अनुवादित कर खग भाषा में
व्यथित हृदय की हूक,
करुण राग में सुना रही है
कोयल अपनी कूक।
अरे!ध्यान आकृष्ट करो मत
सुख विलास की ओर
शान्त हृदय में कहीं चाह की
उठ न जाये हिलोर।
आधि व्याधि संगिनी
हमारी स्वतंत्रता ही साध्य,
इस जीवन में रहे एक
बस मातृभूमि आराध्य।
शुभ संध्या।