#HHDrJayantAthavale जी के मार्गदर्शन के कारण साधकों पर जीवन का प्रत्येक कृत्य कलात्मक रूप से तथा ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम्’ करने का संस्कार अंकित हो गया है ।
#HHDrJayantAthavale जी ने साधक-कलाकारों द्वारा बनाए नौ देवताआें के चित्रों में संबंधित देवता का तत्त्व, साथ ही शक्ति, भाव, चैतन्य, आनंद एवं शांति अधिकाधिक आए, इसलिए प्रत्येक चरण पर मार्गदर्शन किया ।
जब नृत्य, गायन जैसी सात्त्विक कलाएं समाज में विकृत हो गई हैं । तब #HHDrJayantAthavale जी ने ‘नृत्य से ईश्वरप्राप्ति’ का ध्येय देकर, उससे होनेवाली अनुभूतियां और होनेवाले शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों का अध्ययन करने के लिए हमें प्रोत्साहित किया ।
अपना धन धर्मकार्य हेतु देकर त्याग करना, किसी भी प्रकार के आडंबर के बिना प्रत्येक बात सादगी से तथा साधना स्वरूप करना, मान-सम्मान की अपेक्षा न रखना, कर्तापन ईश्वर को देकर निष्काम भाव से कार्य करना, ये #HHDrJayantAthavale जी के कुछ गुण विशेषताएं हैं ।
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आज, 14 जून 2018, शाम 6.15 से 8.30 बजे
विषय :
1. हिंदु राष्ट्र की स्थापना के प्रचार करने की दृष्टीसे युरोप एवं भारत का तुलनात्मक अध्ययन
👉वक्ता : प्रा. डॉ. कुसुमलता केडिया
2. सेक्युलरिझम का अर्थ क्या है ?
👉वक्ता : @Ramesh_hjs
& @Rajc_
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आज, 14 जून 2018, रात 7.30 से 8.30 बजे
विषय
सेक्युलरिझम का अर्थ क्या है ?
प्रमुख वक्ता
👉 श्री. रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
👉 श्री. चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था
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9322533595
#HHDrJayantAthavaleJanmotsav ‘आंधळा म्हणतो, ‘दृश्य जग असे काही नाही.’ त्याचप्रमाणे अंधश्रद्धा निर्मूलन समितीवाले आणि बुद्धीप्रमाण्यवादी म्हणतात, ‘सूक्ष्म जग’, इत्यादी काही नाही’; कारण त्यांना सूक्ष्मातील विषय समजून घेण्याची जिज्ञासा नसते – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
#HHDrJayantAthavaleJanmotsav ‘साधना केल्यावर कुंडलिनी शक्ती जागृत होते. हे आतापर्यंत लाखो साधकांनी अनुभवले आहे; पण साधनेवर विश्वास नसणारे अंनिसवाले आणि बुद्धीप्रामाण्यवादी साधना न करता म्हणतील ‘कुंडलिनी दाखवा, नाहीतर ती नाहीच !’ – (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले