राष्ट्र सर्वोपरि।
सत्य ही शिव है। शिव ही सुन्दर है
कलियुग के दोषों को हरने का महामंत्र
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
माता-पिता का सम्मान और गुरु-भगवान के प्रति श्रद्धा जीवन को सही दिशा देने वाली अमूल्य साधना है। ऐसी कृपा से बुद्धि शुद्ध होती है और मनुष्य अपने कर्मों का विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम बनता है। 🙏 #AsharamjiBapu
माता पिता को प्रणाम करना, उनका आशीर्वाद होता है तो बुद्धि शुद्ध होती। कोई देवता हमारा हाथ पकड़कर स्वर्ग में नही ले जाएगा, कोई दैत्य हमारा गला पकड़कर नर्क में नही डुबोएगा। जब माता - पिता, गुरु की, भगवान की कृपा होती है तो बुद्धि शुद्ध होती है।
#AsharamjiBapu
@Asharamjibapu__ माता-पिता और गुरु के चरणों में श्रद्धापूर्वक प्रणाम करने से संस्कार और विवेक जागते हैं। जब जीवन में माता-पिता, गुरु एवं भगवान की कृपा का भाव होता है, तब बुद्धि निर्मल होकर सही मार्ग दिखाती है। 🙏 #AsharamjiBapu
माता पिता को प्रणाम करना, उनका आशीर्वाद होता है तो बुद्धि शुद्ध होती। कोई देवता हमारा हाथ पकड़कर स्वर्ग में नही ले जाएगा, कोई दैत्य हमारा गला पकड़कर नर्क में नही डुबोएगा। जब माता - पिता, गुरु की, भगवान की कृपा होती है तो बुद्धि शुद्ध होती है।
#AsharamjiBapu
Intellectuals Say कि न्याय में देरी से जुड़े प्रश्नों पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। पूज्य बापूजी के उपचार और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा हो, प्रत्येक पक्ष को सुना जाए और कानून के अनुरूप शीघ्र निर्णय की दिशा बने। #VoiceForJustice
@jagohindustani_ किसी भी न्यायिक प्रकरण में अंतिम सत्य का आधार निष्पक्ष जाँच, प्रमाण और कानून होता है। Intellectuals Say कि पूज्य बापूजी के मामले में भी उपलब्ध तथ्यों की पुनर्समीक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मानवीय दृष्टिकोण पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। #VoiceForJustice
SC के एडवोकेट D K Dubey कहते हैं कि वर्ष 2013 में इंडियन पीनल कोड (IPC) का संशोधन कर Asaram Bapu Case में कानून का दुरूपयोग हुआ है यद्यपि मेडिकल में कुछ नहीं है। उनका बिल्कुल साफ मानना है कि इसमें गहन इन्वेस्टिगेशन होना चाहिए।
Intellectuals Say Facts & raise #VoiceForJustice .
ईश्वर ने मनुष्य को भय और बंधन में जीने के लिए नहीं, बल्कि प्रेममय जीवन जीने के लिए यह सुंदर सृष्टि दी है। हृदय में ईश्वर-प्रेम जागे तो जीवन सेवा, करुणा, आनंद और आत्मीयता से भर जाता है। 🙏
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ सृष्टि का उद्देश्य केवल बंधनों में जीना नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और आत्मीयता को जीवन में उतारना है। जब हृदय में ईश्वर-प्रेम जागता है, तब जीवन की हर परिस्थिति में आनंद और अपनापन अनुभव होने लगता है। 🙏
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
शरीर की बीमारी, मन का दुःख और चित्त की चिंता—ये सभी परिवर्तनशील अवस्थाएँ हैं। इनके साक्षी हम हैं, स्वयं ये अवस्थाएँ नहीं। अपने ज्ञानस्वरूप आत्मा को पहचानने पर भीतर की शांति और स्थिरता का अनुभव होता है। 🙏
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
शरीर को बीमारी होती है अज्ञानतावश बोलते हैं मैं बीमार हूँ। मन को दुःख होता है बोलते हैं मैं दु:खी हूँ। चित में चिंता होती है बोले मैं चिंता में हूँ। तुम बीमारी को देखते हो, बीमारी नहीं थी तब भी तुम थे, बीमारी चली जाती है,तुम रहते हो। तुम ज्ञानस्वरूप आत्मा हो।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ बहुत गहरी आत्मज्ञान की बात 🙏 शरीर, मन और चित्त की अवस्थाएँ बदलती रहती हैं, लेकिन साक्षी आत्मा सदा एकरस रहती है। स्वयं को इन बदलती परिस्थितियों से अलग जानना ही वास्तविक शांति की ओर कदम है।
Sant Shri Asharamji Bapu
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शरीर को बीमारी होती है अज्ञानतावश बोलते हैं मैं बीमार हूँ। मन को दुःख होता है बोलते हैं मैं दु:खी हूँ। चित में चिंता होती है बोले मैं चिंता में हूँ। तुम बीमारी को देखते हो, बीमारी नहीं थी तब भी तुम थे, बीमारी चली जाती है,तुम रहते हो। तुम ज्ञानस्वरूप आत्मा हो।
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@AzaadBharatOrg केदारेश्वर गुफा मंदिर की यह मान्यता सचमुच अद्भुत है। चार स्तंभों को चार युगों का प्रतीक मानना सनातन दर्शन के कालचक्र और युग-परिवर्तन की गहरी अवधारणा की ओर ध्यान खींचता है। हर हर महादेव! 🙏🔱
केदारेश्वर गुफा मंदिर के बारे में मान्यता है कि चार युगों के प्रतीक चार स्तंभों में अंतिम स्तंभ के गिरने पर प्रलय आएगा। प्रमाण इसे निश्चित भविष्यवाणी नहीं मानते, फिर भी यह कथा आस्था, कालचक्र और सनातन दर्शन पर सोचने को विवश करती है। पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻
https://t.co/184HdI9ai8
मौन साधना मन को भीतर की ओर ले जाती है। नियम छोटा हो, पर संकल्प अटूट हो—यही साधक की शक्ति है। नियमित मौन से एकाग्रता बढ़ती है और मन पर अपना अधिकार मजबूत होता है। 🙏
#AsharamjiBapu
मौन वाणी की रक्षा करता है। वाणी बोलने से प्राणों की गति तीव्र होती है, तो एकाग्रता में बाधा पड़ती है । साधक के जीवन में थोड़ा बहुत नियम लाना चाहिए। हफ्ता में दो दिन, एक दिन, नहीं तो हर रोज एक दो घंटा मौन का अभ्यास करे, कि इतने बजे से इतने बजे तक नहीं बोलूंगा। एक बार आपने जो नियम लिया , भले छोटा सा नियम लो, लेकिन उस नियम को पालने में पूरे तत्पर रहोगे तो आपकी मन:शक्ति और तप शक्ति बढ़ जाएगी। नियम ले ले और फिर ना कर सके तो मन कमजोर हो जाता है कि अपने तो नहीं कर सकते। छोटा सा नियम ले चाहे 15 मिनट मौन रखने का नियम ले वो अगर डटा रहेगा 9:00 बजे से सवा 9 बजे तक या सुबह 7 से 7:30 तक आधा घंटे का मौन रखेंगे। आधा घंटा चाहे कुछ भी हो जाए मौन रखेंगे। विघ्न बाधाओं को चीर कर अगर आप सफल होते जाएंगे, तो आप एक बात में सफल हुए तो दूसरी बात में भी आप मन को चला सकेंगे। अब एक बात कर दिया कि छ: दिन तक नहीं बोलूंगा और फिर बोल दिया कि बस कोई गड़बड़ हुआ, मौन खोल के झगड़ा कर दिया, फिर मौन रख लिया। नहीं सगवड़िया मौन नहीं। ऐसे लोग कंगाल रह जाते हैं। मौन माने मौन, तितिक्षा माने तितिक्षा।
#AsharamjiBapu
@Asharamjibapu__ मौन केवल वाणी को रोकना नहीं, बल्कि मन और प्राणशक्ति को संयमित करने का सुंदर अभ्यास है। छोटे-से नियम को दृढ़ता से निभाने से आत्मविश्वास, मनःशक्ति और तपशक्ति बढ़ती है। 🙏
#AsharamjiBapu
मौन वाणी की रक्षा करता है। वाणी बोलने से प्राणों की गति तीव्र होती है, तो एकाग्रता में बाधा पड़ती है । साधक के जीवन में थोड़ा बहुत नियम लाना चाहिए। हफ्ता में दो दिन, एक दिन, नहीं तो हर रोज एक दो घंटा मौन का अभ्यास करे, कि इतने बजे से इतने बजे तक नहीं बोलूंगा। एक बार आपने जो नियम लिया , भले छोटा सा नियम लो, लेकिन उस नियम को पालने में पूरे तत्पर रहोगे तो आपकी मन:शक्ति और तप शक्ति बढ़ जाएगी। नियम ले ले और फिर ना कर सके तो मन कमजोर हो जाता है कि अपने तो नहीं कर सकते। छोटा सा नियम ले चाहे 15 मिनट मौन रखने का नियम ले वो अगर डटा रहेगा 9:00 बजे से सवा 9 बजे तक या सुबह 7 से 7:30 तक आधा घंटे का मौन रखेंगे। आधा घंटा चाहे कुछ भी हो जाए मौन रखेंगे। विघ्न बाधाओं को चीर कर अगर आप सफल होते जाएंगे, तो आप एक बात में सफल हुए तो दूसरी बात में भी आप मन को चला सकेंगे। अब एक बात कर दिया कि छ: दिन तक नहीं बोलूंगा और फिर बोल दिया कि बस कोई गड़बड़ हुआ, मौन खोल के झगड़ा कर दिया, फिर मौन रख लिया। नहीं सगवड़िया मौन नहीं। ऐसे लोग कंगाल रह जाते हैं। मौन माने मौन, तितिक्षा माने तितिक्षा।
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हर जीव और हर वस्तु में उसी परमात्म-सत्ता का दर्शन हो जाए तो मन किसी से द्वेष नहीं करता और किसी में पराया भाव नहीं देखता। दृष्टि व्यापक होते ही जीवन की अनेक उलझनें स्वयं छोटी लगने लगती हैं।
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes�
"प्रत्येक व्यक्ति, वस्तु की गहराई में वही परमात्म-सत्ता है ऐसी समझ रखोगे तो फिर कौन अच्छा, कौन बुरा? किससे राग होगा, किससे द्वेष रहेगा? बस अपनी दृष्टि व्यापक कर दो फिर देखो समस्याएँ कहाँ रहती हैं? ... 'जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि ।
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ जब दृष्टि में परमात्मभाव जागता है, तब भेदभाव, राग-द्वेष और संकीर्णता स्वतः मिटने लगते हैं। व्यापक दृष्टि जीवन में समता, प्रेम और शांति का प्रकाश भर देती है। 🙏
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
"प्रत्येक व्यक्ति, वस्तु की गहराई में वही परमात्म-सत्ता है ऐसी समझ रखोगे तो फिर कौन अच्छा, कौन बुरा? किससे राग होगा, किससे द्वेष रहेगा? बस अपनी दृष्टि व्यापक कर दो फिर देखो समस्याएँ कहाँ रहती हैं? ... 'जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि ।
#AsharamjiBapuQuotes