Any arrest of Ajit Bharti will only pour more fuel on the fire of this agitation. This will no longer remain about one individual it will intensify the demand for reform of the bogus SC/ST Act and concerns over its alleged misuse.
Laws should exist to deliver justice, not to intimidate or frame innocent people. One sided justice cannot continue.
Baba Ramdev - If its illegal to abuse sc st the same way its illegal to abuse brahmins. It seems ramdev is going against bjp narrative of protecting sc st .
दिल्ली में सांसद चंद्रशेखर रावण की आज़ाद समाज पार्टी ने पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ़ SC/ST एक्ट और IT एक्ट 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
अजीत भारती पर ये कार्रवाई सरासर गलत है यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है जब इनके पास कोई तर्क नहीं बचता तो यह SC/ST एक्ट का सहारा लेते है।
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
मशहूर यूट्यूबर अजीत भारती के ऊपर एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओ में मुक़दमा पंजीकृत किया गया है,
हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ,
जिसमें अजीत भारती ने नगीना सांसद चंद्रशेखर पर कुछ टिप्पणी की थी, उसी को आधार मानकर मुक़दमा लिखा गया है,
ये FIR दिल्ली के नार्थ एवेन्यू में दर्ज कराई गई है, ये सामान्य वर्ग की आवाज उठाने वालों को दबाने का प्रयास है,
We stand with @ajeetbharti ✊
He is the son of a nine-time MP and a three-time MP himself. How much more empowerment does he need?
He has wealth, power, and political clout, so why does he continue to contest from reserved seats? Why not fight from an open seat? By monopolizing a reserved constituency, isn't he actively preventing a less privileged Dalit brother or sister from his party from entering Parliament?
And he isn't alone. There are many like him in every field. This argument is not a conspiracy by the GCs; they gain nothing either way. It is a question of internal accountability. Your own influential elites are holding the broader community back by refusing to step aside. So Dalits should start asking questions about where the real issue lies, instead of blaming GCs for their lack of opportunities.
कोई भी चाटुकार इन तीखे सवालों का जवाब नहीं दे पाएगा।
यह भारत के असल में प्रतिभाशाली और पढ़े-लिखे वर्ग का एकमात्र विरोध-प्रदर्शन है।
यहाँ तक कि 100 दिलीप मंडल भी उनका मुकाबला नहीं कर सकते।
@narendramodi@narendramodi_in
PLS REQ. @AmitShah@AmitShahOffice TO CARRY OUT INVESTGATION TO VERIFY IS THE CLAIMS BY PERSON IN VIDEO IS TRUE THAT POLICE PERSONNEL WERE SAD AND UNHAPPY WHILE PERFORMING DUTY OF MAINTAINING LAW AND ORDER ??
#UGC रोल बेक पर अपना बलिदान एक सवर्ण भाई ने दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर दे दिया
बोले भाईयो पर लाठिया बरसती मैं नहीं देख सकता
धन्य है🙏 ऐसे शूरवीर भाई को जो सवर्ण समाज के लिए अपनी नोकरी को बलिदान कर दिया
आपके इस बलिदान के संघर्ष का सवर्ण समाज अपने लिए उसका परिणाम जरूर निकालेगा
सवाल तो सीधा है ना,
- - अगर नीतीश ठाकुर को जरूरत है या नीतीश पासवान को जरूरत है,
जरूरत जिसकी है उसको मौका मिलना चाहिए।
केवल इस आधार पर कि नीतीश पासवान का नाम "नीतीश पासवान" है,
नीतीश पासवान राष्ट्रपति भी हो जाएंगे तो उनके बच्चे को आरक्षण मिलेगा,
लेकिन नीतीश ठाकुर गरीब भी रह जाएंगे तो उनको किसी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया जाएगा, मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा,
@iChiragPaswan
सरकार चीनी आयात करने पर विचार कर रही है या संभवतः कर ही रही है, टैक्स-फ्री कर दिया उसे। हम लोग तो सरप्लस थे चीनी उत्पादन में, ये कैसे हो गया?
गन्ने को डाइवर्ट करके एथनॉल बनाना आरंभ किया, तो थोड़ा सा प्रॉब्लम हो गया। धन्यवाद गडकरी जी के एथनॉल प्रेम को, लक्ष्य 2030 का था और 2025 में पूरा कर लिया गया।
पंकज धवरैया को बहुत चोट आई है , उनको बस से फेंक दिया गया और एक पुलिस वाला पटक कर उसके सीने पर घुटनों से वॉर किया , पसलियाँ टूट गई हैं , हाथ टूट गया है , इतनी क्या दुश्मनी है मोदी जी आपको सवर्ण आंदोलनकारियों से ??
मैं आश्चर्य में हूँ कि आज 21 के आंदोलन से भी ज़्यादा पुलिसिया बर्बरता हुई है , सब याद रहेगा मोदी जी , यदि माँग नहीं मानी गई तो भाजपा रसातल में चली जाएगी ।
@brajeshpathakup
PLS CONVEY TO YOUR FOLLOWER @Harshdubey9956 THAT HIS CREDIBILITY IS SEEMS TO BE NOW ZERO.
IF @BJP4UP DECIDES TO GIVE A MLA TICKET IN UPCOMING UP ELECTION TO HARSH OR HIS FATHER THEN MAY BE BJP NOT ONLY LOSE BUT LOSE DEPOSIT SEAT EVEN IF BJP WIN 3/4 MAJORITY
चंद्रशेखर आज़ाद जी, RHA की ओर से अजीत भारती ने आपकी बहस की चुनौती स्वीकार कर ली है।
अगर, जैसा मुझे लगता है, आपने चुनौती आवेश में आकर दी थी, तो उसे वापस ले सकते हैं। और अगर सच में चुनौती दी थी, तो तारीख, समय और जगह तय कीजिए। बहस तर्क और तथ्यों पर होगी।
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।