जहां देश में 92% case sc st का प्रूफ नहीं हो पाते
वहां सरकार 40% ओर हाइक देने को कह रही है
जो दिन रात मेहनत करके टैक्स दे रहा है
वो कुछ बोले तो it cell वाले
तुरन्त देशद्रोही साबित कर देंगे
हम कर भी क्या सकते है
मै स्वर्ण हु
हमारे पूर्वजों ने 5000 साल पानी नहीं पीने दिया
उसका बदला हमारी आने वाली पीढ़ियों से लिया जाएगा
@jpsin1 जितेंद्र भाईसाहब आप समझदार इंसान हैं।
उस जगह पैर मत रखिए जहां आग लगी है।
जल जायेंगे।
जब सरकार के पास उनके कोर वोटर्स के सवालों के जवाब नहीं हैं।
जब सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन की भी अनुमति नहीं दे रही है।
तो आप "नाराज फूफा" मत बनिए।
अकाट्य तथ्य रखिए।
बाकी आपका समर्थन रहेगा।
Everyone talked about UGC 2026 regulations!!
But do you know about UGC 2023 grievance redressal guidelines??
In this "Discrimination" means:
Discrimination of students from the SC, ST, OBC, Women, Minorities or PwD categories.
Means GC are excluded here as well.
There is a systematic apartheid going on against GCs, and we are sleeping.
सरेंडर मोडी एक्ट @ajeetbharti में केवल 47 प्रावधान देखकर मुझे हर रात नींद नहीं आती...
नफरती मानसिकता के नेताओं ने देश का बेड़ागर्क कर दिया है, अब समय है भारत की उन्नति, समानता, शांति चाहने वाले लोग नफरती नेताओं को नकारे तथा राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
बाकी नील मानव(नफरती जंतु) के कार्यकाल को अपने देख ही लिया है, सनद रहे ऐसे घटिया नफरती नेता को दोबारा गद्दी नसीब ना होने पाए।
सवर्णों/ओबीसी को किसी की प्लानिंग में नहीं आना है...
20 से 30 सितंबर तक दिल्ली में चन्द्रशेखr के आन्दोलन से दूरी बनाए रखें, इनका मोदी से जो भी मामला है ये जाने...पिछले आंदोलन में 14 लोगों की मृत्यु हुई थी।
हमें कोई सुरक्षा नहीं देगा, इसलिए इनके आंदोलन के दिन कोशिश करें कि 5 किलोमीटर की दूरी बनाकर रखी जाए। #ReservationReformआंदोलन
#ScStActRollBack
सामान्य वर्ग की औकात क्या है यह भाजपा, कांग्रेस अन्य राजनीतिक दलों को आगामी चुनावों में पता चल जाएगी...
ज्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है, हमारे पुरखों ने भी संघर्ष किया है, हम भी कर लेंगे, विकल्प तैयार होगा, आज नहीं तो कल...
सामान्य वर्ग 30 प्रतिशत से अधिक है, जिन्हें यह मिथक लगता है, उनका मिथक आगामी दिवसों में टूट जाएगा #ReservationReformआंदोलन
@IAReservation@BJP4India@narendramodi लगता है मोदी जी के दिमाग में केमिकल लोचा हो गया है।
करने चले थे कांग्रेस को ख़त्म और बीजेपी को ख़त्म करने की ओर मुड़ गये।
@BJP4India@narendramodi तुम लोगो का भीमांडगिरी और भडवागिरी का अंत 27 से शुरू और 2029 मे खत्म होगा। फिर भागना एथेनाल भ्रष्टाचार, हाइवे भ्रष्टाचार, दूसरे राज्य के मंत्रीयो के बच्चो को दूसरे राज्य मे एसडीएम और डिप्टी एसपी बनाने का भ्रष्टाचार, राफेल घूसखोरी।
तुम लोगो की लंका सवर्ण ही जलायेगा
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण मांगने से अच्छा है
खुद का कम्पनी खोलिये और उसमें एक भी सवर्ण को नौकरी पर मत रखिए...
आरक्षण 100% लागू करिए, फिर देखिए...
साल में कम्पनी दिवालिया होगी या दूसरा गूगल बनेगी..
देवी-देवताओं के अपमान पर पुलिस को शिकायत की प्रतीक्षा नहीं करना है बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर FIR दर्ज करना है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है
Supreme Court of India
Order Date: 28.04.2023
Case No: WP(C) 943/2021
Ashwini Upadhyay vs. UOI
@HMOIndia@AmitShah@PMOIndia@narendramodi
Using their own minor child as a political tool to spread venom and hatred in society. Turning a young girl into a mouthpiece for division instead of protecting her childhood. This isn't activism - it's calculated exploitation. Absolute shame.
#SCSTएक्ट#ScStActRollBack
@Profdilipmandal चीफ जस्टिस कोई भारत का चौधरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट अचूक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के शब्द ब्रह्म वाक्य नहीं है।सुझाव अनिवार्य नहीं हैं।
अगर होते तो 2018 में हिंसा वालों को सरकार को शूट एट साइट का ऑर्डर देना था न कि संसद में कानून लाकर व अपनी जहरीली राजनीति के कारण नए प्रावधान ।
क्यों हो रहा है यह सब?🖋️
बुद्धुजीवियों की समस्या ये है कि इन्हें अब भी समझ नहीं आ रहा कि मामला क्या है।
सुनो भाई! आप यह जातिवादी राजनीति कल से नहीं, कई साल से कर रहे हो। आप क्रोनोलॉजी समझो।
आपलोगों ने 2014-15 में ही एससी एसटी एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव लाकर पटक दिया था। 2.5 लाख मुआवज़े को तीन गुना से ज़्यादा बढ़ाकर 8.25 लाख कर दिया था। इतनी बढ़ोतरी तो जीडीपी में नहीं हुई। आपके इस होशियारी के चलते एट्रोसिटी एक्ट की एक अर्थ व्यवस्था चल पड़ी। लोग दुरुपयोग करने लगे। सुप्रीम कोर्ट तक बात पहुंची, 2018 के सुभाष महाजन केस में।
फिर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के कुछ हानिकारक प्रावधान को एक तरह से निरस्त कर दिया।
फिर दलित समाज के लोग आंदोलन पे उतारू हुए और उत्तर भारत में कई जगह हिंसा हुई।
फिर आपका वोट ना खिसक जाये, क्यूंकि हाल ही में (2017) में आप उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतकर आए थे, तो आपने संसद में खड़े होकर ये तक कह दिया कि इस क़ानून का एक डॉट एक कॉमा तक नहीं बदला जाएगा।
फिर राजीव गांधी की तरह आपने अपना शाह बानो पल पा लिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निरस्त करने के लिए आपने एससी एसटी एक्ट में 18A का प्रावधान जोड़ दिया।
यह सब देखकर सवर्ण नाराज हुए और आपको 2018 में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनावों में सवर्णों ने सबक सिखाया, आपकी हार हुई। तो सवर्ण को खुश करने के लिए संवैधानिक सीमा पार करके आपने 2019 में EWS का आरक्षण दे दिया।
सवर्णों के EWS आरक्षण से जब ओबीसी नाराज हुए तो उन्हें अपने पास रखने के लिए 2020-21 में भर भर के हर जगह आपने ओबीसी का आरक्षण मंज़ूर कर लिया - मेडिकल, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, तमाम तरह की योजनाएं जिसमे एससी एसटी के साथ साथ ओबीसी को आपने घुसेड़ा।
पर ओबीसी उससे भी खुश नहीं था और आपसे जाति जनगणना की माँग कर रहा था ताकि 50% से अधिक आरक्षण ले सके। आप सवर्णों को हल्के हाथ से जताते रहे कि भाजपा जाति जनगणना नहीं करेगी और दूसरी तरफ़ EWS का रास्ता खोलकर आपने ओबीसी को संकेत दे दिया था कि 50% की संवैधानिक दीवार तोड़ी जा सकती है।
इन सबके बावजूद, आपके भीतर का सवर्ण 2024 में आपके साथ था। लेकिन जब चुनावों में आप 240 पर लटक गए तो आपको बात समझ आई कि दलित और ओबीसी ने आपको उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में निपटा दिया, जिसके लिए आपने इतना कुछ किया।
फिर आपने अपनी सारी हदें पार की, और सीधा हिंदुत्व का नीलकरण कर दिया। दो साल के अपने डिस्कोर्स को देखिए कि आप किस लेवल पर वोट पाने के लिए बिछ गए।
एक तरफ़ दलितों को खुश करने की क़वायद और दूसरी तरफ़ ओबीसी को गुदगुदाने के लिए आपने 2025 में जाति जनगणना को स्वीकार कर लिया। बस यहीं से सवर्णों के साथ आपका ब्रीच ऑफ़ ट्रस्ट शुरू हुआ। यहीं से उसने आपके असली रंग को जान लिया, यहीं से उसने समझ लिया कि आप सत्ता में बने रहने के लिए राजनीति के हरेक मानदंड तोड़कर आगे बढ़ने को तैयार हैं।
आपके खेमे का सामाजिक संतुलन यहीं पर आकर बिगड़ गया। इस असंतुलन में हर जगह बारूद बिछी हुई थी। बस इंतज़ार था एक तीली का और वो तीली थी यूजीसी, जिसमे आपने एससी एसटी ओबीसी को एक साथ करके सवर्ण को अलग कर दिए। बात दिखने में छोटी थी, पर चिंगारियाँ दिखती छोटी ही हैं। जिसे इस क्रोनोलॉजी का बोध होगा वो समझ जाएगा कि यूजीसी क्यों मोदी के लिए वाटरलू की तरह है।
अब भी नहीं समझे, तो कभी नहीं समझोगे। धृतराष्ट्र अंधा था, पर वो देखना चाहता था, इसलिए संजय को पास बुलाकर बिठाया (हालाकि पुत्र-पार्टी मोह में वो देख नहीं सका)। लेकिन गांधारी अंधी नहीं थी, उसने पट्टी बाँध रखी थी। और इसीलिए कहता हूँ कि आपलोगों की अवस्था गांधारी जैसी हो चुकी है। शायद महाभारत की ढलती साँझ में ही बुद्धुजीवियों की आँखें खुले।
@Profdilipmandal आरक्षण से पास अनपढ़ यह बता कि केस फर्जी आदमी हारा हो तो सामान्य कानून में जीता हुआ व्यक्ति की जिम्मेदारी सरकार के पैसे वापस करवाने की है या सरकार खुद केस करेगी?
अगर करेगी तो 3000 करोड़ से ज्यादा बांटकर कितने पैसे सरकार ने वापस लिए?
इन फर्जी लोगों पर कितने मुकदमे दर्ज हुए?
फैक्ट?