बीस वर्ष की आयु में व्यक्ति का जो चेहरा रहता है, वह प्रकृति की देन है, तीस वर्ष की आयु का चेहरा जिंदगी के उतार-चढ़ाव की देन है लेकिन पचास वर्ष की आयु का चेहरा व्यक्ति की अपनी कमाई है।
~ अष्टावक्र
तुम्हें पता है न कि मैं तुम्हारा हूँ....
भले ही तुम्हारे हाथ में मेरे नाम की हिना नहीं,
मुझे अभी दूर तक चलना है मगर तुम्हारे बिना नहीं
आओ बताऊँ तुम्हें कि कितना प्यार है मुझे तुमसे
आस पास दुनिया होते हुए भी बस सरोकार है तुमसे
मुझे तुम्हारे बिना अपनी जीत मंज़ूर नहीं,+
उदासी सी फ़िज़ाओं में है
मेरा दिल भी अकेला है
ना किसी के मिलने की उम्मीद है
ना किसी के संदेशे का झमेला है
कहने को तो हमने भी चाहा है किसी को
खुदा ही जाने हम ग़लतफ़हमी में हैं
या उसका अंदाज ही निराला है
खुदाया मिलवा देता मुझको किसी
सीधे साधे दिल से तो तेरा क्या जाता
'The Kerala Story' मूवी में हिजाबी लड़की का डायलॉग है कि "तुम्हारा भगवान शिव अपनी मरी हुई पत्नी को उठाकर विलाप करता हुआ घूमता है वो कैसा भगवान है"??
- उस समय अगर उस हिंदू लड़की को अपनी संस्कृति का ज्ञान होता तो वह जरुर जवाब देती कि मेरा भगवान शिव रुद्र-रुप में तांडव भी करता है और प्रलय भी ला सकता है परंतु अपनी पत्नी के लिए उसी रुद्र का रोना ये दिखाता है वो करुणामय भी है साथ ही शिव का अपनी पत्नी के लिए प्रेम ही है जिसकी वजह से आज भी आदर्श जोड़ी के लिए कहा जाता है कि बिलकुल शिव-पार्वती जैसी जोड़ी है ❤️
हर हर महादेव 🚩
#TheKeralaStory
@Suraj14874858@ajaychauhan41 मंदिर की तिजोरियों का रुपया सरकार के पास जाता है न कि मंदिर व्यवस्था करने वालों के पास. जबकि अन्य धर्म के प्रतीक खुद व्यबस्था करते हैं
@devilshe11 हटा कर हया का चिलमन
गर न आ पाई मिलने तो,
बेशक आना, तुम मेरे स्वप्न में
बेशक वो खेप हो किश्तों में
ताकि कशिश बनी रहे सपने में जीने की !
आखिर सपने भी जीने के लिए ही होते हैं
.... है न !
@aquietsnowfall प्रेम जब परिपक्व हो जाए
तो शिकायतों से परे
सिर्फ़ आँखों की हलचल से
हामी भरता है
कहता है कि मैं साथ हूँ हमेशा तुम्हारे
चाहे तुम दूर हो या पास
पर मैं हूँ , और जब भी कहोगी
मैं आऊँगा तुम्हारे लिए
धानी 🌱
समस्त दुनिया के
प्रकाश से ज़्यादा रोशनी
वास करती है
एक निर्मल हृदय में
मेरे दोस्त !
तुम अन्धकार के विरुद्ध की गई
सबसे उम्दा रचना हो
अपनी लौ को पहचानो !
"शुभ दीपावली"
#kavitaख़ोर#समृद्धि
बचपन से ही मैं पढ़ने और खेलने में निचले औसत दर्जे का व्यक्ति रहा हूं,,, लोगों को उनके मुंह पर जवाब देने से.लेकर औकात दिखाने तक का महारथ हासिल है.... लेकिन अब शांत और एकांत में रहने का प्रयत्न करता हूं.....!!!!