1. Just got off a call with @UnSubtleDesi. I couldn't be happier for her and both of us couldn't help but discuss the harrowing days of post poll violence in West Bengal in 2021. So I am going to share what happened five years ago just so ppl know what happened. #WestBengal2026.
Polarising, consolidating and banking on Muslim votes is victory of democracy, secularism in action, pluralism; consolidating Hindu vote in reaction is fascism, death of democracy, blow to secularism.
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के पुलिसकर्मी ने दारू पी कर, सड़क के पार जन्मदिन पर उत्सव कर के, घर जाते बिहार के नवयुवकों से पहले बाता-बाती की, फिर सर्विस रिवॉल्वर निकाला, उन्हें बिहारी होने के कारण गालियाँ दी और छाती से बस कुछ इंच दूरी से गोली मारी, जो पहले व्यक्ति को चीरते हुए, दूसरे को लगी।
पहला व्यक्ति मर गया, दूसरा गंभीर स्थिति में है। बिहारी है, तो बिहारी होने मात्र के कारण पुलिस वाला उन्हें मार सकता है। दिल्ली पुलिस को कोई प्रशिक्षण आदि मिलता भी है या नहीं?
ये लोग चलते-फिरते घृणा से भरे बम हैं जो अपने पूर्वग्रह के कारण लोगों की हत्या कर रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से एक हेट क्राइम है, जिस पर किसी नेता का वक्तव्य नहीं आया है।
बिहार के सांसद-विधायक मुँह में दही जमाए बैठे हैं कि भाजपा कार्यालय से व्हाट्सएप आए तो इस पर कुछ बोलेंगे। भाई नेता हो, तुम्हारा एक ही कार्य है: अपने क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व। यदि वह भी नहीं हो रहा है तो तौलते रहो।
मोहन भागवत (RSS): संघ ने हिन्दुओं का ठेका ले रखा है क्या?
जेपी नड्डा (भाजपा अध्यक्ष): भगवा का मतलब भाजपा नहीं।
दत्तात्रेय होसबोले (RSS): हमारी कई नीतियाँ वामपंथी हैं।
नरेन्द्र मोदी (BJP): अम्बेडकर, फुले इस देश के निर्माता हैं। अम्बेडकर पर पंचतीर्थ बन रहा है।
राजनाथ सिंह (BJP): अम्बेडकर राष्ट्रऋषि हैं।
धर्मेंद्र प्रधान (BJP): ऐसी पॉलिसी बनाऊँगा कि सबकी पीडीएफ फट जाएगी।
Bh Wing: भाजपा-RSS RW का कोर हैं, जो इसे नहीं मानता, वो वामपंथी है।
गौतम खट्टर के गिरफ्तारी की प्रमुख वजह ये वीडियो भी बताया जा रहा है ...
मतलब सरकार की चरण वंदना करो तभी तक सुरक्षित हो और जिस दिन खिलाफत करोगे कानून की तलवार आपके माथे पर लटक जाएगी
Gautam Khattar sent to 6 days police custody by judicial magistrate goa court. Much to say about the procedure and the manner in which this entire thing was done. Much to say about what happened in the court room. I stand with you and soon justice will prevail.
Gautam Khattar has just been arrested for his remarks on St. Xavier who boasted of deriving great pleasure in seeing Hindu idols and temples being demolished. Gautam's brother is already in jail in connection with the same case.
I stand with @GautamKhattar. And so should you.
Gujarat Police have dispatched a notice recommending application of the dreaded BNS sections 152 and 353(2) on one of @ajeetbharti's sarcastic tweets concerning @narendramodi. These sections are non-bailable and one of them carries a life imprisonment clause.
I stand with Ajeet.
I was ordered by @Lenskart_com to cut my shikha and remove my tilak. When I refused to do so, I was fired. - Zeel Soghasia
This is blatant discrimination and bigotry that goes beyond adhering to some internal memo. Mr Soghasia must be recalled and reinstated. @peyushbansal
Shocked by the registration of FIR and sudden dispatch of urgent notice against @ajeetbharti by police under the BJP coalition govt in Bihar, over a single rude word that he used for a Congress politician five months ago. Unhinged vindictiveness.
I stand with Ajeet.
सामान्य वर्ग के योद्धाओं से आग्रह है कि इन पिल्लों को जम कर पेलो। प्रोटेस्ट की न्यूज़ और वीडियो जहाँ से मिले, जितनी बार मिले, एक कमेंट के साथ पोस्ट करते रहो। जब तक बाढ़ नहीं आएगी, इनका घमंड नहीं टूटेगा।
रुचि तिवारी वाली घटना में मोदी ही इनेबलर है:
१. ‘ब्राह्मणों से आजादी, मनुवाद से आजादी’ के नारे लगे: आपने कहा छात्र हैं, डिसेंट है
२. दीवारों पर ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’, ‘ब्राह्मण-बनिया वापस जाओ’, ‘वी आर कमिग फॉर यू’, ‘देयर विल बी ब्लड’ लिखे गए: आप चुप रहे, कुछ नहीं बोले केवल डिबेट में दूसरे प्रवक्ताओं को चुप कराने के लिए आपने इसका प्रयोग किया
३. आगे नारे जेनोसाइडल हुए, ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’, ‘ब्राह्मणों की छाती पर, बिरसा फूले अम्बेडकर’, ‘इनको मारो जूते चार’ आए, हिंसा बढ़ती गई नारों में: आप चुप रहे, ब्राह्मण घृणा का नॉर्मलाइजेशन होता गया
४. कल रुचि तिवारी को उसके ब्राह्मण होने के कारण पीछे के लड़कों द्वारा ‘इसे वहाँ ले चल, इलाज करेंगे’ की योजना बन रही थी, और वामपंथी लड़कियों ने उसकी हत्या के प्रयास किए: आप आज भी चुप हैं, संभवतः एक वीडियो ढूँढ रहे होंगे जहाँ उसने भाजपा की आलोचना की हो, ताकि उसे सोरोस एजेंट बताया जा सके।
तो पूरा एक पैटर्न है कि आपने एक कैम्पस के नारों से दीवारों पर ग्रैफिटी, फिर हिंसक नारे, हत्याकांड की धमकी वाले नारों से होते हुए, आज एक लड़की की गैंगरेप और हत्या के प्रयास तक यह जातिवादी घृणा पहुँची है।
ये सब 2014 के बाद हुआ, सोशल मीडिया पर दिखा और आप लगातार चुप रहते रहे। फिर इसका क्रेडिट और किसको दे दिया जाए? इस सरकार ने कितनी बार जेएनयू-जाधवपुर जैसे विश्वविद्यालयों के प्रशासन को कहा कि यह जातिवादी घृणा नहीं चलेगी?
कितनी बार यूजीसी ने कहा कि कैम्पस पर यह अस्वीकार्य है? आपने एक कैम्पस से इसे मल्टी-कैम्पस बनाया, फिर यह मवाद सोशल मीडिया पर पसरा, फिर आपने SC/ST Act का हथियार दिया, फिर आपने कम्पाउंड किया इस घृणा को, उनके हाथ सशक्त किए, और आज एक ब्राह्मण लड़की के कपड़े फाड़ने और गला दबा कर हत्या की चेष्टा आपकी पुलिस के सामने हो रही है, तो इनेबलर कौन हुआ?
किसी को लग रहा है कि यति नरसिंहानंद राजनैतिक पार्टी बनाना चाहते हैं, तो उसको शीघ्रातिशीघ्र मानसिक चिकित्सालय में जाना चाहिए।
घृणा करो यूजीसी समर्थकों से। उन्हें बिका हुआ कह लो क्योंकि तुम्हारे पास कोई तर्क बचता नहीं। उन पर पर्सनल आक्षेप कर लो, क्योंकि उनके प्रश्नों का उत्तर नहीं है तुम्हारे पास, पर ऐसे हास्यास्पद आरोप मत लगाओ।
यति नरसिंहानंद को मैं छः वर्षों से जानता हूँ। कितने चुनाव हो चुके हैं, कोई पार्टी नहीं बनी। जो व्यक्ति केवल और केवल हिन्दू एकता के लिए 95% मुल्लों के बीच खड़ा है, उसको अपनी राजनैतिक दासत्व से सनी सोच का पात्र मत बनाओ।
तुम भाजपा की चाटो, किसी ने नहीं रोका है पर यदि तुम बाहर बैठ कर डासना, यति जी जैसों पर पार्टी बनाने के लांछन लगाते हो तो तुम थूकने योग्य भी नहीं हो। जो व्यक्ति किसी तरह अपने शिष्यों के लिए दो काल की रोटी और मंदिर के रखरखाव का दायित्व लिए वहाँ सनातन की लड़ाई लड़ने के लिए टिका हुआ है, उसे मत लपेटो।
जिस व्यक्ति ने तुमसे बहुत माँगा तो तुम्हारी एकता माँगी, जिसने बहुत माँगा तो 108 दिवस के यज्ञ के लिए तेल-समिधा-सामग्री हेतु धन माँगा, उसे अपनी संकुचित सोच का निशाना मत बनाओ।
कुछ भ्रम है तो एक बार मिल लो, दूर हो जाएँगे।
१. सामान्य वर्ग के निर्धन विद्यार्थियों को फॉर्म की फीस में छूट हो, हॉस्टल/एडमिशन सहित हर उस जगह छूट हो जहाँ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को छूट मिलती है। आप हर समाज को जाति के आधार पर आरक्षण भी देते हैं और फिर उसे उसी जाति के आधार पर निर्धन मान कर फीस में भी छूट। सामान्य वर्ग को कम से कम आर्थिक आधार पर सरकार हर स्तर पर वैसी ही आर्थिक छूट दें जो SC/ST को उपलब्ध है।
२. सीटें बढ़ी हैं, यह सत्य है, पर जनसंख्या और साक्षरता भी बढ़ी है। और सीट इसलिए नहीं बढ़ी थी कि भविष्य में भरेंगी, बल्कि इसलिए कि पहले बहुत ही कम थीं। इसलिए, प्रतिभाहीन लोगों को जबरन सरकारी कॉलेजों में चार नंबर पर भरने की जगह, उन सीटों की एक न्यूनतम पात्रता निर्धारित हो, यदि आरक्षित उसे पूरा करते हैं तो उत्तम, अन्यथा अनारक्षित से उसे भरा जाना चाहिए।
३. धर्मेन्द्र प्रधान जैसे नकारों को नकारे मंत्रालय दें, न कि ऐसा जिससे भारत का भविष्य तय होता है। ऐसे हर मंत्री जो निकम्मे हैं, उनसे त्यागपत्र तो ले ही लिया जाना चाहिए।
४. यह स्वीकारिए कि आपने एक कुकृत्य किया है, और लगातार सामान्य वर्ग उसका शिकार होता रहा है। अपने भाषणों से ‘पीड़ित, वंचित, शोषित’ का सामूहिक गायन बंद कीजिए। अपने भाषणों को सही अर्थों में सर्व समावेशी बनाइए।
५. आपके लाभार्थी वर्ग में, अब सामान्य वर्ग के निर्धन छात्र-छात्राएँ होने ही चाहिए। उन्हें 40% पर समेट कर आप विकसित भारत का झुनझुना नहीं बजा सकते।
६. हर राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह पास होते सामान्य वर्ग के हिन्दुओं को अपराधी बनाने वाले कानून पर आपकी पार्टी के वकील उसका प्रतिकार कोर्ट में करें। यदि आप ऐसा नहीं कर पाते तो यह सत्य हो जाता है कि आप सामान्य वर्ग की प्रतिभा का सामूहिक संहार करना चाहते हैं।
७. सामान्य वर्ग एक बहुत बड़े हिस्से का मोहभंग हो चुका है। उनका विश्वास यूजीसी पर मोदी/भाजपा की चुप्पी के कारण डिग चुका है। बाकी का ‘सत्कार्य’ आपके आइटी सेल के गिरहकट लोगों ने वैयक्तिक आक्षेप से ले कर, तार्किक काउंटर की जगह, निजी जीवन को निशाना बना कर कर ही दिया है। तार्किक काउंटर लोग भूल जाते हैं, पर्सनल अटैक याद रहता है।
८. सामान्य वर्ग अब किसी भी प्रकार का चूरण नहीं फाँकेगा, उसे तंत्रगत सुधार चाहिए। ‘बदला लेंगे’ की बात कितनी उचित है, वह चर्चा का विषय है, पर उन्होंने ऐसा सोच लिया है, इससे आप इनकार नहीं कर सकते। उसे अब मोदी/भाजपा की हार, अपमान आदि पहले की तरह ‘पर्सनल’ नहीं लगते। वो कह रहा है कि जब हमारा भविष्य ही नहीं रहेगा तो हम तुम्हारे नेतृत्व का करेंगे क्या?
९. जो बेचारे ‘इन्हें पार्टी का काम मत दो’ की धमकी दे रहे हैं, वो ऐसा करवा कर देख लें, लोगों के घर के चूल्हे बंद नहीं होंगे। वैसे भी पार्टी का विश्वास लल्लनटॉप जैसों पर अधिक है, वो लोग काम कर ही देंगे।
60% SC/ST, 25% OBC, 15% GC
Every fucking scheme not only has reservations but also fee waivers. Schemes financed by the same earning class whose kids are barred from entrance itself. What a clown show is going on!