"जो मंत्री गए हैं उन्हें कन्नौज का नहीं पता नवोदय विद्यालय में बच्चों ने आंदोलन किया खाने को लेकर। ये वो लोग हैं जिन्होंने कन्नौज बर्बाद कर दिया, कन्नौज का विकास रोक दिया, कहने को IPS हैं, लेकिन सबसे बड़े ठग निकले ये लोग।"
– माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
“अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते?”
- ये सवाल उस बच्ची का है, जो स्कूल में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन और सुविधाओं की किल्लत पर आवाज उठा रही है
मामला राजस्थान के अलवर का है, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं धरने पर बैठी हैं। देश में GEN Z के बाद अब GEN Alpha अपना हक मांग रहे हैं।
अच्छी शिक्षा और स्कूल में सुविधाएं बच्चों का हक हैं, BJP सरकार में जिनके लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है।
ऐसी सरकार को शर्म आनी चाहिए!!
पत्रकार: राहुल गांधी ने मीडिया को चूहा बोल दिया
अखिलेश जी: यूपी में 4000 करोड़ की सड़क ढह गई, सच नहीं दिखाओगे तो चूहा तो कहेगा ही कोई न कोई
अखिलेश जी से होशियारी नहीं 😆
इसे एक्सप्रेसवे कहना भ्रष्टाचार का अपमान होगा। इसे तो भाजपा सरकार के विकास मॉडल का राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर संरक्षित कर देना चाहिए। आने वाली पीढ़ियाँ टिकट लेकर देखें कि कैसे सड़क के नाम पर बजट बना, बजट के नाम पर पैसा बहा और जनता के हिस्से में गड्ढे आए।
शिलापट्ट पर लिखवा दीजिए - “भ्रष्टाचार यहाँ से गुज़रा था।”
चंदा चोर कहाँ मिलेंगे~ बीजेपी के दफ़्तर में
चढ़ावा चोर कहाँ मिलेंगे~बीजेपी के दफ़्तर में
पेपर चोर कहाँ मिलेंगे~ बीजेपी के दफ़्तर में
सपा विधायक सीएम योगी के आगे आकर आकर विधानसभा में नारा लगा रहे है
सपा विधायक राममंदिर लूट पर चर्चा चाहते है लेकिन बीजेपी होने नहीं दे रही है इसलिए सपा विधायकों को वेल में आना पड़ा
झारखंड में नौजवान धरने पर बैठे हैं और विपक्ष में बैठे भाजपाई मलाई खाने में व्यस्त है।
बीजेपी झारखंड में विपक्ष की भूमिका निभाने में भी नाकाम नजर आ रही है।
बीजेपी छात्रों की मदद भी नही करना चाहती है।
#झारखंड
विपक्ष सरकार से सवाल पूछ रहा था, लेकिन जवाब सरकार से कम और स्पीकर की कुर्सी से ज़्यादा आ रहे थे।
"रसीद लेकर आ जाओ", "तुम तो पैदा भी नहीं हुए थे...", "मैं बताता हूँ कहाँ मिलेगा..." - ये किसी निष्पक्ष स्पीकर की भाषा नहीं लगती। ये तो ऐसा लग रहा था जैसे सत्ता पक्ष का कोई नेता विपक्ष से बहस कर रहा हो।
लोकतंत्र में स्पीकर की कुर्सी किसी पार्टी की नहीं, पूरे सदन की होती है। उसका काम सत्ता का बचाव करना नहीं, नियमों के मुताबिक़ सदन चलाना और दोनों पक्षों को बराबरी से सुनना है।
लेकिन जिस दौर में हर संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों, वहाँ स्पीकर से भी निष्पक्षता की उम्मीद करना शायद ज़्यादा बड़ी उम्मीद हो गई है।
अब उम्मीद सिर्फ़ जनता से है। वही तय करेगी कि नफ़रत फैलाने वालों, समाज को बाँटने वालों और जवाबदेही से भागने वालों को सत्ता में बनाए रखना है या लोकतंत्र को फिर से मज़बूत करना है।
इस देश में चपरासी की नियुक्ति भी परीक्षा से होती है लेकिन उच्च न्यायपालिका के जज की नियुक्ति बिना परीक्षा के होती है। क्या ये न्यायसंगत है?
कॉलेजियम सिस्टम खत्म होना चाहिए।
- श्री @sanjuydv जी, सदस्य राज्यसभा
पत्रकार: आप पर किस धारा में मुकदमा हो गया..?
चाँद बाबू: बताइए कोई 2.5 फीट का आदमी किसी 6 फीट के आदमी पर कैसे जान लेवा हमला कर सकता है..🥺
कितनी शर्म की बात है कि वह हमारे ऊपर मुकदमा करते है हाईकोर्ट ने तो कहा दिया कि हमारा मुकदमा वापस लिया जाये लेकिन यहां शासन प्रशासन के दम पर मुकदमा वापस नहीं लिया जा रहा है।