हमने प्रकृति को पूजना सीखा।
वन हमारे आराध्य बने, पर्वत हमारे देवस्थल।
ग्राम देवता, क्षेत्रपाल देवता और कुलदेवताओं ने पीढ़ियों तक हमारी संस्कृति और समाज की रक्षा की।
वे ऐसे देवता रहे जो रुष्ट होने पर भी केवल एक रोट के प्रसाद, सच्ची श्रद्धा और पश्चाताप के बदले पूरे कुटुंब की सुख-समृद्धि की कामना स्वीकार करते रहे।🙏
चित्र साभार: सोशल मीडिया
*तीर्थंकर कल्याणक भूमि दर्शन*
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🌼आज 4 जून 2026
🌼गुरुवार
🌼तिथी चतुर्थी
🌼आज के दर्शन
🌼परमात्मा आदिनाथ
🌼पूरीमताल
🌼इलाहाबाद
🌼उत्तरप्रदेश
🌼एक हजार साल की तपस्या के बाद
🌼प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ परमात्मा को इसी स्थान पर वटवृक्ष के नीचे केवलज्ञान हुआ था.
मैं हैरान हूँ, पहले तो कस्बों में चार पाँच ही दिखाई देते थे।ये टिहरी गढ़वाल में इतने मुसलमान कैसे बस गए? लगता है राहुल गांधी की रैली के लिए यहीं से भीड़ जाएगी