भाजपा ये जान ले कि ये पचास, साठ या सत्तर का दशक नहीं है जिसमें किए गए कांग्रेस के कुकर्म सामने आने में 50 साल लग गए। सैंकड़ों करोड़ रुपए खर्च करके भी अंग्रेजों के एजेंट और हमारे देवताओं को गाली-गलौच देने वाले को पूरे देश के ऊपर "महात्मा" बनाकर नहीं थोप पाओगे।
मोदी से समस्या उनके द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण से नहीं है। वो तो हम बारह वर्षों से झेल रहे हैं। मोदी से जो समस्या है, वह आज और कल में @narendramodi हैंडल से किए गए पोस्ट में दिखता है।
ज्योतिबा फूले पर सात पोस्ट हुए हैं आज, पर मंगल पांडे के बलिदान दिवस को बिलकुल नकार दिया गया।
फुले स्वघोषित रूप से हिन्दू-घृणा करने वाला व्यक्ति था जो उसकी पुस्तक गुलामगीरी के पन्नों पर दिखती है। 1857 की क्रांति को ले कर उसके विचार क्या हैं, वह क्या PM को नहीं पता?
और मंगल पांडे का 1857 में योगदान, क्या नरेन्द्र मोदी केवल इस कारण से नकार गए क्योंकि उनके हिन्दू-विरोधी दलित नायकों की शृंखला में एक ब्राह्मण फिट नहीं होता?
हमारी समस्या यही है कि सवर्णों का योगदान मिटाया जा रहा है, ब्राह्मण विरोधियों को सरकारी प्लेटफॉर्म से वह सब बनाया जा रहा था जो वो कभी थे ही नहीं। ब्राह्मण यूनिवर्सिटी की दीवारों पर गाली सुनता है, नारों में लिंच होता है और सरकारी योजनाओं को फायनेंस करने में पिसता रहता है।
@PMOIndia@BJP4India और @RSSorg स्पष्ट तौर पर राष्ट्र में विभाजनकारी नीतियों को बढ़ा रहे हैं। आलोचना की डींगे मारने वाले नरेन्द्र का सत्य यह है कि वो पत्रकारों को हाउस अरेस्ट करवाते हैं। उनके निर्देश पर उन्मुक्त सोशल मीडिया को बाँधने के लिए मूर्खों से भरी संसदीय समिति अपनी अनभिज्ञता की विष्ठा सार्वजनिक करती है।
नरेन्द्र मोदी को निशिकांत दूबे जैसे चाटुकार ही चाहिए। वही उनको उचित उन्माद देते हैं। बाकी, साक्षात्कारों में ‘आलोचना होती रहनी चाहिए’ का धनिया छिड़कते रहिए।
अयोध्या वाले पंडित जी राजकुमार दास ने जब गाना शुरू किया जो क्या जज और क्या श्रोता, सभी ने दांतों तले उंगलियां दबा ली....
जो लोग माथे पर तिलक और सर पर चोटी वालों को गंवार समझते हैं, वो इसे सुनकर खुद के झूमने से रोककर दिखा दें...
यही है हिंदुत्व, यही है सनातन, यही है राम की कृपा....
अगर बीजेपी बंगाल में आ गई तो कहीं दुर्गा पूजा की जगह आंबेडकर, फुले, पेरियार पूजा न आरंभ कर दे
अतः बीजेपी को वोट देकर पाप न करें, निर्दलीय हिंदू को वोट दें।