💔 हरदोई की एक बच्ची चली गई… दलित टीचर ने एक ब्राह्मण बच्ची को इतना मारा कि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई ।
13–14 दिन बीत गए, लेकिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव के कान में जू तक नही रेंगी और PDA में PD का मतलब प���डित बतायेंगे?।
सोचिए, अगर आरोपी और पीड़ित की जाति का समीकरण उलटा होता, तो क्या यही खामोशी रहती?
क्या ब्राह्मण बच्ची के दर्द पर आपकी संवेदना इतनी छोटी है कि 13 दिन में एक शब्द भी नहीं निकला?
राहुल गांधी जी, अखिलेश यादव जी आपकी चुप्पी इस बच्ची की मौत की दोषी नहीं है, लेकिन न्याय के सवाल पर यह चुप्पी जरूर शर्मनाक है।💔
A family traveling on the Howrah–SMVT Bengaluru Express (Train No. 12863) had a shocking experience when thieves allegedly broke into their AC First Class coach late at night while the train was passing through Odisha.
The criminals stole the family's entire luggage.
Thieves were so professional that they broke the entire door and carried out the theft without the family noticing anything.
If even AC First Class is not safe, it raises serious concerns about passenger security on Indian Railways.
sir
@drm_sonpur DRM sir 63267 mfp ppta train aaj 29/06/26 ko sonpur control dawara itni late ki gai jisse 63266 ppta dbg 2.5 ghante late ho gai. goshwar se ppta aane me 2 ghante laga diya gaya.kam se kam rake share trains ko to time par chlaya kijiye.
sir 2.5 hours se 63266 ppta dbg memu ka wait kar raha hu lekin train ka koi pata nahi hai,na hi digha bridge station par koi suchna di ja rahi hai
@drmdnr
"मुझे दया नहीं चाहिए... मुझे सिर्फ न्याय चाहिए।"
जयपुर की एक साधारण बेटी रेशु गुप्ता की यह पुकार आज हजारों नहीं, लाखों लोगों का दिल झकझोर रही है।
रेशु बताती हैं कि उन्होंने बीएससी (मैथ्स) की पढ़ाई की, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन पिता के कोरोना काल में निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। मजबूरी में उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया और आखिरकार अपनी मे��नत से मोमोज का छोटा-सा ठेला शुरू किया, ताकि मां और बहन का सहारा बन सकें।
लेकिन उनका दावा है कि 25वें दिन ही उनकी जिंदगी बदल गई। रेशु के अनुसार, कार्रवाई के दौरान गर्म पानी से भरा स्टीमर गिरने से वे गंभीर रूप से झुलस गईं। उनका कहना है कि वे मदद के लिए चीखती रहीं, लेकिन उन्हें समय पर राहत नहीं मिली। इसके बाद भी न्याय की लड़ाई आसान नहीं रही। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक पुलिस थाने के चक्कर लगाने पड़े।
रेशु कहती हैं कि आज भी वह अपने इलाज का खर्च खुद और उनका परिवार उठा रहा है। वह किसी से बदला नहीं चाहतीं, सिर्फ निष्पक्ष जांच, इलाज में सहायता और न्याय की मांग कर रही हैं। उनका सबसे बड़ा दर्द यह ह�� कि उनके चेहरे और भविष्य को लेकर उनके मन में गहरी चिंता है। वे कहती हैं, "मैं हारना नहीं चाहती... बस थोड़ा टूट गई हूं।"
रेशु ने सरकार से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो। उन्होंने अपने इलाज का पूरा खर्च, आर्थिक सहायता और सुरक्षा की भी मांग की है। साथ ही कहा कि यदि सड़क किनारे रोजगार गलत है, तो ऐसे लोगों को सम्मानजनक रोजगार का विकल्प दिया जाए।
यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि न्याय, संवेदनशीलता और जवाबदेही की कसौटी भी है। निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने आना जरूरी है, ताकि पीड़ित को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
भारत के सबसे सख्त मुख्यमंत्री योगी जी राम मंदिर की नींव रखे जाने के बाद अब तक न जाने कितनी बार अयोध्या जा चुके हैं,
>फिर राम मन्द���र ट्रस्ट में इतनी गडबड़ी और कमियाँ कैसे थी?
>क्या योगी जी के अधिकारी उनको अँधेरे में रखते हैं
?
>क्या योगी जी का डर खत्म हो चुका है?
>मोहम्मद बिन कासिम के हमले बंद हो गए,
>गजनी भी मर गया
>गुलाम वंश भी खत्म हो गया
>तैमूर का हमला भी नहीं हो रहा
>मुगल भी चले गए
>अहमद शाह अब्दाली भी लूटने नहीं आ रहा
>अंग्रेज भी चले गए
फिर राम मंदिर को लूटने वाले कौन लोग हैं?
गरीब मोमोज बेचने वाली लड़की ने कहा, "बस 2 मिनट रुक जाइए"... लेकिन एक धक्के ने उसकी जिंदगी बदल दी
जयपुर में CM भजनलाल शर्मा के काफिले ��े दौरान पुलिस पर आरोप है कि रास्ता खाली कराने के लिए मोमोज का ठेला धक्का दे दिया गया।
खौलता पानी 27 वर्षीय रेशु गुप्ता के सीने, हाथ, कंधे और जांघ पर गिर गया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई।
पिता पहले ही नहीं रहे, मां और तीन छोटी बहनों का पेट पालने वाली रेशु अब अस्पताल में भर्ती है।
लखनऊ से एक बड़ी दर्दनाक घटना सामने आ रही है
यहां अनूप सिंह नामक एक युवक चीनहट इलाके में गुजर रहे थे
वहां एक होटल था होटल के कर्मचारी होटल की सफाई कर रहे थे और एक सीमेंट की बोरी जो सूख चुकी थी यानी जमकर पत्थर बन गई थी उसे बगैर नीचे देखे फेंक दिया
बोरी सीधे अनूप सिंह के सर पर गिरी जिससे उनकी गर्दन टूट गई और उनका दुखद निधन हुआ
यूपी पुलिस और यूपी सरकार को इस होटल को नीलम करके उसका पूरा पैसा अनूप सिंह के परिवार को देना चाहिए
मतलब मैं आश्चर्यचकित हूं कि आदमी पानी भी फेंकने के पहले एक बार नीचे देखता है कि कोई है तो नहीं और यहां होटल के कर्मचारियों ने बगैर नीचे देखे एक पूरी सीमेंट की बोरी फेंक दी वह भी जो जमकर पत्थर बन चुकी थी