@ambedkariteIND के सोशल मीडिया हैंडल को सरकार के दबाव में सस्पेंड करना बेहद निंदिनिय है।
भारत में दलितों की स्वंत्रत आवाज को जल्द से जल्द @finkd#thedalitvoice के पेज को बहाल करे।
इस तरह @narendramodi सरकार स्वतंत्र आवाज को दबा नहीं सकती है।
The government of India has reportedly blocked our Facebook page in India, a platform that has consistently raised the voices of Dalits, oppressed communities and marginalized people. This is a deeply concerning and unfortunate development.
We invite your suggestions on what steps should be taken next. If any lawyers, legal experts, civil rights advocates, or digital rights organizations can offer guidance or assistance, please share your advice.
Your support and solidarity are greatly appreciated. Jai Bhim ✊
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बेटा: पापा, मुझसे NEET, पुलिस भर्ती, इंडियन आर्मी या UPSC कुछ भी नहीं निकल पाएगा। अब क्या करूँ?
पिता: बेटा, चिंता मत कर। अगर मेहनत से सफलता नहीं मिल रही, तो मंच संभाल ले। वहाँ ज्ञान से ज़्यादा शोर, तर्क से ज़्यादा नारे और सवालों से ज़्यादा तालियाँ काम आती हैं।
बेटा: लेकिन मुझे तो कुछ आता ही नहीं!
पिता: कोई बात नहीं। कुछ तयशुदा विषय पकड़ लो, वही बार-बार दोहराते रहो। बाकी भीड़ खुद तुम्हें विद्वान घोषित कर देगी।
पूजा के समय मंत्र पढ़ खुदको उड़ने का प्रयास करता है , लेकिन वो उड़ नहीं पाया 200 फिट नीचे खाई में गिर कर उसकी... आंध्र प्रदेश की यह घटना एक बार फिर बताती है कि अंधविश्वास, आडंबर और पाखंड कभी भी विज्ञान और वास्तविकता का विकल्प नहीं हो सकते,
तंत्र-मंत्र, चमत्कार और कथित सिद्धियों के नाम पर लोगों को भ्रमित करना समाज के लिए घातक है। जब आस्था विवेक से अलग हो जाती है, तो उसका परिणाम कई बार दुखद होता है।
समाज को चमत्कारों पर नहीं, बल्कि तर्क, वैज्ञानिक सोच और प्रमाण पर विश्वास करना चाहिए। यही सच्ची जागरूकता है और यही जीवन की सुरक्षा का रास्ता है।
आस्था निजी हो सकती है, लेकिन अंधविश्वास कभी भी समाज का मार्गदर्शक नहीं बन सकता।
सागर के बंडा के सरकारी अस्पताल में 19 महीने के मासूम की आँख में दवा की जगह कफ सिरप डाल दिया गया, जिससे उसकी आँख की रोशनी चली गई। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर अपराध है।
@MP_MyGov दोषी डॉक्टर और जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई हो तथा पीड़ित परिवार को न्याय और उचित मुआवजा दिया जाए।
मध्यप्रदेश में कानून का राज नहीं, पुलिसिया दमन का राज चल रहा है,
भिंड जिले के मेहगांव थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में मृतक संतोष बघेल के परिजनों को न्याय देना तो दूर, उन्हें थाने ले जाकर कथित रूप से मारपीट करना और फिर न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार पर लाठियां बरसाना बेहद शर्मनाक और अमानवीय है।
यह सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो चुकी है। अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ितों की आवाज़ दबाई जा रही है। क्या यही "सुशासन" है? क्या न्याय मांगना अब अपराध हो गया है?
मैं मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 से मांग करता हूं कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए, दोषी पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश की जनता सब देख रही है। सत्ता के अहंकार में निर्दोष लोगों पर लाठियां बरसाने वाली सरकार को जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
@spbhind@MP_MyGov@BhindCollector
यह बात सच है कि मोहन यादव जी के परिवार की संपत्ति बेशुमार बढ़ी है, इसमें कोई दो राय नहीं है, इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर इसका प्रमाण है,
इनके परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों में सरकारी प्रोजेक्ट डाल दिए गए हैं, हाईवे बन रहे हैं, कौड़ियों के दाम पर खरीदी गई जमीनों को बेशकीमती बनाकर तगड़ा मुनाफ़ा कमाया जा रहा है,
सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके कृषि भूमि का कमर्शियल यूज़ किया जा रहा है, यह वाकई निंदनीय है,
मुख्यमंत्री श्री @DrMohanYadav51 जी को नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा देना चाहिए।
भरत तिवारी के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ।
आज देश का युवा जिन हालातों से गुजर रहा है, उसकी जिम्मेदारी उन नेताओं पर भी है जिन्होंने रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य के बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। जब उम्मीदें टूटती हैं तो उसका सबसे बड़ा खामियाजा भरत जैसे युवा भुगतते हैं।
संविधान और कानून सर्वोपरि हैं, लेकिन समाज को यह भी सोचना होगा कि आखिर ऐसी परिस्थितियाँ क्यों बन रही हैं। दुर्भाग्य यह है कि अगर यही भरत दलित, आदिवासी, पिछड़ा या मुस्लिम समाज से होता, तो मनुवादी सोच और गोदी मीडिया शायद अब तक उसे "नक्सली" या "अपराधी" घोषित कर चुकी होती।
बिहार के आरा में पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ, सवाल यह भी है कि अगर यही भरत तिवारी - दलित, आदिवासी, पिछड़ा या मुस्लिम समाज से होता, तो क्या उसे अब तक डकैत "नक्सली" या "अपराधी" घोषित नहीं कर दिया गया होता? ऐसा पहले भी हो चुका है।
नेताओं द्वारा युवाओं से किए गए वादे जब पूरे नहीं होते, बेरोजगारी और निराशा बढ़ती है, तो उसका सबसे बड़ा खामियाजा भरत जैसे युवा भुगतते हैं। संविधान और कानून से ऊपर कोई नहीं है, इसलिए हर घटना की निष्पक्ष जाँच और न्याय आवश्यक है।
ग्वालियर अंचल में लगातार बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान से जुड़े मामलों पर विवाद सामने आ रहे हैं, लेकिन सत्ता और प्रशासन मानो आंखों पर पट्टी बांधकर बैठा है। दुखद यह है कि न्याय की मांग करने वाले ग्रामीणों पर ही कार्रवाई की जा रही है और उन्हें झूठे मुकदमों में उलझाने के आरोप लग रहे हैं।
@collectorshivp1 अनंतपुर, कोलारस (जिला शिवपुरी) में भी हालात ऐसे बने कि सामाजिक न्याय की आवाज उठाने वाले साथियों पर दबाव बनाने की कोशिश की गई, यदि प्रशासन का यही रवैया रहा तो यह संदेश जाएगा कि संविधान निर्माता के सम्मान की रक्षा करना अपराध है और अन्याय के खिलाफ बोलना प्रशासन की नजर में गुनाह।
आज भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष @BhimArmyMpChief का कोलारस पहुंचना केवल एक दौरा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को आईना दिखाने का प्रयास है जो दलित, वंचित और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों की आवाज को दबाने में लगी हुई दिखाई दे रही है।
@DrMohanYadav51 याद रखिए, "बाबा साहेब के सम्मान पर राजनीति करने वाले तो बहुत मिल जाएंगे, लेकिन उनके सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को इतिहास याद रखता है।
@JansamparkMP@CMMadhyaPradesh
बसपा, जिस मिशन को कभी हमने और हमारे पूर्वजों ने खून पसीने की कमाई से सींचा था आज बहुजन महापुरूषों की नेक कमाई अभी के बसपाई नेताओं ने बेच खाई, भास्कर ने बसपा की पोल खोलने के लिए हिडन इनवेस्टिगेशन किया, जिसमें इनका पत्रकार बसपा के यूपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से बहन कुमारी मायावती जी से मिलने की इच्छा ज़ाहिर की,
विश्वनाथ पाल ने कहा बहन जी से मिलना है तो 5 लाख रुपए लेकर चलना होगा, इसका कोई हिसाब क़िताब नहीं रहेगा, और टिकट चाहिए तो 3.5 करोड़ देने होंगे,
बसपा ग्राउंड से गायब है, जमीन पर कोई संघर्ष नहीं दिखता, यही वजह है कि लोग बसपा से दूर होते जा रहे हैं, बसपा के नेता भी AC बंगलो से बाहर नहीं निकलते,
जब घर बैठे करोड़ों रुपए मिल जाए तो मेहनत क्यों करना, बसपा अस्त हो गई है भारतीय राजनीति में 🔥🔥🔥
नीमच दलित परिवार न्याय के लिए दर बदर भटक रहा है लेकिन प्रशासन चुप, जब पीड़िता महिला पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे तो दलित जाति के होने के कारण मिलने से साफ इंकार कर दिया @DrMohanYadav51 ये कौन सा आचरण है?
जिला नीमच के कुकड़ेश्वर थाना अंतर्गत ग्राम हतुनिया में एक दलित परिवार पर हुए गंभीर हमले के मामले में प्रशासन एवं पुलिस की कार्यप्रणाली अत्यंत चिंताजनक प्रतीत हो रही है, पीड़ित पक्ष के अनुसार, जातिगत मानसिकता से प्रेरित दबंग तत्वों द्वारा महिला एवं उसके परिवार के साथ मारपीट की गई, जिससे महिला को गंभीर चोटें आईं और उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती होना पड़ा,
यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, कानून के शासन और संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार पर सीधा हमला है।
मैं @MP_MyGov से मांग करते हैं कि—
प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
पीड़िता को सुरक्षा एवं समुचित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
किसी भी प्रकार के राजनीतिक अथवा प्रभावशाली दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
दलित, शोषित एवं वंचित समाज के साथ अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यदि दोषियों को @SP_Neemuch प्रशासन ने संरक्षण देने का प्रयास किया गया अथवा न्याय में अनावश्यक विलंब हुआ, तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों के तहत घेराव सहित व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।
न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।
बुंदेलखंड में सामंतवादी मानसिकता ने एक और दलित युवक की जान ले ली,
उप्र ललितपुर के राजकुमार पंथ (कोरी) की कथित तौर पर इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उसने पार्टी में पैर दबाने से इनकार कर दिया, परिवार का आरोप है कि जातिसूचक अपमान भी किया गया।
@myogiadityanath सवाल सरकार से है—
जब अपराधी गिरफ्तार हैं, तो क्या इस मामले में भी वही त्वरित कार्रवाई होगी जो अन्य चर्चित मामलों में देखने को मिलती है?
क्या पीड़ित दलित परिवार को शीघ्र न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा मिलेगा?
न्याय का पैमाना जाति, वर्ग या प्रभाव देखकर नहीं बदलना चाहिए। कानून सबके लिए समान होना चाहिए। #DalitLivesMatter
524 हॉटस्पॉट और फिर भी ‘सुशासन’ का दावा? मध्यप्रदेश में दलित-आदिवासी समाज आखिर कब होगा सुरक्षित,
मध्यप्रदेश के 23 जिलों में 524 ऐसे हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहाँ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के खिलाफ सबसे अधिक अपराध हो रहे हैं। ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, नर्मदापुरम और सागर जैसे जिले इस गंभीर स्थिति के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट पहले ही मध्यप्रदेश को आदिवासी समाज के खिलाफ अपराधों में देश में प्रथम तथा दलित समाज के खिलाफ अपराधों में दूसरे स्थान पर बता चुकी है। अब पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट ने भी प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार विकास और सुशासन के दावे कर रही है, तब दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अपराध लगातार क्यों बढ़ रहे हैं? आखिर क्यों प्रदेश का कमजोर, वंचित और आदिवासी समाज आज भी भय, असुरक्षा और अन्याय के साए में जीने को मजबूर है?
जब 524 अपराध प्रभावित क्षेत्रों को हॉटस्पॉट घोषित करना पड़े, तो यह केवल अपराधियों के बढ़ते हौसलों का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। प्रदेश के करोड़ों दलित और आदिवासी नागरिक केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा, सम्मान और न्याय का अधिकार प्राप्त है।
मैं मा. मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी से मांग करता हूँ कि इस गंभीर विषय का तत्काल संज्ञान लेते हुए विशेष अभियान चलाया जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा SC-ST समाज के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए, ताकि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक भयमुक्त वातावरण में सम्मान और अधिकार के साथ जीवन जी सके।
@CMMadhyaPradesh@JansamparkMP