही कल विपक्ष के साथ भी हो सकता है!
ए��� सीधा सा सवाल पूछा... और पत्रकार अचानक “गोदी मीडिया” बन गई! 🤷♂️😂
एक पत्रकार ने आशुतोष रांका से ऐसा सवाल पूछ दिया, जिसकी शायद उन्हें उम्मीद ही नहीं थी। 🎙️
सवाल: 5 सितंबर को प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
आशुतोष रांका: “हम प्रदर्शन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि BJP ने Gen-Z के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली।”
फिर पत्रकार ने अगला सवाल दाग दिया:
सवाल: लेकिन आपने एक इंटरव्यू में कहा था कि BJP के गुंडों ने आपका प्रदर्��न खराब करने की कोशिश की। अगर FIR BJP समर्थकों के खिलाफ है, तो BJP उन FIR को वापस क्यों ले?
बस... यहीं से कहानी में स्क्रिप्ट का अगला पन्ना गायब! 😂
सीधा जवाब देने के बजाय रांका जी ने पत्रकार को ��ी “गोदी मीडिया” बता दिया और आरोप लगा दिया कि वह BJP को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
सवाल वही रहा...
जवाब फिर भी नहीं आया! 😏
यही वजह है कि पत्रकारों को सिर्फ फोकट के बयान रिकॉर्ड करने के बजाय सवाल भी पूछने चाहिए।
क्योंकि आजकल पत्रकारिता का नया नियम कुछ ऐसा लगता है:
सवाल पसंद आया → अच्छी पत्रकारिता।
सवाल चुभ गया → गोदी मीडिया! 🤣
एक असहज सवाल और पूरा नैरेटिव “Error 404: Answer Not Found” हो जाता है। 🤣
ऐसी ही बेबाक ���िम्मेदार पत्रकारिता की जरूरत है।