असम के लिए प्रार्थना
असम की भीषण बाढ़ ने दिल दहला दिया है चारों ओर तबाही का मंजर जो देखकर हर एक के आंख में आंसू आ जाएगा
भगवान, सभी की रक्षा करें और जल्द राहत दें 🙏
@dpradhanbjp@RahulGandhi@INCIndia Abe chor aur ghuskhor itne din se kya kar raha tha 4 mahine baad tujhe yaad aaya student ke baare me .chor tum log desh ko bech daloge .par Aisa hoga nahi tumko juto ki Mala pehnaye jayegi
ये मुल्ली आखिर हमारे भगवान का
मीम बनाकर कैसे धार्मिक सद्भाव बिगाड़ रही...
अभी कोई अल्ला मुहम्मद पैग़म्बर को उठा लेगा
तो इन्हीं चुल्लों की गांव में आग लग जायेगी...
थू है उन हिज़ड़े हिन्दुओं पर जो वहां खड़े होकर
अपने ही धर्म का मज़ाक़ बनवाकर राजनीति का शिकार बन रहे ✍️
⚠️ सावधान! देश को गुमराह करने की साजिश
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के नाम पर इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर चेहरे ढककर खुद को सेना का जवान/अफसर बताने वाले वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं। इनका मकसद जंतर-मंतर पर मौजूद और देश भर के युवाओं को भड़काना है।
भारतीय सेना का कोई भी अनुशासित जवान या अधिकारी सोशल मीडिया (Instagram आदि) पर आकर इस तरह का कोई बयान या अपील जारी नहीं करता।
माननीय थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ जी से विनम्र अपील है कि एक प्रेस रिलीज (Press Release) जारी कर देश की जनता को जागरूक करें और इस झूठ को बेनकाब करें।
CC: @adgpi@DefenceMinIndia@IAF_MCC@indiannavy@PIB_India
#JantarMantar #IndianArmy #FakeNewsAlert #FactCheck #StayAware
@GautamGambhir@harbhajan_singh@GautamGambhir kuch saram baki hai to coach ka pad chod dijiye maharaj kyu bachi kuchi ijjaat gava rahe hai apni England se white wash chee saram karo chullu bhar Pani me dub maro
मैं इटली में शरिया कानून लाने की
सोच रखने वालों की छाती पर आग के गोले फोड़ दूंगी
मैं जोर्जीया मैलोनी हूँ.. मैं इटली की बेटी हूँ
यहाँ इस्लामिक कानून नहीं चलने दूंगी 🔥
इस दो मासूम लड़कियों को आप देख रहे हैं ना।
इनकी जान तीन दिन पहले पूर्णिया के भाजपा नेता ने अपने फॉर्च्यूनर से ले ली। यह दोनों लड़कियाँ मुजफ्फरपुर के गरहा के रहने वाली हैं। ये दोनों लड़कियाँ स्कूटी से घर जा रही थीं तभी ओवर स्पीड फॉर्च्यूनर ने इन्हें रौंद दिया। अपने रसूख का फायदा उठाकर भाजपा नेता बच निकले और अब अपनी गाड़ी भी टो करके ले गए। पर कोई इन मासूम लड़कियों को माता पिता को न्याय दिलवाने के लिए आवाज नहीं उठाया। इस देश में ग़रीब परिवार को कभी न्याय नहीं मिलता है। यह करवा सच है। नयायपालिका सिर्फ़ अमीरों के हित के हिसाब से न्याय करती है।
पिछले साल Jio ने लगभग ₹26,000 करोड़ का Net Profit कमाया, जबकि Airtel का Net Profit करीब ₹34,000 करोड़ रहा।
उससे एक साल पहले भी दोनों कंपनियों ने मिलकर ₹63,000 करोड़ से ज़्यादा का Net Profit कमाया था।
यानी सिर्फ़ 2 साल में इनका कुल Net Profit ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक रहा।
इसके बावजूद reports हैं कि Jio और Airtel अपने Recharge Plans की कीमतें फिर से 10–20% तक बढ़ाने की तैयारी में हैं, जबकि पिछले साल भी Tariff Hike किया गया था।
सरकार और TRAI को अब जागना चाहिए।
यह संगठित लूट धीरे धीरे बढ़ता जा रहा है। 🤷🏻♂️
@IndianOilcl Bhai hamari bike passion pro b6 jo pehle 60ya 65 ki average de rahi thi ab Sala 45 ya 50 ki de rahi hai . Gajab ke topibaaz neta hai hamre desh me
@oprajbhar Dusre ko gyan mat dijiye aapne jaunpur dulha hatayakand me bhole rajabhar jo ki ek inamiya apradhi tha 20 se jada mukadame draj hai uske naam pe .kis tareh aapne bachaya hai use sab jante hai aur badi chalaki se court me serendar karwa diya . Iska paridam chunav me milega
Seam XVIII inspired by the iconic seam of the ball, an inheritance reimagined.
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इनका नाम अतुल सुभाष था।
34 साल। बेंगलुरु में प्राइवेट कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर। एक बेटे के पिता व्योम।
उन्होंने सिस्टम से उम्मीद नहीं की कि कोई उनकी बात सुनेगा।
उन्होंने हर चीज़ खुद रिकॉर्ड की।
उन पर एक साथ 9 केस दर्ज हुए 498A, घरेलू हिंसा, मेंटेनेंस, कस्टडी।
हर सुनवाई के लिए उन्हें बेंगलुरु से जौनपुर तक 1700 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था।
4 साल में 40 बार वही सफर।
120 कोर्ट हियरिंग्स।
उन्होंने आरोप लगाया कि केस वापस लेने के लिए 3 करोड़ रुपये मांगे गए।
अपने ही बेटे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये अलग से।
अपने वीडियो में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक फैमिली कोर्ट जज ने अनुकूल आदेश के लिए 5 लाख रुपये मांगे।
9 दिसंबर 2024 को उन्होंने बेंगलुरु के फ्लैट में आत्महत्या कर ली।
पीछे छोड़ा — 24 पन्नों का नोट और 81 मिनट का वीडियो।
हर तारीख। हर केस नंबर। हर यात्रा। हर रकम।
सब कुछ रिकॉर्ड किया हुआ।
मरने से पहले उन्होंने अपने परिवार से सिर्फ एक बात कही:
“मेरी अस्थियाँ गंगा में तब तक विसर्जित मत करना, जब तक न्याय न मिले।”
उनकी मां सुप्रीम कोर्ट गईं, अपने पोते से मिलने की अनुमति मांगने।
उन्हें कहा गया — “आप बच्चे के लिए stranger हैं।”
फिर सुनवाई आई।
जज छुट्टी पर थे।
एक साल की तारीख मिल गई।
इसी बीच, ट्विशा शर्मा केस में सिर्फ 11 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
बार काउंसिल ने घंटों में कार्रवाई कर दी।
AIIMS की मेडिकल टीम चार्टर्ड प्लेन से भेजी गई।
11 दिन में पूरा सिस्टम दौड़ पड़ा।
अतुल सुभाष 81 मिनट का रिकॉर्डेड सबूत छोड़ गए थे।
उन्हें मिला एक साल का इंतज़ार।
उनकी अस्थियाँ आज भी गंगा का इंतज़ार कर रही हैं।
उनका बेटा व्योम अब 6 साल का है।
अतुल सुभाष को न्याय मिलना चाहिए।
अगर रिकॉर्डेड सबूत, दस्तावेज़ और एक इंसान की आखिरी पुकार भी सिस्टम को नहीं जगा सकती, तो फिर आम आदमी आखिर जाए कहाँ?