लुगाई से भिड़ गए थे, अब कोने में ज्ञान प्राप्त हो रहा है!
जापान के एक चिड़ियाघर में गोरिल्ला 'कियोमासा' की अपनी पार्टनर से लड़ाई हो गई. गुस्से में उसकी पार्टनर ने उसे बाड़े से बाहर निकाल दिया. इसके बाद कियोमासा अकेला एक कोने में चुपचाप बैठा दिखाई दिया. वायरल वीडियो में गुरिल्ले का रिएक्शन देखकर हर कोई हैरान है.
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राष्ट्रपति से लिपटकर रोई शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की माँ । शहीद की रोती मां को देख राष्ट्रपति ने तोड़ा प्रोटोकॉल और खुद माता-पिता के पास जाकर दिया कीर्ति चक्र ।
दुखद : हरियाणवी कलाकार पेप्सी शर्मा नहीं रहे। सीने में दर्द के बाद मौत हुई। वह उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के पतला गांव के रहने वाले थे। UP और हरियाणा में रागनी स्टेज पर उनकी जबरदस्त परफॉर्मेंस होती थी।
दिल्ली-एनसीआर में आया ऐसा तूफान कि 100 km प्रतिघंटा से अधिक की रफ्तार से चली हवायें। पेड़ गिर गये, लोगों के घरों में पानी भर गया। बिजली के तार टूट गये। एक नज़ारा देखिये।
बीसवीं सदी के मध्य में जिन एंटीबायोटिक्स को प्राणरक्षक के रूप में देखा गया अब वो हमारे शरीर में कई तरह से एक शत्रु के रूप में पहुंच रही हैं। कभी भोज्य पदार्थों (मीट इत्यादि) के साथ और कभी सीधे हवा-पानी में घुलकर। हिमाचल प्रदेश में दवा कंपनियों की लापरवाही ने बहुत बड़ी जनसंख्या को ख़तरे में डाल दिया है ... ये वो रिपोर्ट है जो @ajayprakashm सामने लाये हैं वरना इस देश में मेडिकल कचरा निस्तारण का कानून भले ही हो लेकिन उसका ठोस क्रियान्वयन या प्रभावी मॉनिटरिंग कतई नहीं है।
बिहार : साल 1992 के अपराध के लिए शख्स को अब 2026 में 84 साल की उम्र में हुई जेल
◆ 33 साल बाद जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया, अदालत ने आरोपी 84 साल के दीप राय को IPC की धारा 147, 148 और 307 के तहत दोषी करार दिया
#Bihar | Bihar
Karma never misses, so don't waste your time taking revenge.
Every person who wronged you, dismissed you, or walked away without accountability, life will handle them. Not on your timeline. But with a precision you could never match.
Revenge requires you to stay focused on them. It keeps you connected to the pain, to the anger, to the version of yourself that was hurt. It costs you time and energy that belongs to your own life.
The best response to people who damaged you is to become completely unreachable. Not bitter. Not vengeful. Just gone.
Let karma do what it does. Your only job is to move forward and never look back.
Heartbreaking 💔 Proud of u Vaibhav Suryavanshi...!!
Today he reminds me of Sachin Tendulkar who had to face similar situation due to $hitty teammates in crucial games.
आप जानते हैं प्रकृति का यह गुप्त नियम? - Vandaniya Mataji
क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे छोटे-छोटे कर्म भी हजार गुना होकर लौटते हैं?
इस प्रेरणादायक वीडियो में करोड़ों गायत्री परिजनों की आराध्या वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी प्रकृति और अध्यात्म के उस दिव्य नियम को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझा रही हैं।
👉 जानिए:
• श्रद्धा और कर्म का गहरा संबंध
• “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे” का आध्यात्मिक रहस्य
• साधक का जीवन कैसे हर दिन नई फसल उगाता है
• सकारात्मक कर्म और भावनाओं की शक्ति
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🍁 चिंता पैदा होती है कर्ता के भाव से।
जैसे ही तुम स्वीकार कर लेते हो कि मैं कर्ता नहीं हूं फिर कैसी चिंता?
🍁 चिंता है कर्ता की छाया।
तुम चिंता तो छोडना चाहते हो, कर्तृत्व नहीं छोड़ना चाहते।
तुम रहना तो चाहते हो कर्ता, कि दुनिया को दिखा दो कि तुमने यह किया, यह किया, यह किया;
कृतज्ञता की वो शक्ति - जो भाग्य को उसी पल से बदलती है |
कृतज्ञता (Gratitude) केवल शिष्टाचार का शब्द 'धन्यवाद' नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा (Power) है, जो आपके सोचने के तरीके को बदलकर उसी पल से भाग्य की दिशा बदल सकती है। जब आप उन चीज़ों के लिए आभारी होते हैं जो आपके पास हैं, तो आप अनजाने में ही ब्रह्मांड को सकारात्मक संकेत भेजते हैं, जिससे और अधिक सकारात्मकता आपके जीवन में आकर्षित होती है।
कृतज्ञता भाग्य को कैसे बदलती है?
🕉️ The first technique of "Vigyan Bhairav" is considered a deep breathing meditation.
🌿 Shiva describes that moment
🌬️ when the breath is neither going in
🌙 nor coming out.
✨ In that silent and still moment, a person truly experiences the self. 🙏
महाभारत में एक प्रसंग आता है- जब पांडवों को बार-बार अपमान, षड्यंत्र और अन्याय का सामना करना पड़ा तब भी श्रीकृष्ण ने उन्हें हर छोटे विवाद में अपनी शक्ति नष्ट करने की सलाह नहीं दी। यदि पांडव केवल अपमानों का उत्तर देने और हर व्यक्ति से उलझने में ही लगे रहते तो शायद वे कभी धर्मस्थापना के उस लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते जिसके लिए उनका जन्म हुआ था। अर्जुन का ध्यान यदि हर ताने, हर विरोध और हर छोटे संघर्ष पर होता, तो वह गांडीव उठाकर इतिहास नहीं रच पाता।
जीवन भी बिल्कुल ऐसा ही है। जो लोग हमेशा खेतों की मेड़ों, छोटी-छोटी सीमाओं और तुच्छ विवादों में उलझे रहते हैं, वे वहीं ठहर जाते हैं। उनकी ऊर्जा आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों से लड़ने में समाप्त हो जाती है। याद रखिए आपके विरोध में लोग अवश्य आएंगे, आलोचना भी होगी, बाधाएँ भी आएंगी; परंतु हर पत्थर उठाकर जवाब देना बुद्धिमानी नहीं है। नदी कभी रास्ते के पत्थरों से लड़ती नहीं, वह उन्हें पार करके आगे बढ़ जाती है इसलिए अपनी शक्ति को विवादों में नहीं, अपने लक्ष्य, अपने कर्म और अपनी प्रगति में लगाइए। समय स्वयं सिद्ध कर देगा कि कौन मेड़ों में अटका रह गया और कौन क्षितिज तक पहुँच गया।
हर हर हर महादेव 🖤✨
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