अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के नेताओं का राजनीतिक अहंकार अब चरम पर है।
सपा के 6 कृत्य ही 2027 के लिए जनता को जवाब देने के लिए काफी हैं..
1. सपा प्रवक्ता द्वारा ब्राह्मण समाज के लिए बेहद आपत्तिजनक एवं अपमानजनक शब्दों का प्रयोग।
2. शिवपाल यादव द्वारा आजम खान को अगला गृहमंत्री बनाने की घोषणा।
3. जयंत चौधरी को अखिलेश यादव द्वारा ‘चवन्नी’ कहना और श्याम लाल द्वारा पूरे जाट समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी।
4. लोधी समाज के गौरव एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ‘बाबूजी’ को श्रद्धांजलि न देकर उनका अपमान।
5. संसद में संत एवं भगवा के अपमान के साथ प्रभु श्रीराम की तस्वीर के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार।
6. विधानसभा में प्रभु श्रीराम मंदिर की तस्वीर फाड़ने और उसे पैरों तले कुचलने का आरोप।
ये सिर्फ बयान या घटनाएं नहीं हैं।।। येह सपा की सामाजिक सम्मान, संत-परंपरा और सनातन आस्था के प्रति सोच को उजागर करते हैं।
2027 में जनता इनका जवाब अपने वोट से देगी।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा को चुनावी दृष्टि से अहम राज्य उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की तैयारी है।
हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
कांग्रेस का सनातन विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आया है।
अयोध्या की पावन भूमि पर सावन के महीने में सैकड़ों किलो मछली की दावत आयोजित किए जाने की खबर बेहद आपत्तिजनक है।
करोड़ों हिंदुओं की आस्था और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस को समझना होगा कि सनातन आस्था कोई वोट बैंक की राजनीति का विषय नहीं है।
जनता सब देख रही है और समय आने पर अपने वोट से जवाब भी देगी।
@IYC Deep State से पैसा खूब आ रहा है लगता है, तभी PR stunt भी इतना जोरदार चल रहा है।
लेकिन कांग्रेस भूल गई की पुणे की युवा पीढ़ी सब समझती है कौन जमीन पर काम कर रहा है और कौन सिर्फ कैमरे के सामने माहौल बनाने में लगा है।
PR अच्छा है आपका, लेकिन जनता की समझ उससे कहीं ज्यादा तेज है।
अभिजीत दिपके जी, आज आम आदमी पार्टी से दूरी दिखाने की कोशिश मत कीजिए। 2017 में आपने खुद आम आदमी पार्टी को ₹500 का चंदा दिया था।
अब कॉकरोच पार्टी से जुड़े होकर “कभी समर्थन नहीं किया” कहना भी कमाल है!
रसीद पुरानी है, लेकिन याददाश्त आपकी नई लग रही है।
जो पार्टी शराब की नींव पर अपनी राजनीति खड़ी करने के लिए जानी जाती है, वह आज उत्तर प्रदेश के स्कूलों की चिंता का ढोंग कर रही है।
पहले Punjab में शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों का हिसाब दीजिए, फिर उत्तर प्रदेश को ज्ञान देने आइए।
जनता सब देख रही है सिर्फ सोशल मीडिया पर अभियान चलाने से हकीकत नहीं बदलती।
अर्चना मिश्रा जी, पहले आप गांधी परिवार से सवाल पूछिए कि प्रियंका गांधी को चुनावी राजनीति में लाने और उन्हें लोकसभा की सीट देने में इतने साल क्यों लग गए?
दशकों तक कांग्रेस की राजनीति गांधी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही, लेकिन महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की याद अब भाजपा को भाषण देते समय आ रही है।
पहले अपने घर में जवाबदेही तय कीजिए, फिर भाजपा को महिला प्रतिनिधित्व पर उपदेश दीजिए।
अखिलेश यादव जी, ज्ञान का अहंकार और ज्ञान दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के खिलाफ अनर्गल बोलने से पहले थोड़ा इतिहास और सामान्य ज्ञान पढ़ लेना चाहिए।
हार की बौखलाहट में बयानबाज़ी आसान है, लेकिन तथ्य और तर्क के साथ खड़ा होना मुश्किल।
“विद्या ददाति विनयम्” जहाँ विद्या होती है, वहाँ विनम्रता और विवेक भी दिखाई देते हैं।
कांग्रेस और अजय राय से सवाल है… अयोध्या की पवित्र धरती और सावन के पावन महीने में मछली भोज आयोजित करने की क्या जरूरत थी?
करोड़ों हिंदू सावन में श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ भगवान शिव की आराधना करते हैं।
हनुमानगढ़ी जैसी पवित्र धार्मिक स्थली के पास ऐसा आयोजन हिंदू आस्थाओं के प्रति असंवेदनशीलता नहीं तो और क्या है?
जो कांग्रेस हिंदू आस्था पर ज्ञान देती है, वही अयोध्या में ऐसा आयोजन क्यों करवा रही है?
अजय राय जवाब दें… क्या सनातन की भावनाओं का सम्मान सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित है?
संविधान और आरक्षण के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले दो चोर मिल गए हैं।
एक संजय सिंह, जिन्हें दिल्ली की जनता ने नकार दिया, और दूसरे अखिलेश यादव, जिन्हें उत्तर प्रदेश की जनता ने सत्ता से बाहर कर दिया।
दोनों मिलकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता सब देख और समझ रही है।
2027 में उत्तर प्रदेश की जनता फिर इन्हें करारा जवाब देगी।
अखिलेश यादव जी, ब्राह्मण सम्मेलन हुए कई दिन बीत गए, लेकिन पासी, जाटव, मौर्य, कुशवाहा, धोबी, धानुक, विश्वकर्मा, रविदास और कुर्मी समाज के सम्मेलन का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।
आखिर इतना भेदभाव क्यों? क्या सिर्फ ब्राह्मण समाज के ही वोट चाहिए, बाकी OBC, SC और ST समाज के वोट नहीं?
अगर वोट सबका चाहिए, तो सम्मान और प्रतिनिधित्व भी सबका होना चाहिए। जवाब दीजिए।
राहुल गांधी जी 2004 में सांसद बन गए, लेकिन प्रतिभाशाली प्रियंका गांधी को संसद तक पहुँचने के लिए 2024 तक इंतज़ार करना पड़ा।
अब वही राहुल गांधी जी ‘SMASH THE PATRIARCHY’ का नारा दे रहे हैं।
नारे लगाने से नहीं, परिवार और पार्टी में बराबरी का मौका देने से पितृसत्ता टूटती है।
अगर सच में भरोसा है तो प्रियंका गांधी को पार्टी की कमान सौंपकर शुरुआत कीजिए, राहुल जी!
राहुल गांधी जी 2004 में सांसद बन गए, लेकिन प्रतिभाशाली प्रियंका गांधी को संसद तक पहुँचने के लिए 2024 तक इंतज़ार करना पड़ा।
अब वही राहुल गांधी जी ‘SMASH THE PATRIARCHY’ का नारा दे रहे हैं।
नारे लगाने से नहीं, परिवार और पार्टी में बराबरी का मौका देने से पितृसत्ता टूटती है।
अगर सच में भरोसा है तो प्रियंका गांधी को पार्टी की कमान सौंपकर शुरुआत कीजिए, राहुल जी!
@RahulGandhi@priyankagandhi@INCIndia@chhatronkigoonj
सामाजिक न्याय के नाम पर ‘जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ का नारा देना आसान है, लेकिन देश को जातीय हिस्सों में बांटकर देखना समाधान नहीं है।
भारत की प्रगति की कसौटी जाति नहीं... समान अवसर, योग्यता, शिक्षा और विकास होनी चाहिए।
आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करना है, इसे हर क्षेत्र में स्थायी हिस्सेदारी की राजनीति का आधार बनाना नहीं।
देश को जातीय गणित नहीं.. विकास और सबका साथ चाहिए।
सवर्ण समाज को यह बात समझनी होगी कि किसी से नाराजगी का मतलब यह नहीं कि हर विकल्प बेहतर हो जाता है।
यदि टॉम क्रूज से कोई शिकायत है, तो कमाल राशिद खान उसका विकल्प नहीं हो सकता।
राजनीतिक और सामाजिक फैसले भावनाओं या विरोध के आधार पर नहीं बल्कि योग्यता, विचार और दीर्घकालिक हितों को देखकर होने चाहिए।
फिर वही पुराना चुनावी ‘गुमला’
अखिलेश यादव ने यश भारती सम्मान की राशि दोगुनी करने का वादा कर दिया। सवाल यह है कि सत्ता में रहते हुए इस सम्मान को बंद क्यों किया गया था?
अब चुनाव सामने आते ही पुराने वादों और घोषणाओं की याद क्यों आ रही है?
प्रदेश की जनता अब सिर्फ घोषणाएं नहीं, पिछली सरकार के काम और वादों का हिसाब भी मांग रही है।
कांग्रेस में कथित ‘मालिक-नौकर’ संस्कृति की तस्वीर इस वीडियो में साफ दिखाई दे रही है।
अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद और कुमारी शैलजा जैसे वरिष्ठ नेता, जो राहुल गांधी से उम्र में बड़े हैं और गांधी परिवार की सरकारों में मंत्री भी रह चुके हैं, उनके सामने हाथ बांधे खड़े नजर आ रहे हैं।
सवाल यह है कि राहुल गांधी के साथ बैठने के लिए इन वरिष्ठ नेताओं के लिए कुर्सियां क्यों नहीं थीं?
क्या कांग्रेस में वरिष्ठता और बराबरी से ज्यादा गांधी परिवार के सामने नतमस्तक होना जरूरी है?
यही है कांग्रेस की कथित ‘आंतरिक लोकतंत्र’ की असली तस्वीर?
@RahulGandhi@INCIndia
अखिलेश यादव जी, आरक्षण पर राजनीति करने से पहले यह भी बताइए कि आपकी सरकार ने PDA के कितने युवाओं को वास्तविक अवसर और प्रतिनिधित्व दिया?
आज ‘आरक्षण रहेगा’ कहकर डर फैलाना आसान है, लेकिन सत्ता में रहते हुए सामाजिक न्याय की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना ज्यादा जरूरी था।
आरक्षण पर भ्रम फैलाने के बजाय सरकार के संवाद और संवैधानिक व्यवस्था पर भरोसा रखिए।
जनता अब सिर्फ नारे नहीं, काम और अवसर का हिसाब मांग रही है।
आलू किसानों की चिंता का घड़ियाली आंसू बहाने वाली सपा पहले अपना रिकॉर्ड देखे।
योगी सरकार ने किसानों को बाजार भाव गिरने पर राहत देने के लिए ₹1,000 करोड़ के ‘भामाशाह भाव स्थिरता कोष’, कोल्ड स्टोरेज पर ₹100 प्रति क्विंटल तक अनुदान और उन्नत आलू बीज पर ₹1,000 प्रति क्विंटल तक सहायता का प्रावधान किया है।
किसानों को सिर्फ चुनावी वादे नहीं, संकट के समय सीधी आर्थिक मदद चाहिए और भाजपा सरकार वह काम जमीन पर कर रही है।
अखिलेश यादव और सपा को बताना चाहिए कि अपने शासन में आलू किसानों के लिए ऐसी स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई?
आलू किसानों को बर्बाद कर रही है भाजपा की सरकार, भाजपा सरकार की खराब नीतियों के कारण बर्बाद हो रहा है आलू का किसान
समाजवादी पार्टी दे रही है आलू किसानों का साथ, जब बनेगी सपा की सरकार तब खुश होगा सारा किसान