सपनों के , पीछे भाग रहे है
तन को कर, बीमा के हवाले ।।
🖋️३
पायेंगे कैसे अपनापन
बच्चों के व्यवहार में
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बस शुरुआती मज़ा है,
एकाकी परिवार में
🖋️४
~ धीर सुप्रिया
#कविसम्मेलन#kavisammelan
पढ़े लिखें परिंदे कैद हो गये
माचिस से, मकान में
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9 से 6 की ड्यूटी
और मानसिक थकान में ।।
🖋️१
मन गांव मे ही रह गया
बस शरीर, शहर का वासी है
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ताज़ा बस, ख़बर, यहां है
तासीर, बासी_ बासी है ।।
🖋️२
दो जन दोनों कमाने वाले
बच्चों को , मेड हां पाले
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