Beef mixing with mutton in Hyderabad hotels.
Mohammad Osman and Mohammad Jahangir arrested in Mallepally, Hyderabad for mixing beef with mutton and supplying to restaurants.
🚩 A significant victory for the persistent efforts of Maharashtra Mandir Mahasangh!
The Revenue Minister has directed the District Collector to conduct a thorough investigation into the alleged 4,000-acre land scam involving the Shri Tulja Bhavani Temple.
🚩 महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के सतत प्रयासों को बड़ी सफलता!
राजस्व मंत्री ने श्री तुलजा भवानी मंदिर से जुड़ी कथित 4,000 एकड़ भूमि घोटाले की गहन जांच के लिए जिला कलेक्टर को निर्देश दिए हैं।
@mandirmahasangh@punarutthana
ऑस्ट्रिया में बुर्का पहनने के लिए एक महिला पर जुर्माना।
ऑस्ट्रिया के चेहरा ढंकने पर रोक लगाने वाले कानून (Anti-Face Covering Act) के तहत सार्वजनिक जगह पर बुर्का पहनने के लिए महिला पर जुर्माना लगाया गया।
ऑस्ट्रिया ने सार्वजनिक जगहों पर बुर्का, नकाब या हिजाब पहनने पर रोक लगा दी है और ऐसा करने पर €150 तक का जुर्माना हो सकता है।
श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थानचा १३ कोटींचा निधी नगरपालिकेकडे वर्ग करण्याचा निर्णय म्हणजे सर्वोच्च न्यायालयाच्या आदेशांचे आणि 'Doctrine of Cy-pres' चे थेट उल्लंघन आहे! भाविकांचा पैसा केवळ मंदिरासाठीच वापरला गेला पाहिजे. या बेकायदेशीर ठरावाची तात्काळ चौकशी व्हावी.
@CMOMaharashtra@CollectorNashik @Ch_Commissioner @SakalHinduSamaj #Trimbakeshwar #SaveTemples #MandirFundsForMandirs #Nashik
🚩 हिंदु जनजागृती समिती आणि हिंदु राष्ट्र सेना यांच्या सातत्यपूर्ण पाठपुराव्याला मोठे यश!
सोलापूर मनपा आयुक्तांच्या कारवाईनंतर आता राज्य सरकारही ॲक्शन मोडमध्ये! सोलापूर येथील कथित अनधिकृत चर्च आणि मनपा सेवकाच्या गैरकृत्यांची चौकशी होणार.
सत्य, न्याय आणि कायद्याचे राज्य प्रस्थापित करण्यासाठी हा महत्त्वाचा टप्पा! 💪🚩
#Solapur #Maharashtra #HinduJanajagrutiSamiti #HinduRashtraSena #Justice #RuleOfLaw
@HinduJagrutiOrg@ShefVaidya@amitsurg
मोहर्रम के जुलूस में हिंदुओं को धमकी ।
ये मोहर्रम का मातम मनाया जा रहा है या हिंदुओं को डराया जा रहा है।
त्योहार के नाम पर देश के पीएम को धमकी दी जा रही है।
भारत के झंडे में लिपटे हुए आदमी को फाँसी पर लटकाकर क्या संदेश देने की कोशिश कर रही है ये कौम।
Food safety is non-negotiable.
This is about protecting every citizen’s right to safe food and ensuring that honest food businesses are not undercut by those who violate the law.
#TukaramMundhe#Inspiration#Leadership#FDA#FoodSafety
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Leadership is not about managing the https://t.co/JeDEuq8f5c is about creating systems that leave future generations healthier, safer, and stronger than we found them .
#TukaramMundhe#Leadership#FDA
शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक बल बढ़ाने वाला..... @HinduJagrutiOrg द्वारा आयोजित निशुल्क साप्ताहिक स्वरक्षा प्रशिक्षण वर्ग.....
आइए और सीखे.…
🚩 धर्म का ज्ञान
🧘आध्यात्मिक बल बढ़ाने की पद्धति
🤺 स्वरक्षा हेतु लाठी, कराटे एवं नानचाकू जैसी कला
@Ramesh_hjs#IndiaRisingWithAdani
“मी नाही, तर मग कोण?”
"नैतिकता Showpiece नाही, पाया आहे. आणि पाया प्रशंसनीय म्हणून बांधला जात नाही — त्यावर उभे राहण्यासाठी, त्यावर समाज बांधण्यासाठी बांधला जातो."
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#IAS#IPS#Minister@Tukaram_IndIAS
महाराष्ट्रातील बाकीच्या IAS IPS किंवा जेवढे पण सरकारी अधिकारी असतील त्यांना विनंती आहे की, आपले पोट भरले असतील तर थोड तरी काम करा, तुकाराम मुंढे साहेबांऐवढं नाही पण 10 % तरी काम करा. म्हणजे भ्रष्टाचाराला आळा बसेल. व जनतेचा विश्वास संपादन होईल.
2014 नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह क़ा यह दृश्य जहाँ उद्धव ठाकरे को अग्रिम पंक्ति में, सीधे तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बगल में बैठाया गया था।
यह स्थान उस अटूट और नैसर्गिक 'हिंदुत्व गठबंधन' को दिया गया सर्वोच्च सम्मान था, जिसकी नींव बालासाहेब ठाकरे और प्रमोद महाजन ने रखी थी।
परंतु, नियति का क्रूर मज़ाक देखिए जिस नेता को कभी दिल्ली के सबसे शक्तिशाली मंचों पर पलक-पावड़े बिछाकर सम्मान मिलता था,
उसने सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी और अति-महत्वाकांक्षी 'पुत्र-मोह' के चक्कर में उस सम्मान को धूल में मिला दिया।
विरासत में पिता की संपत्ति मिल सकती है ।
बाप के कद की आड़ मिल सकती है, उनकी पहुँच का फायदा मिल सकता है लेकिन पिता का कद नहीं मिल सकता।
बस उद्भव ठाकरे ये बात नहीं जानते थे। वो खुद को बाल केशव ठाकरे पार्ट-2 समझने लगे थे। और यहीं से वो अपना आगे का रास्ता भूल गए।
उद्भव भूल गए कि हर दौर अलग होता है बाला साहेब ठाकरे का भी एक दौर था इक समय था,
जब वो बीजेपी का 'कमलाबाई, कहकर मजाक उड़ा लिया करते थे और बीजेपी भी नजरअंदाज कर दिया करती थी।
हर समय की अपनी जरूरत होती है। 80 के दशक में जन्मी BJP और 1966 में अस्तित्व में आई शिवसेना ने एक दूसरे की जरूरत को समझा और 1995 में आपस में गठबंधन करके महाराष्ट्र में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई और चलाई भी।
आगे भी शिवसेना को अपने साथ बनाये रखने के लिए बीजेपी ने हर प्रकार से हर बार बड़ा दिल दिखाया।
लेकिन जब बड़ा दिल दिखाने की बारी उद्भव ठाकरे की आई तो उन्होंने नैतिकता को ताक पर रखकर राजनैतिक विचारधारा से हर तरह से समझौता करके दगाबाजी का दामन थाम लिया।
महाराष्ट्र और देश में बढ़ते बीजेपी के कद को उद्भव की शिवसेना स्वीकार ही नहीं कर पाई और अपनी ही अकड़ में बनी रही।
वर्त्तमान समय मे शिवसेना की जो मिट्टी पलीत हुई है उसके पीछे अगर कोई है तो वो उद्भव ठाकरे खुद हैं उनकी खुद की राजनैतिक नासमझी, अदूरदर्शिता,हठधर्मिता और मूर्खता है।
2019 के विधानसभा चुनाव जनता ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन के नाम पर जिताए थे। लेकिन मुख्यमंत्री पद के तीव्र आकर्षण में उद्धव ठाकरे ने जनादेश की पीठ में छुरा घोंप दिया।
जिन कांग्रेस और शरद पवार के खिलाफ शिवसेना ने जीवनभर संघर्ष किया, जिनके वैचारिक विरोध पर बालासाहेब ठाकरे ने अपनी पूरी राजनीति खड़ी की, उन्हीं के चरणों में मातोश्री का स्वाभिमान गिरवी रख दिया गया।
राजनीति में अवसरवाद तो देखा गया था, लेकिन ऐसा वैचारिक आत्मसमर्पण (Ideological Capitulation) विरला ही था, जहां खुद को 'हिंदू हृदय सम्राट' के वारिस कहने वाले, हिंदुत्व के विरोधी खेमे में जाकर बैठ गए।
उद्धव ठाकरे की सबसे बड़ी विफलता यह रही कि उन्होंने ज़मीनी, कड़क और वफादार शिवसैनिकों (जैसे एकनाथ शिंदे और उनके सहयोगी) की आवाज़ को अनसुना कर दिया।
इसके बजाय, उन्होंने अपनी कोर-कमेटी में ऐसे बड़बोले प्रवक्ताओं को जगह दी, जिनका काम सिर्फ सुबह-शाम मीडिया के सामने आकर ज़हर उगलना और गठबंधन सहयोगियों को अपमानित करना रह गया था। नतीजा क्या हुआ?
करनी-धरनी का हिसाब.✍️✍️
प्रकृति और राजनीति, दोनों ही कभी अपना कर्ज बाकी नहीं रखतीं।
उद्धव ठाकरे ने जो बोया था, वही काटा… पुत्र-मोह और सत्ता की हवस ने न केवल उनसे मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनी, बल्कि उस गौरवशाली राजनीतिक विरासत को भी खंडहर बना दिया जिसे बनाने में दशकों लगे थे। यह भारतीय राजनीति का वह सबक है, जो याद दिलाता है कि अहंकार और अवसरवाद का अंत हमेशा पतन ही होता है।
🚩 A strong resolve was expressed at the 'Devasthan Bhumi Sanrakshan Parishad' to intensify the fight against the Government control of temples and encroachments by the #Waqf Board!
"There is an urgent need for a stringent Anti-Land Grabbing Law against those who illegally seize temple lands," said Mr. Sunil Ghanwat, National Organiser of the Mandir Mahasangh.
🛕✊ Only if temple lands are protected can temples remain secure!
#SaveTempleLands #TempleFreedom #AntiLandGrabbingLaw #HinduUnity
@HinduJagrutiOrg@mandirmahasangh@amitsurg@Ramesh_hjs