महाराष्ट्र से शुरू हुई ये क्रांति दिल्ली तक दस्तक देगी 🔥
वैसे भी मराठा जब भी निकले है, हर बार दिल्ली का तख्त हिला है, आरक्षण किसी की बपौती नहीं है, ये खत्म होकर रहेगा !
तर्क दिया जाता है: "आरक्षण केवल तभी समाप्त किया जा सकता है जब जाति व्यवस्था समाप्त हो जाए।"
यदि इसी तर्क को माना जाए:
★ अगर लिंग के आधार पर भेदभाव होता है, तो क्या हमें लिंग (Gender) को ही समाप्त कर देना चाहिए?
★ अगर लोग भाषा के आधार पर भेदभाव का सामना करते हैं, तो क्या हमें भाषाओं को समाप्त कर देना चाहिए?
★ अगर राज्यों के आधार पर भेदभाव होता है, तो क्या हमें राज्यों को समाप्त कर देना चाहिए?
★ अगर धार्मिक भेदभाव मौजूद है, तो क्या हमें धर्म को ही समाप्त कर देना चाहिए?
यह बुनियादी तौर पर एक त्रुटिपूर्ण तर्क है।
वास्तविक लक्ष्य लोगों को शिक्षित करना और समान व्यवहार होना चाहिए, न कि यह दिखावा करना कि पहचान को मिटा देना ही इसका समाधान है।
खुद से पूछिए: क्या आपके दोस्तों ने कभी आपकी जाति के कारण आपके साथ भेदभाव किया है? अधिकांश लोगों के लिए इसका जवाब 'नहीं' होगा।
★ क्या उन्होंने अपनी जाति मानना छोड़ दिया? नहीं।
★ क्या उनका उपनाम (सरनेम) गायब हो गया? नहीं।
★ क्या उन्होंने इसकी वजह से आपके साथ अलग व्यवहार किया? नहीं।
समस्या भेदभावपूर्ण व्यवहार है, न कि पहचान का अस्तित्व में होना।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
#educationreform#reservationreform
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If people from reserved categories are now reaching India’s highest constitutional and judicial offices, shouldn’t we review whether reservation is still serving its original purpose?
Should reservation now be abolished or limited to those who are financially weak, regardless of caste?
Poverty does not see caste. Why should poor and deserving students lose opportunities because of vote-bank politics? Every hardworking student deserves equal opportunity.
#ReservationDebate #EqualOpportunity #Merit