जब लोगों की बात नहीं सुनी जाती, तब वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाते हैं। लोकतंत्र की असली ताकत सिर्फ़ चुनाव नहीं, बल्कि हर नागरिक की आवाज़ को सुनने और समझने में है। सवालों को दबाने से नहीं, संवाद से समाधान निकलता है।
#जंतरमंतर#लोकतंत्र#आवाज़#DharmendraPradhanResign
Every lathi raised against a peaceful voice raises serious questions about freedom of expression. A democracy must protect dissent, not silence it.
#JantarMantar#DharmendraPradhanResign
#अयोध्या : 5 साल की बच्ची के साथ मां-बाप मंदिर दर्शन करने आए थे, एक व्यक्ति आया, बच्ची को उठाकर ले गया, होठ, नाक पर दांत से काट लिया, बलात्कार करने की कोशिश की, आरोपी प्रीतम सिंह गिरफ्तार…
एक शागिर्द ने अपने उस्ताद से पूछा:
“मैंने बहुत-सी किताबें पढ़ीं, लेकिन उनमें से ज़्यादातर भूल गया। तो फिर पढ़ने का फ़ायदा क्या है?”
उस्ताद ने उस वक़्त कोई जवाब नहीं दिया।
कुछ दिनों बाद, जब दोनों नदी के किनारे बैठे थे, उस्ताद ने कहा कि उन्हें प्यास लगी है और ज़मीन पर पड़ी एक पुरानी गंदी छलनी से पानी लाने को कहा।
शागिर्द हैरान रह गया, क्योंकि वह जानता था कि यह नामुमकिन है।
लेकिन उस्ताद की बात टाल न सका और छलनी लेकर नदी की तरफ गया।
हर बार जब वह छलनी में पानी भरकर लाने की कोशिश करता, पानी रास्ते में ही छलनी के छेदों से निकल जाता।
उसने कई बार कोशिश की, तेज़ भागा भी, मगर एक बूंद पानी भी उस्ताद तक न ला सका।
थककर वह उस्ताद के पास बैठ गया और बोला:
“मुझे माफ़ कर दीजिए उस्ताद, यह मुमकिन नहीं था। मैं नाकाम हो गया।”
उस्ताद मुस्कुराए और बोले:
“नहीं, तुम नाकाम नहीं हुए। छलनी को देखो।”
शागिर्द ने देखा कि जो छलनी पहले गंदी थी, अब चमक रही थी, बिल्कुल साफ़ हो चुकी थी।
उस्ताद ने कहा:
“किताबें पढ़ना भी ऐसा ही है।
तुम छलनी की तरह हो और किताबें नदी के पानी की तरह।
ज़रूरी नहीं कि तुम हर बात याद रखो।
लेकिन किताबों के ख़याल, एहसास, इल्म और सच्चाई तुम्हारे अंदर से गुज़रकर तुम्हारे दिमाग़ और रूह को साफ़ कर देते हैं, और तुम्हें पहले से बेहतर इंसान बना देते हैं।
सीखने का असली मक़सद सिर्फ़ ज़्यादा जानकारी जमा करना नहीं,
बल्कि अपने अंदर कोई अच्छी तब्दीली लाना है।