सूचनाओं तक पहुँच जनता का अधिकार है। मुलभुत सुविधाओं को माँगने आखिर जनता जाए तो जाए कहाँ ? पूर्व केंद्रीय मंत्री ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता पहलाद पटेल जी कह रहें है कि जनता को भीख मांगने की आदत पड़ गई हैं। अपनी असहमतियों को दबाने का अच्छा प्रया��� है वैसे। #Politics #BJP
एक ��ीज़ बिना आवाज़ के उगता हैं, लेकिन एक पेड़ भारी शोर के साथ गिरता हैं, विनाश में शोर हैं सृजन शांत हैं। यही मौन की शक्ति हैं, चुपचाप बढ़ो वह जिसका मन स्थिर आत्मसंयम में सभी प्रकार की इच्छा एवं वासनाओं से मुक्त हैं, जो अच्छे और बुरे दोनों से परे हैं, वह जागृत और भयहीन हैं।
परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी
अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह आश्रम में श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में मनायी गई अघोरेश्वर भगवान राम जी की 88वीं जयंती
भाद्र शुक्ल सप्तमी, संवत् 2081, तदनुसार मंगलवार, 10 सितम्बर 2024 को अघोर पीठ श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव, वाराणसी के पुनीत प्रांगण में परमपूज्य अघो���ेश्वर भगवान राम जी की 88वीं जयंती संस्था के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी के सान्निध्य में तथा संस्था के हजारों सदस्यों, शिष्यों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति भक्तिमय वातावरण में मनाई गई।
प्रातःकाल 5:30 बजे प्रभातफेरी से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्रद्धालु बड़ी संख्या में अघोरेश्वर महाप्रभु का जयकारा लगाते हुए अघोरेश्वर भगवान राम घाट, गंगातट, अघोरेश्वर महाविभूति स्थल पहुँ��े। वहाँ से कलश में गंगाजल लिया और पड़ाव आश्रम वापस आये। आगे भक्तों ने आश्रम परिसर में सफाई-श्रमदान किया। सुबह 8:00 बजे पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने अघोरेश्वर महाप्रभु के चिरकालिक आसन का विधवत् पूजन संपन्न किया। पृथ्वीपाल जी ने सफलयोनि का पाठ किया। पाठ के उपरांत पूज्यपाद बाबा द्वारा मन्दिर परिसर में हवन किया गया। श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर अघोरेश्वर महाप्रभु की चरण-पादुका पर पुष्पांजली देकर आशीर्वाद प्राप्त किया और अन्नपूर्णा नगर में जाकर प्रसाद ग्रहण किया।
उल्लेखनीय है कि पड़ाव आश्रम पर दो दिवसीय लोलार्क षष्ठी व अघोरेश्वर जयंती पर्व का आयोजन किया गया था। इसस��� पूर्व दो दिनों से चल रहे “अघोरान्ना परो मन्त्रः नास्ति तत्त्वं गुरो: परम्” के अखंड संकीर्तन का समापन अपराह्न 3:30 बजे पूज्य बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी द्वारा पूजन के साथ किया गया।
हे मानव दुःख से तुम क्यों घबराते हो? दुःख तो केवल छाया मात्र है। जिसमें चेतना है उसमें दुःख है। सच पूछो तो दुःख तेरे जीवन की एक ऐसी कड़ी है जिसके अभाव में तेरा ही जीवन तुझे स्पष्ट नहीं है। तू मुस्कुराता रह और मुस्कुरा कर दुखों से लड़ता जा, यही तुम्हारा जीवन है।