शानदार, जबरदस्त, जिंदाबाद
ये होसी है पत्रकारिता, ऑखो में आंख डालकर, शेोर की तरह दहाड़,
जब अन्याय के खिलाफ कलम तलवार बन जाय।
भारत मित्र को बहुत बहुत धन्यवाद। आप एक निर्दोष बच्ची के लिए
खड़े हुए हैं
राहुल गांधी जी का वो पल 🔥😂
अचानक बोले -
“Connect Mr. Singhvi.”
बस… पूरा माहौल बदल गया। 😭
यही होती है लीडरशिप -
जरूरत पड़ी, सही आदमी याद आया,
और तुरंत काम पर लगा दिया। 🇮🇳🔥
No drama. Just action.
आरक्षण में चार अक्षर हैँ,
बीजेपी और उसके जातिवादी समर्थक
पूरा आरक्षण तो बहुत बड़ी चीज है,
उसमें से सिर्फ एक अक्षर हटाकर दिखा दें,
तो पूरा गाँव का वोट दिलाऊंगा,
हटा पाओगे,
बोलो है हिम्मत,
THIS IS ABSOLUTE GOLD 😂
Rahul Gandhi — Why so many cases of Paper Leaks happening nowadays?
Girl — Shall I speak the truth?
RaGa — Yes, go ahead
Girl *smiles* — Those who were caught for paper leaks have ran away to Gujarat 🤣🤣
RaGa — Achaaa 😂
Loved how the entire women’s crowd started cheering for the girl 🔥
जब प्रियंका गांधी ने खुले मंच से राहुल गांधी की तारीफ़ की-
प्रियंका गांधी— अदानी और अंबानी जी ने देश के बड़े से बड़े नेता और मीडिया को ख़रीद लिए लेकिन मेरे भाई को नहीं ख़रीद पाए🔥🔥
मेरे भाई मेरी तरफ़ देखो , सबसे ज्यादा गर्व तुम पर है।
क्यूँकि सत्ता का पूरा जोर लगा कर हजारों करोड़ खर्च किए राहुल जी की छवि ख़राब करने के लिए
इन पर जाँच एजेंसियां लगाई गई लेकिन राहुल जी डरे नहीं क्यूंकि ये योद्धा हैं
ये मो इरफान है जोकि एक झुग्गी में रहते है , एक गोदी मीडिया टीवी चैनल के ऐंकर और पत्रकार से भी लाख गुना पढ़ा लिखा ये लड़का लग रहा है , जिसकी समझ का स्तर उनसे ऊपर है
लेकिन सोशल कैपिटल और गरीबी की वजह दर दर की ठोकरे खा रहे है कैसा देश है मेरा , कैसी हमने समाज विकसित किया है ,जो अमीर है न टैलेंट होने के बावजूद वो सारे सिस्टम में सेट हो जाता है क्योंकि उसके पास कनेक्शन है
आरक्षण को कोसने वालों को ये पता होना चाहिए कि आखिर आरक्षण क्यों जरूरी है ये अफरमेटिव एक्शन की तरह काम करता है
** स्वप्न झरे फूल-से, मीत चुभे शूल-से,लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे।कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई,पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई,पात-पात झर गये कि शाख़-शाख़ जल गई,च चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई ***
– गोपाल दास नीरज की पंक्तियां
शायद इरफान यही कहना चाहते हैं कि समय किसी के लिए नहीं रुकता। इंसान जब तक संभलता है, तब तक जीवन का बहुत सा हिस्सा बीत चुका होता है।अधूरी इच्छाएँ: मनुष्य की चाहतें धरी रह जाती हैं और उम्र हाथ से फिसल जाती है।बेबस इंसान: इंसान दुनिया के घटनाक्रम को केवल देखता रह जाता है और वक्त अपना सफर तय करके आगे बढ़ जाता है
#जंतर_मंतर_के_कॉकरोच
#जंतर_मंतर_ब्रेकिंग_न्यूज
@cjp_for_india
@sauravyadav1133 Bhai hrr chij me logic khojna bnd kr do ..... humour bhi ek chij hoti h ....pandit ke baare me jb mazaak hota h ...koi aate ho bhounkne
This is very BRUTAL, Anjana exposed BJP on live debate 🔥
Anjana –– Can you give food with detergent to your kids like students got in mid day meal?
BJP spokie –– Actions will be taken against responsible people
Anjana 🗿 –– Everytime you people say the same thing
BJP spokie –– Do you know what happened during Akhilesh Yadav govt?
Anjana 😂 –– Do you know how many years it's been since BJP is in power?
BJP spokie –– But... But
Anjana 🔥 –– Now i will show these scenes everyday and ask questions to BJP spokesperson on my debate
Just imagine if journalists start showing spine like this on regular basis
Here you go on public demand…
Fact check : this video is 8 years old and has nothing to do with his recent resignation from BJP. Because my name surfaced in this video, have got many calls and texts to enquire why he was crying taking my name. so I am explaining the whole context here
https://t.co/mcveIrjxJH
BREAKING 🚨 This is massive as Shehzad Poonawala opens up on leaving BJP
Journalist –– What was the biggest challenge behind this decision?
Poonawala 🤯 –– Financial challenges because i have to pay my rent. My landlord won't waive it off just because i am from BJP
Journalist –– Why can't your salary get increased?
Poonawala 🤯 –– There is no salary system in BJP
Journalist –– Then how do other spokesperson survive with it
Poonawala –– Many of them have business, survey agencies or something like that to earn
Personally, this is very shocking to hear for me especially when BJP is the largest party of the world
फडणवीस राहुल गांधी जी से इतना डरते हैं!
जैसे ही राहुल गांधी जी ने पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के अगले चरण की घोषणा की, उसी के आसपास पुणे में 18 से 31 अगस्त तक धरना-प्रदर्शन और जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
राहुल गांधी जी का कार्यक्रम 22 अगस्त को पुणे में होना है। इस बार कार्यक्रम में खास तौर पर छात्राओं की आवाज़ और उनके मुद्दों को सामने लाने की बात कही गई है। सरकार की तरफ से प्रतिबंध के पीछे कानून-व्यवस्था और त्योहारों का हवाला दिया जा रहा है।
लेकिन सवाल सीधा है कि अगर त्योहारों की वजह से भीड़ और कानून-व्यवस्था संभालने की चिंता है, तो क्या इसका समाधान लोकतांत्रिक कार्यक्रमों और छात्रों की आवाज़ पर रोक लगाना है?
त्योहार तो पूरे महाराष्ट्र में मनाए जा रहे हैं। फिर पुणे में ठीक उसी अवधि में सार्वजनिक सभाओं और प्रदर्शनों पर इतनी कड़ी पाबंदी क्यों?
और सबसे बड़ा सवाल, जब छात्र अपनी बात कहने के लिए राहुल गांधी जी के सामने आना चाहते हैं, तो सरकार को उनसे डर क्यों लग रहा है?
छात्रों की समस्याएं सुनना किसी सरकार के लिए खतरा नहीं होना चाहिए। अगर सरकार को अपने काम पर भरोसा है, तो उसे छात्रों की आवाज़ सुननी चाहिए, उनका कार्यक्रम रोकना नहीं चाहिए।
राहुल गांधी जी ने ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए छात्रों और युवाओं के सवालों को मंच देने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि सरकार उन सवालों का जवाब देगी या प्रतिबंधों के पीछे छिपेगी।
छात्रों की आवाज़ दबाने से सवाल खत्म नहीं होते।