पे प्रोटेक्शन रिकवरी मामले में आज अधिकारियों से वार्ता कर पक्ष रखा।
निदेशक महोदय के आने के बाद पुनः उनसे वार्ता की जाएगी।
यदि बात नहीं बनती है तो सभी आंदोलन के लिए तैयार रहे।
शिक्षकों को सरकार द्वारा किसी न किसी गलत आदेश द्वारा आंदोलन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
मजबूत रहे एक रहे।
लड़ेंगे और जीतेंगे।।
जय रेसला
सादर गिरधारी गोदारा प्रदेश अध्यक्ष रेसला
मैं 2017 में उस समय YouTube पर 10 लाख (1 Million- aap hi bio mai million ka aura dekha) लोगों को जोड़कर बैठा था, जब न Reels थीं, न Shorts थे और न ही Jio का आज जैसा विस्तार था।
उस समय लोगों को जोड़ने का एक ही तरीका था -विषय पर पकड़, पढ़ाने की क्षमता और छात्रों का विश्वास।
शिक्षक का मूल्यांकन पत्रकार से नहीं, लाखों छात्रों के परिणामों से होता है।
पत्रकारिता बची है नहीं, देश की जनता कर रही है इसका फैसला।
पेपर लीक, बेरोज़गारी और भर्ती घोटालों पर सवाल पूछने वाले शिक्षक आपको तमाशेबाज दिख रहे हैं।
एक आदर्श शिक्षा व्यवस्था वाले देश-समाज में कोचिंग या प्राइवेट ट्यूशन जैसी चीजों का अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए। बिल्कुल सही बात है -नहीं होनी चाहिए।
भारत में भी नहीं होनी चाहिए।
लेकिन अब जरा उलटा सोचिए कि देश में कितना बड़ा कोचिंग उद्योग खड़ा हो चुका है। कुछ कोचिंग संस्थान तो यूनिकॉर्न तक बन चुके हैं।
अब इसी अनुपात में अंदाजा लगाइए कि भारत की शिक्षा व्यवस्था कितनी रसातल में जा चुकी है।
और शिक्षा व्यवस्था के इतने खराब हाल होने के पीछे कौन जिम्मेदार है? सरकार।
और सरकार से इस बात की जवाबदेही सुनिश्चित करने, सही सवाल पूछने का काम मीडिया जैसे बड़े तंत्र का भी है।
लेकिन क्या मीडिया संस्थान अपनी ईमानदारी से काम कर रहे हैं?
असल में मीडिया खुद भी भयानक पतन का शिकार हो चुका है। उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची।
स्टार ऐंकर इस पूरे पतन की अगुवाई करते नजर आए।
पत्रकारिता में एक वैक्यूम बना।और इस वैक्यूम को अब डिजिटल बोर्ड पर कलम चलाता हुआ YouTube टीचर explainer वीडियो बनाकर भरने लगा है।
अभी जो इस विषय पर इतनी बहस चल रही इसके केंद्र में यही बात है।
17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने जिस तरह से CBSE बोर्ड परीक्षाओं में On Screen Marking System (OSM) के tender documents और RFP (Request for Proposal) को पढ़कर बिंदुवार सवाल उठाए हैं, वो काबिले-तारीफ है।
सिद्धांत ने पुराने और नए RFP की तुलना की, clauses पढ़े, discrepancies निकालीं और सार्वजनिक रूप से CBSE की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
उसने सिर्फ आरोप नहीं लगाए, बल्कि दस्तावेजों की तुलना करके एक pattern समझाने की कोशिश की।
जिस दिशा में उसने बिंदु उठाए हैं, उससे साफ लगता है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ तो ऐसा हुआ है, जो सही नहीं था।
कम-से-कम CBSE की तरफ से इस बच्चे द्वारा उठाए गए बिंदुओं का जवाब भी उतने ही पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए।
सार्थक सिद्धांत की सूझबूझ, presence of mind और गंभीरता की खूब सराहना की जानी चाहिए।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
अंजना जी YouTube टीचर्स पर भड़की हुई हैं।
उनके हिसाब से ये लोग बोर्ड लेकर explainer वीडियो बनाते हैं...और views भी ले जाते हैं।
भारत में इस विषय पर कोई और बोले, तो एक बार को समझ भी आता है… लेकिन टीवी मीडिया वाले, जो हर शाम स्टूडियो में मुर्गा लड़ाई करवाकर जरूरी मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं, और उसके बाद आधा समय सीमा-सचिन करते रहते हैं -वो ऐसी बात बोलें तो बात थोड़ी हजम नहीं होती।
देश की सबसे निकृष्ट और गैर-जवाबदेह संस्थाओं में अगर किसी का नाम लिया जाएगा, तो उसमें टीवी न्यूज मीडिया जरूर होगा।
टीचर news explainer वीडियो बना रहा है और उसमें views भी मिल जा रहे हैं -देश में mainstream पत्रकारिता के बुरे हाल का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है।
प्रशासनिक सुस्ती और बहानेबाज़ी अब और बर्दाश्त नहीं! ❌ जब सब कुछ तैयार है, तो सारे रिजल्ट्स पर ताला क्यों?
@dsssbofficial सभी TGT विषयों का परिणाम जारी करो, युवाओं के सब्र का इम्तिहान मत लो! 😡🔥
#releasetgtresults@Dir_Education
🚨 DSSSB TGT Results Latest Update
Total Post Codes: 06 (2025 Exams)
✅ Marks Released: 804/24
✅ Marks likely to be released by 01 June 2026: 803/24, 805/24, 806/24, 807/24
✅ 808/24 marks likely to be released by 08 June 2026.
@LtGovDelhi@LokNiwasDelhi
जो भी मजबूर, असहाय और व्यवस्था के सताए लोगों की निंदा कर रहे हैं, इसे भी इतिहास में लिखा जाएगा...और एक दिन आएगा जब आपको या आपकी किसी पीढ़ी को आपके इस वक्तव्य के लिए अफसोस होगा...लिख कर रख लीजिए...
कुमार विश्वास आप तो एक धार्मिक कथावाचक है, और आपके लिए कॉकरोच भी ईश्वर की बनाई इस सृष्टि का हिस्सा होना चाहिए था...आपको तो समभाव ही रखना था...आप क्यों बहक गए...आश्चर्य कि आपने यह तक समझने का प्रयास नहीं किया कि किसने किसे कॉकरोच कहा है...!!
आप जैसे लोगों के कारण त्याज्य तो शबरी और अहिल्या भी थी @DrKumarVishwas पर राम ने उन्हें सम्मान दिया, आपने राम की केवल कथा कही पैसे के लिए उन्हें आचरण में नहीं उतार पाए |
सच तो ये है कि,
जिस दिन अमेरिका में रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाया था, तेल के दाम की ऐसी तैसी वहीं हो गई थी।
क्योंकि रूस हमे डिस्काउंट भी देता था, और नजदीक भी है,
इसी वजह से कच्चा तेल सस्ता पड़ रहा था,
लेकिन अब वेनेजुएला से तेल लेना मंहगा भी है, और दूर भी है।
सबसे ज्यादा डैमेज अमेरिका ने किया है भारत को। यही सच है।
विपक्ष नकारा हो तो सत्ता पक्ष आजाद रहता है -
1- गैस के दाम 993 रुपए बढ़े
2-छोटू सिलेंडर 261 रुपए बढ़ा
3- पेट्रोल डीजल के दाम बढ़े
4- सीएनजी के दाम बढ़े
5- सोना चांदी बढ़ा
6- डॉलर के मुकाबले रुपया गिरा
लेकिन फिर भी विपक्ष दबाव नहीं डाल पाया, इससे घटिया विपक्ष आज तक नहीं देखा।
उनका नाम राघव चड्डा है सर 😂 डरो मत बेहिचक लीजिए नाम सर
पर वह तो बोल रहे थे उधर हमे बोलने से रोक जा रहा इसलिए हम इधर आ गए है
लगता है इधर वालो ने मुँह में फ़ेविकोल डाल के बंद कर दिया है😂