हर जगह इतना झूठ बोलने की क्या जरूरत पड रही है पहली बात तो इनकी ख़ुद की बातों में ही Contradiction है
दूसरी बात ये के वहाँ CJP छोड़िये किसी का भी फ़ोन नहीं रखा/छीना जाता है
हाथ में फ़ोन के साथ फोटो अलग से है आप ख़ुद देख लीजिए 👇
This is what Abhijeet Dipke has done, instigating youth to do violence, abuse and destroy their own life and career.
Man who abused Indian Army yesterday is apologising today.
BUT Internet never forgets
राजस्थान SI पेपर 2021 लीक करवाने वाले आरोपियों के खिलाफ नारेबाजी करते अशोक गहलोत,
कुछ फैक्टचेकर कहेंगे कि अशोक गहलोत की सरकार में ही पेपर लीक हुआ था और हजारों छात्रों का जीवन खराब हुआ था
दिल्ली हिंसा से जुड़ी बड़ी खबर
दिल्ली पुलिस के हाथ लगी CJI की चैट, दो वाट्सएप ग्रुप की चैट आई सामने, एक ग्रुप का नाम 'चलो संसद, दूसरे ग्रुप का...
#Delhi#FirstIndiaNews#CJIProtest@DelhiPolice
दिल्ली पुलिस शांतिपूर्वक तैनात थी।
तभी एक कॉकरोच ने पुलिसकर्मियों पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया।
जब पुलिस ने कार्रवाई की, तो कुछ कॉकरोच समर्थकों ने केवल लाठीचार्ज के वीडियो रिकॉर्ड करके उन्हें “पुलिस की बर्बरता” के रूप में दिखाना शुरू कर दिया।
पूरी घटना नहीं, सिर्फ़ आधी सच्चाई दिखाई गई।
यह गलत बात है और यह लक्ष्य से भटकाव का भी संकेत है। युवाओं को राजनेताओं की तरह अपने रंग नहीं चुनने चाहिए। मीडियाकर्मियों से बाउंसरों की तरह दुर्व्यवहार मत कीजिए।
This is the moment when the police were attacked by the CJP mob right in front of Abhijit Dipke. If sources are to be believed, this is the very officer whose injury Peek TV puts in single quotes. Absolutely shameless.
नौकरी है ग्राम सेवक की….
हरकतें है ग्राम मालिक जैसी…!!
ग्राम पंचायत… पायला कला, रामदेवरा…!!
सरकारी नौकरी के लिए इसीलिए तो इतना पागलपन रहता है…
करना कुछ नहीं पड़ेगा…
राजा का जीवन जिएँगे…
और उपर से हर महीने तनख़्वाह भी मिलेंगी…!!!
“आप जंतर-मंतर क्यों नहीं गए? वहाँ छात्र लाठियाँ खा रहे थे और आप यहाँ आराम से घूम रहे हो।”
आज डांस के लिए मशहूर विजेता दहिया का एक CJP समर्थक ने सामना किया।
उसने कहा, “तुम जैसे लोगों की वजह से हम जैसे बेवकूफ़ लोग फँस जाते हैं और बाद में पछताते हैं।”
इतना माहौल बनाने के बाद खुद आराम से घूमना और दूसरों को मुश्किल में छोड़ देना सवाल तो खड़े करता ही है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चुनौती दी थी कि हनुमानगढ़ी में रोज़ा नमाज हुई थी सिद्ध करके दिखाओ।
वीडियो उपलब्ध है।
अब गद्दी कौन छोड़ेगा, यह भी बताओ महाराज !
So they changed the song and removed the offensive scenes. Social media outrage worked...
You, @Sonuthukral, should have done it before to avoid the outrage...
सरपंचों के चुनाव….!!
नियमानुसार देखा जाए तो सरपंच चुनाव में प्रत्याशी अधिकतम एक लाख रुपये खर्च कर सकता है…
लेकिन अगर निर्विरोध चुने जाने वाले सरपंचों को छोड़ दिया जाए…
तो पूरे राजस्थान में एक भी ग्राम पंचायत ऐसी नहीं होगी…
जहाँ एक लाख के खर्च में सरपंच का चुनाव निपट जाए…
हमारे मारवाड़ में तो प्रत्याशी करोड़ों रुपये तक खर्च करते हैं…
और गाँव वाले शौक़ से खर्च करवाते हैं…!!
ये खर्च ही गावों के विकास की सबसे बड़ी बाधा बनता है….
पहली बात तो ये कि इतना खर्च देखकर ईमानदार लोग कभी चुनाव लड़ने की हिम्मत ही नहीं कर पाते…
मतलब ईमानदारी तो चुनाव देखकर ही डरकर साइड में हो जाती है…
फिर जो प्रत्याशी चुनाव जीतकर सरपंच बनता है…
पाँच साल उसके मन में यही भावना रहती है…
वोट दिए है तो कोई एहसान नहीं किया है…
वोटों के लिए करोड़ों खर्च किए हैं मैंने…
काम गया भाड में…
सबसे पहले तो नई स्कॉर्पियो लूँगा…
फिर अपना खर्च वसूल करूँगा…
फिर अगले चुनाव के खर्च का बंदोबस्त करूँगा…
फिर परिवार की तगड़ी व्यवस्था करूँगा…
फिर कहीं कुछ बचेगा तो विकास के कामों का सोचा जाएगा…
अगर एक लाख खर्च वाले नियम को सख़्ती से पालन करवाया जाए…
तो गावों की तस्वीर बदल सकती है…!!