घोड़ी या कु•तिया कोई खास फर्क नही होता,गां•ड तो दोनों को उठानी पड़ती है, बस फर्क इतना है कि घोड़ी अपनी पसंद का घोड़ा चुनती है और कु•तिया को कोई भी पकड़ के राह चलती सड़क छाप रां®ड की तरह बीच सड़क पेल देता है.
जब संस्कारियों के ना मर्द पति इनकी प्यास नही बुझा पाते,तो वही प्यास हवस बन कर उभरती है फिर संस्कारी निकल पड़ती है ऐसे मर्द ���ी तलाश मे जो सिर्फ प्यास ही नही,इनकी हवस भी मिटा सके,ऐसा मर्द सिर्फ मुल्लों के अलावा कहीं नहीं पाया जाता,जो इन संस्कारियों को घोडी बनाकर बेरहमी से दौडाता है
जब औरत पसीने से लथपथ और दर्द भरी आवाज से मना करने लगे की अब बस करो उसके बाद भी अगर कोई मर्द उसको कचाकच ठोकता ही रहता है फिर वो औरत उस मर्द को अपने तन और मन का राजा मान लेती है वो दर्द भरी आवाज ही उसकी असली आनंद होता है । उफ्फ मेरे राजा अब बस...
कुछ लोग कहते है शादी शुदा औरते दूसरे मर्द के साथ सोती है अब उन लोगो को कैसे समझाऊं की कोई भी औरत ऐसा मर्द ढूंढ़ती है जो उस औरत को पूरी तरह अपनी ताकत से ऐसे खुश करे की औरत उसी ताकतवर मर्द की कायल हो जाए और ये खूबी सिर्फ दमदार मर्द में है तो औरतों की मजबूरी है उनके साथ सोना ||
अ�����र यही महिलाएं अपनी आजादी और क्षमता का सही इस्तमाल करे तो कल्पना चावला जैसी बुलंदियों पर जा सकती है लेकिन इन जैसियों को तो बस 8 इंच के बुलंदियों पर जाना ही आजादी लगता है🤣😂
Mard agar raani bana ke rakhy toh
Uske liye r@ndi banne mein kesi sharam….Isiliye jo bhi mard kamre ke bahar ijjat se pes aaye , band kamre mai usse uss aurat ki besarm r@ndi avtar ko enjoy karne ka pura haq hai….