यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है
कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है
तसल्ली देने वाले तो तसल्ली देते रहते हैं
मगर वो क्या करे जिस का भरोसा टूट जाता है
#हसीब_सोज#शेर#शायरी
अपनी आँखों की ज़रूरत नहीं देखी मैने
इस लिए भी तेरी सूरत नहीं देखी मैने
लोग नफ़रत के तलबगार नज़र आते हैं
कितने सालों से मुहब्बत नहीं देखी मैने
मैने देखा है यहाँ मतलबी लोगों का हुजूम
आप कहते हो हकीक़त नहीं देखी मैने
#AnwarAariz
ग़ज़ल
गुमशुदा हूँ मैं ख़ुद में, आईने से ग़ायब हूँ
अपनी ही कहानी में मैं सिरे से ग़ायब हूँ
साथ छोड़ देता है ह़ौस़ला अधूरे में
हर सफ़र में मैं आधे रास्ते से ग़ायब हूँ
मैं जहां में हूँ लेकिन ये जहां नहीं मुझमें
क़ाफ़िले में रह कर भी क़ाफ़िले से ग़ायब हूँ
- राजेश रेड्डी