महान ऋषि विश्रवा का पुत्र रावण अहंकारी था। कई कमियां थी। पर वो ‘ख़िलजी’ नहीं था।
रावण विद्वान और महाज्ञानी पंडित था जिसकी वेद-शास्त्रों पर पकड़ थी, भोलेनाथ का महान भक्त था जिसने शिव तांडव स्त्रोत की रचना की।
इसी वजह से प्रभु राम ने लक्ष्मण को उससे शिक्षा लेने आखिरी समय भेजा था।
अपने शीषों को काटकर भगवान शिव की पूजा करने वाला रावण बिना त्रिपुंद्र तिलक लगाये कुछ कार्य नहीं करता था। सैफ़ अली ख़ान इस फ़िल्म में रावण तो नहीं, हाँ मगर हज़ारो हिंदुओं को क़त्ल करने वाला मुग़ल भगोड़ा तैमूर ज़रूर लग रहे हैं।
बताया जाता है, कि अजमेर में शुक्रवार के दिन करीब 15 हजार हिन्दू जाते थे... लेकिन 'चिश्तियों' के सर जुदा वाले बयान के बाद 10 हिन्दू भी नही जा रहे है...
जो नही गये उन सभी भाईयों बहनो को दिल से नमन ...🙏
तसलीम रहमानी टीवी की बहस में ससम्मान वापस आ गए हैं और नूपुर शर्मा को अपनी जान बचाते गुमनामी में रहना पड़ रहा है। यही इस देश में स्थापित किया गया #FraudSecularism है।