मध्य प्रदेश के IAS संतोष वर्मा ने जिस तरह का अमर्यादित घटिया और नीचतापूर्ण बयान दिया है उसके खिलाफ अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज द्वारा FIR दर्ज कराई गयी है, यूपी में भी इस निर्लज्ज IAS के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा रही है, देशभर में सैकड़ों जगहों पर इस संतोष वर्मा को गिरफ्तार करने के लिए धरना प्रदर्शन किया जायेगा और किसी भी हाल में इस निकृष्ट व्यक्ति को माफ नहीं किया जायेगा....
बहन बेटियों का अपमान करने वाले किसी भी कुकर्मी को सबक सिखाने के लिये पूरा ब्राह्मण समाज एकजुट है ये बात सभी विधर्मी याद रखें ।
#ArrestSantoshVerma
@Shubhamshuklamp@PushpendraABBS
जय श्री राम।
आज ख़ुशी हैं की हमने ज़्यादा नहीं मगर इतना ज़रूर किया की बिना दहेज की सम्मानजनक विदाई हो पायी इन बेटियों की।
उम्मीद हैं आगे भी ऐसे नेक काम करने के मौके मिले।
आभार सभी साथियों को।
आज अयोध्या में रामलला मंदिर के ध्वजारोहण अनुष्ठान से पूर्व मंदिर परिसर में सप्त मंदिरों के दर्शन कर आशीर्वाद लेने का सौभाग्य भी मिला। महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज एवं माता शबरी के सप्त मंदिरों से वह बोध एवं भक्ति प्राप्त होती है, जो हमें प्रभु राम के चरणों के योग्य बनाती है।
भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शंख पंचजन्य के सम्मान में कुरुक्षेत्र में बना पंचजन्य स्मारक न्याय और सत्य की विजय का प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों को सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे.....भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।
“30 नवंबर 1990...
अयोध्या की गलियों में ‘जय श्रीराम’ की गूंज थी।
हजारों रामभक्त, सिर पर भगवा पटका, हाथों में झंडा,
रामलला के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे।
लेकिन उन्हें क्या पता था,
कि यह यात्रा... बलिदान यात्रा बनने वाली है।
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उसकी आंखों से आंसू बहे,
पर होंठों पर अब भी राम नाम था।
आज जब अयोध्या में मंदिर खड़ा है,
तो याद रखो —इस भूमि में सिर्फ पत्थर नहीं,
बल्कि उन रामभक्तों का रक्त और विश्वास भी मिला हुआ है। वे मरे नहीं थे...
अमर हो गए थे।
क्योंकि जो राम के लिए जीता है —
वह मृत्यु में भी विजयी होता है
उनमें दो भाई भी थे —
शरद कोठारी और राम कुमार कोठारी —
जो रामलला के दर्शन के लिए कोलकाता से आए थे।
गोलियां चलीं...
और दोनों ने राम नाम जपते हुए
अपनी आखिरी सांस ली।
माँ ने अखबार में पढ़ा —
“निहत्थे राम भक्तों को घेरकर घंटों फायरिंग, दो सौ मरे।” 👇
जब भीड़ राम जन्मभूमि की ओर बढ़ी,
तो पुलिस ने घेर लिया...
आदेश था — रोक दो, चाहे जान ले लो।
और फिर...
गोलियों की बरसात होने लगी।
निहत्थे रामभक्त...
जो सिर्फ ‘जय श्रीराम’ बोल रहे थे,
ज़मीन पर गिरने लगे।
खून से सरयू लाल हो गई,
सड़कें भगवा और बलिदान से भर गईं।
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