नागौर के सरकारी अस्पताल में कथित लापरवाही से खींवसर क्षेत्र की एक दलित प्रसूता की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ और आंदोलन के बार प्रशासन के साथ समझौता भी हुआ, लेकिन समझौते के बाद आंदोलन में शामिल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा मुकदमे दर्ज करना BJP सरकार की नियत और नीति पर कई सवाल खड़े करता है | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से पूछना चाहता हूं कि अगर न्याय की आवाज़ उठाने वालों पर ही कार्रवाई होगी, तो फिर आम आदमी अपनी पीड़ा किसके सामने रखेगा? क्या यही लोकतंत्र है कि पहले समझौता और फिर सत्ता के इशारे पर मुकदमे ?
@RajGovOfficial और पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनका उद्देश्य न्याय दिलाना है या न्याय मांगने वालों को मुकदमों के नाम पर परेशान करना ?
एक तरफ सरकार दलितों के संरक्षण की बात करती है दूसरी तरफ एक दलित महिला जिसने एक नवजात को जन्म देते हुए सिस्टम की लापरवाही के कारण दम तोड़ दिया,उसके परिजनों को न्याय दिलवाने के लिए आवाज उठाने वाले लोगों पर ही मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है जो पूर्ण रूप से अनुचित व संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है |
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी परिवार के सदस्य ऐसे मुकदमों से डरने वाले नहीं है और प्रदेश में जहां भी अन्याय होगा ,वहां हम अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे |
सरकार के ऐसे हथकंडों का जनता समय आने पर करारा जवाब देगी |
@RajCMO@RLPINDIAorg
प्रदेश की राजधानी जयपुर से महज 45 किमी दूर सांभर व जोबनेर क्षेत्र के गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी के कारण देश की औसत विकलांगता से दोगुनी विकलांगता इन क्षेत्रों के गांवों में होना अत्यंत चिंताजनक और पीड़ादायक है।
आजादी के दशकों बाद यदि दूषित एवं फ्लोराइडयुक्त पेयजल के कारण मासूम बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, तो यह केवल स्वास्थ्य नहीं बल्कि मानव गरिमा और अधिकारों पर भी बड़ा प्रश्न है |
फ्लोरोसिस की समय पर पहचान करने,लोगों को फ्लोराइडयुक्त पानी के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने,फ्लोराइड प्रभावित मरीजों का पंजीकरण और फॉलो-अप करने सहित अन्य उद्देश्यों के लिए शुरू की गई भारत सरकार की एनपीपीसीएफ योजना में करोड़ो रुपए व्यय करने के बाद ऐसे हालात बने रहना और जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने के दावों के बावजूद जयपुर से मात्र 45 किलोमीटर दूर लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं करवा पाना सरकारों की बड़ी विफलता है |
मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से मांग करता हूँ कि प्रभावित गांवों में तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए, सभी बच्चों का विशेष स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए, फ्लोरोसिस प्रभावित परिवारों को समुचित उपचार, पुनर्वास एवं आर्थिक सहायता दी जाए तथा इन क्षेत्रों में यदि एनपीपीसीएफ कार्यक्रम चल रहा था तो इस कार्यक्रम में व्यय हुई राशि,किए गए कार्यों की उच्च स्तरीय जांच करवाके दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही भी की जाए क्योंकि यह हालात साबित कर रहे है कि फ्लोरोसिस नियंत्रण के लिए किए गए कार्य सभी कागजी थे |
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