Ex-District President Nsui
EX-Genral Secretary Youth Congress
EX-Member of zila parishad
EX-Member Rajasthan Parnyas Board Gov Of Raj
Politician at Politics
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।।
"शारदीय नवरात्रि" का द्वितीय दिवस पराम्बा भगवती "माँ ब्रह्मचारिणी' के श्रीचरणों में श्रद्धा अर्पित करने का पावन अवसर है। करकमलों में जपमाला और कमण्डलु धारण किए उनका शान्त, तपोमय स्वरूप साधक को अपने भीतर लौटने का आह्वान करता है। उनकी आराधना जीवन में उस निष्ठा का जागरण है, जिसमें विचार पवित्र होते हैं, इच्छाएँ संयत होती हैं और समस्त साधना आत्मसत्य के अनुसन्धान में समर्पित हो जाती है।
भगवत्पाद भाष्यकार भगवान् आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदान्त के आलोक में आत्मा नित्यसिद्ध, स्वप्रकाश और असंग है। उसे किसी कर्म से उत्पन्न अथवा किसी उपलब्धि से पूर्ण नहीं किया जा सकता। साधना का प्रयोजन उस अविद्या का निराकरण है, जिसके कारण मनुष्य अपने अखण्ड स्वरूप को भूलकर देह, मन और परिस्थितियों की सीमाओं में स्वयं को आबद्ध मानता है। माँ ब्रह्मचारिणी का तपस्विनी रूप इसी आत्मानुसन्धान के लिए आवश्यक अन्तःकरण की शुद्धि और स्थिरता का प्रेरक है।
तप का सार शरीर को पीड़ित करना नहीं, चित्त को सत्य के प्रति निष्ठावान बनाना है। विषयों में बिखरी वृत्तियों को समेटना, फलासक्ति को शिथिल करना, वाणी और व्यवहार में संयम लाना तथा सुख-दुःख के बीच विवेक को सुरक्षित रखना तप की सार्थक अभिव्यक्तियाँ हैं। अद्वैत की दृष्टि में तप और उपासना ज्ञान की पात्रता विकसित करते हैं; अविद्या का निवर्तन आत्मज्ञान से होता है। देवी की आराधना इसलिए ज्ञानमार्ग की भूमि को श्रद्धा, पवित्रता और एकाग्रता से सींचती है।
माँ की जपमाला साधक को निरन्तर स्मरण की शिक्षा देती है। प्रत्येक मनका मानो मन को पुनः उसके आराध्य की ओर लौटाता है। जप की पुनरावृत्ति में केवल ध्वनि का प्रवाह नहीं, भगवद्भाव में चित्त को स्थिर करने का अभ्यास निहित है। उनका कमण्डलु अल्पपरिग्रह, सन्तोष और निर्मल जीवन का प्रतीक बनकर स्मरण कराता है कि बाह्य संग्रह की वृद्धि से अन्तःकरण की तृप्ति सुनिश्चित नहीं होती। जब अनावश्यक आग्रह घटते हैं, तब आत्मचिन्तन के लिए भीतर अवकाश निर्मित होता है।
वेदान्तीय मनन में "ब्रह्मचारिणी" नाम साधक को ब्रह्माभिमुख जीवन की प्रेरणा देता है। ब्रह्मचर्य में इन्द्रियसंयम का महत्त्व है, साथ ही जीवन की शक्तियों का संयत और पवित्र नियोजन भी। दृष्टि में मर्यादा, वाणी में सत्य, आचरण में शुचिता और बुद्धि में आत्मतत्त्व की जिज्ञासा प्रतिष्ठित हो, तभी साधना जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को आलोकित करती है।
भगवत्पाद की शिक्षाओं में आत्मज्ञान की पात्रता के लिए साधनचतुष्टय का विशेष महत्त्व है। नित्य और अनित्य का विवेक साधक को परिवर्तनशील उपलब्धियों की सीमा समझाता है। वैराग्य इहलोक और परलोक के भोगों की तृष्णा को शिथिल करता है। शम, दम, उपरति, तितिक्षा, श्रद्धा और समाधान अन्तःकरण को स्थिर तथा ग्रहणशील बनाते हैं। मुमुक्षुत्व बन्धन से मुक्त होने की उत्कट आकांक्षा है। "माँ ब्रह्मचारिणी" की उपासना में साधक इन्हीं गुणों की दृढ़ता के लिए प्रार्थना करता है, जिससे गुरु और श्रुति का उपदेश उसके जीवन में सार्थक हो सके।
भक्ति में साधक माँ को अपने सम्मुख आराध्य रूप में अनुभव करता है; अद्वैतबोध में उसी आराधना की परिणति उपासक, उपास्य और समस्त अनुभव के अधिष्ठानभूत एक चैतन्य की पहचान में होती है। ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का बोध अहंकार का विस्तार नहीं, देहाभिमान की निवृत्ति है। यह अपने सीमित व्यक्तित्व को परम घोषित करना नहीं, अपने वास्तविक स्वरूप की अखण्डता को जानना है।
इस पावन दिवस पर "माँ ब्रह्मचारिणी" से प्रार्थना है कि वे हमें ऐसा तप दें जो अहंता को शिथिल करे, ऐसा संयम दें जो जीवन को गरिमा प्रदान करे, ऐसी श्रद्धा दें जो ज्ञान के प्रति ग्रहणशील बनाए और ऐसा विवेक दें जो अनित्य के बीच नित्य का अनुसन्धान कराए।
हे जगदम्बा ब्रह्मचारिणी ! हमारा अन्तःकरण निर्मल हो, साधना अविचल हो और गुरु-श्रुति के प्रकाश में आत्मस्वरूप का बोध उदित हो। आपके अनुग्रह से समस्त प्राणियों के जीवन में शान्ति, धैर्य और मंगल प्रतिष्ठित हो।
#ब्रह्मचारिणी #शारदीय_नवरात्रि
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वोट चोरी के खिलाफ और अपनी सरकार चुनने के हर भारतीय के अधिकार के लिए दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे।
लोकतंत्र के लिए इस मार्च में शामिल हों।
📅 12 अक्टूबर 2026
🕜 दोपहर 1:30 बजे
📍 कनॉट प्लेस, बाराखंबा रोड जंक्शन
तिरंगा साथ लेकर आइए और उस आवाज़ को बुलंद कीजिए, जिसे दबाने के लिए सत्ता इतनी बेचैन है।
मेट्रो बंद कर सकते हैं, ट्रेनें रद्द कर सकते हैं, रास्तों पर बैरिकेड लगा सकते हैं और हजारों लोगों को हिरासत में ले सकते हैं। लेकिन जवाब मांगती जनता की आवाज़ नहीं दबा सकते।
चलो दिल्ली! 🇮🇳
Yesterday, the nation's young came out in Delhi to peacefully protest. They came with love in their hearts, not hatred or anger. They were beaten, both by cops and BJP goons.
This is not the India we want.
Tomorrow, we will march to the Supreme Court as Indians, united beyond party, gender, caste, community and state.
Youth, all opposition parties, civil society groups, all those who believe in democracy and stand by the Constitution of India, will walk with us.
We will submit a memorandum to the Chief Justice on behalf of the nation, demanding an end to vote chori, halting of SIR and the resignation of Gyanesh Kumar.
Narendra Modi, Amit Shah, Ajit Doval and Mohan Bhagwat cannot silence India's voice. These cowards cannot intimidate us. They will have to step aside.
We will march together, with love, brotherhood and patriotism.
Daro mat.
Tomorrow, all of India will march to the Supreme Court.
आदिशक्ति, जगज्जननी माँ जगदम्बा की आराधना-उपासना के महापर्व 'शारदीय नवरात्र' की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
माँ भगवती की अपार कृपा सभी पर बनी रहे। सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो, यही प्रार्थना है।
जय माता दी🙏
#ShardiyaNavratri
बेटियां ईश्वर का वरदान हैं,
बेटियां जीवन की मुस्कान हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर शक्ति स्वरूपा सभी बेटियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
बेटियाँ गौरव हैं, गर्व हैं और सृष्टि का आधार हैं; ये ही भारतीय संस्कृति, परंपरा और विरासत की ध्वजवाहक हैं।
आइए, हम सब मिलकर बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तीकरण का संकल्प लें।
#InternationalGirlChildDay
📍 न्यूयॉर्क, अमेरिका
राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के कार्यक्रम में साथी संसद सदस्यों के साथ भाग लिया।
आत्मीय स्वागत व अभिनंदन के लिये अध्यक्ष प्रेम भंडारी जी सहित RANA परिवार का आभार। यह संगठन सुदूर विदेशी धरती पर राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों में अग्रणी व सराहनीय भूमिका निभा रहा है।
#USA #NewYork
@PremBhandariNYC