One guy is looting money by forcing Ethanol
Another is land grabbing for his real estate empire
One is making money from leaking exam papers
Another is looting by selling the Nicobar Island
Top to bottom, everything is corrupt and compromised in this Modi govt.
प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर उनके मंत्री जीतन राम मांझी ब्राह्मण समाज को खुलकर गरिया रहे हैं। दोगला कह रहे हैं ब्राह्मण समाज को।
बेचारे अभागे सवर्ण अगर मोदी के गुलाम ना होते तो जरूर कुछ सबक सिखाते भाजपा को 😓
एक लड़के के फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ एक वर्ग पूरी उग्रता के साथ देश भर में रोष जता रहा है। गुस्सा जायज भी है।
लेकिन जब निहत्थे दाढ़ी-टोपी वाले को उड़ा दिया जाता है तो यही वर्ग चुटिया पकड़-पकड़कर नाचता है और बाबा की जय-जयकार करता है।
हालात के हिसाब से पैमाना नहीं बदलना चाहिये
My dear @sanjaynirupam, पहले शिवसेना की संगत में थे, फिर कांग्रेस की संगत में, और अब भाजपा की संगत में हैं। गिरगिट भी बेचारा हालात देखकर रंग बदलता है, लेकिन आप तो संगत बदलते ही पूरी विचारधारा भी तेज़ी से अपडेट कर लेते हैं। 🫡
@KartiPC@NTA_Exams You should also shut down all the shopping malls since there might be a theft in one of them. And close the roads because I heard someone was speeding.
स्टाइल देख रहे हो फोटो में...जैसे कि डॉन विट्टो कोरलियॉन न्यूयॉर्क फाइव फैमिलीज की मीटिंग ले रहा है।
लेकिन अगर मीटिंग का ऑडियो आता तो पता चलता कि ट्रंप को गठिया बाई से बचने के लिए दाल चीनी वाला पानी उबाल कर पीने की सलाह दी जा रही है।
Shamli, Uttar Pradesh : After allegations of forced conversion, Love Jihad, Marriage were widely reported, Ayush Malik has now stated that his decision was voluntary and that no one forced or influenced him.
Reported by @RaiSandeepTOI
After wrongly declaring an Indian student as a 'Pakistani'. The Anchor is still doubting his Country of origin just because the region on his X profile shows 'South Asia'. The News Anchor @AshokShrivasta6 thinks India is not part of 'South Asia. Su h Godi Anchors will declare their family members as Pakistanis just to defend Modi/BJP.
When there is nothing to hide, there is nothing to fear.
What happens to India’s image when the world sees a compromised PM panic and run from a few questions?
Muslims do not offer regular five-time Namaz on roads. It usually happens only during Eid al-Fitr and Eid al-Adha. Twice a year and only for around 10 minutes, that too when the mosque is full. In recent years, many mosques have started arranging 2–3 Jamaats to ensure people don’t have to pray outside.
But the leaders know that this is the only way to divert the attention of their followers. They know, This is the only way to please their followers and make sure they don't question the govt.
अखिलेश जी, आइये तेल दामों की क्रोनोलॉजी समझते हैं:
> मोदी सरकार ने 2014 में कार्यभार संभालते ही पेट्रोलियम उत्पादों की सब्सिडी बिल्कुल खत्म कर दी, जिससे LPG और डीजल आम उपभोक्ता के लिए महंगे हो गए।
> 2015-16 में मोदी खुद को किस्मतवाला बताते थे कि उनके आने के बाद कच्चे तेल की कीमत $30 प्रति बैरल से भी नीचे गिर गई है। लेकिन उस वक्त भी उन्होंने दाम पड़ोसी देशों से ऊपर रखे। पेट्रोल और डीजल औसतन ₹59 और ₹46 तक बना रहा।
> 2016 से 2019 के बीच कच्चा तेल $65-70 प्रति बैरल रहा और पेट्रोल और डीजल औसतन ₹70 और ₹66 तक बना रहा।
> 2020 में कोरोना की आड़ लेकर तेल के दामों में केंद्रीय टैक्स अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिए गए, हालांकि कच्चे तेल की कीमतें गिरती रहीं और लॉकडाउन में तो $20 प्रति बैरल भी आ गिरी। पेट्रोल और डीजल औसतन ₹84 और ₹76 तक बना रहा।
> 2021 में जब कच्चा तेल वापिस से $65-70 की पुरानी रेंज में आया तो हमें बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल उछाल ले रहा है। इसलिए अक्टूबर 2021 में पहली बार पेट्रोल ₹100 पार कर गया और डीजल ₹90 पार कर गया। हालांकि कच्चे तेल की ये कीमतें 2019 के बराबर ही थी। लेकिन कोरोना के बहाने टैक्स का पहाड़ ऐसा खड़ा कर दिया गया कि 2019 के मुकाबले एक्साइज ड्यूटी लगभग 30 रुपए ज्यादा बढ़ा दी गई थी।
> 2022 में रूस यूक्रेन युद्ध की आहट से कुछ महीने कच्चा तेल $100 प्रति बैरल क्रॉस कर गया। सरकार ने कुछ महीने बड़ा एहसान जताया कि हम एक्साइज ड्यूटी ₹8 कम करके रिटेल प्राइस नहीं बढ़ने देंगे। लेकिन दिसंबर 2022 तक क्रूड वापिस से $70-75 की रेंज में आ गया।
> 2023-2025 के बीच हमें बताया गया कि भारत रूस से $25-$30 सस्ता तेल खरीद रहा है। बाजार में कीमत $75-80 थी, लेकिन भारत को $50-55 मिलता रहा। लेकिन फिर भी करिश्माई रूप से पेट्रोल और डीजल का दाम 90 रूपये से ज्यादा बना रहा। गौरतलब है कि 2015 में कच्चे तेल की इस कीमत पर ये दाम 55-60 रूपये था।
> रूस से सस्ते तेल के आयातकों में सबसे बड़ा रिलायंस था, रोजाना 4 लाख बैरल से ज्यादा। इस दौरान रिलायंस ने हजारों करोड़ का मुनाफा कमाया। तेल का शुद्धिकरण करके यूरोप को बेचा गया। यहां तक कि भारत में शुद्धिकरण हुआ तेल नेपाल, भूटान और श्रीलंका में भी हमारे मुकाबले 30 रुपए लीटर सस्ता बिकता रहा।
> सस्ते रूसी तेल का सारा प्रॉफिट अंबानी को और भारत को इसके बदले 2025 में अमेरिका से टैरिफ की सौगात मिली। लेकिन ट्रंप परिवार और अंबानी परिवार की सांझ बहुत अच्छी है, अब यही सैटिंग वेनेजुएला के तेल में शुरू हो चुकी है।
तो अब अगर कोई ये कहता है कि 2022 से 2025 के बीच में तेल के दाम नहीं बढ़े तो भाषा सरकारी है। कायदे से रेट घटने चाहिए थे, हमने अपने पड़ोसी देशों के मुकाबले ₹30-35 महंगा तेल खरीदा है 3 साल तक।
मोदी कोई महंगाई मई में क्यों याद आई, सबसे गहरा संकट तो मार्च और अप्रैल में था। चुनाव के तुरंत बाद ये माहौल क्यों बनाया जा रहा है?
इज़रायल के चंगुल में फंसकर ईरान की नाराजगी किसने मोल ली है?
ये संकट हमारे ऊपर मोदी ने लादा है और उपरोक्त आंकड़े बता रहे हैं कि जब संकट नहीं था तो मोदी सरकार ने रिलायंस के साथ मिलकर उपभोक्ता को लूटा है।
प्रणाम।
WHAT ON EARTH HAVE WE JUST WITNESSED! 🤯
Bhuvneshwar Kumar & Rasikh Dar, take a bow ❤️
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