जो बड़ा सोच सकें।दक्षिण के नायक पुराने अमिताभ बच्चन की याद दिलाते हैं जो पड़े पर्दे पर महानायक दिखता है,जिसकी entry पर जनता तालियाँ बजाती है।पार्टियों में व्यस्त बॉलीवुड के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती है।इसके बाद ना विज्ञापन मिलेंगे ना बड़ी गाड़ियाँ बचेंगी।
बाहुबली,पुष्पा,RRR,KGF की सफलता ने बंबई के हिंदी फ़िल्म उद्योग को बहुत ���ोटा बना दिया है।दक्षिण की इन फ़िल्मों से HERO की वापसी हुई है।Loverboys और मसखरों से भरे बॉलीवुड में असली नायक ना के बराबर हैं।हिंदी सिनेमा का Talent सूख रहा है।उनके पास ना नायक हैं,ना निर्देशक और ना लेखक…