Social activist, A Teacher, Writer, And a Child of ambedkarite Revolution, Revolutionary thinker, Secular, Founder – @PhulePathshala Co-founder– @Jaibhimlibrary
@KraantiKumar क्रांति कुमार को बहन जी से दिक्कत
क्रांति कुमार को चंद्रशेखर आज़ाद साहब दिक्कत
क्रांति कुमार को अभिजीत दीपके से दिक्कत
क्रांति की क्रांति सिर्फ़ दलित नेतृत्व के ख़िलाफ़ से है.
कल से लगातार पेड ट्वीट कर रहे.
इनको गडकरी से दिक्कत नहीं
इनको मोहन यादव से दिक्कत नहीं
So-called GC activists claim that they didn’t get permission to protest at Jantar Mantar despite applying a month in advance and complying with all the requirements of the rules. But Abhijeet Dipke got permission home delivered without even applying for it. That means Abhijeet is smarter and more talented than the so-called GC activists. Given the opportunity, those who avail reservation outsmart others. This proves it.
@KraantiKumar@KraantiKumar की 'क्रांति' का असली चेहरा देखिए! इन्हें दलित लीडरशिप से इतनी चिढ़ क्यों है?
MP के BJP सीएम यादव के खिलाफ दिन में 7 ट्वीट करने की औकात नहीं है, बल्कि उनकी वॉल तो तारीफों से पटी पड़ी है। लेकिन बात जब दलित नेतृत्व की आए, तो इनकी नफ़रत खुलकर बाहर आ जाती है।
@KraantiKumar की 'क्रांति' का असली चेहरा देखिए! इन्हें दलित लीडरशिप से इतनी चिढ़ क्यों है?
MP के BJP सीएम यादव के खिलाफ दिन में 7 ट्वीट करने की औकात नहीं है, बल्कि उनकी वॉल तो तारीफों से पटी पड़ी है। लेकिन बात जब दलित नेतृत्व की आए, तो इनकी नफ़रत खुलकर बाहर आ जाती है।
अभिजीत दीपके अमेरिका से वापस उसी दिन भारत आ रहा है जिस दिन आंदोलन है.
अभिजीत दीपके को लगा सोशल मीडिया पर 22 M से ज्यादा फॉलोवर्स हो गए हैं तो आंदोलन के दिन पहुंचने पर उसे हाथों हाथ लिया जाएगा.
आंदोलन पूरी तरह प्लॉप रहा. आंदोलन में ज्यादा लोग नही आए थे इसके लिए जिम्मेदार अभिजीत दीपके ही है.
अभिजीत दीपके को 6 जून से एक हफ्ता पहले भारत आकर सामाजिक संगठनों से मुलाकात करनी चाहिए थी. भीड़ कम देखकर अभिजीत दीपके ने वामपंथी नेता वृंदा करात को फोन किया, उन्होंने ज्यादा तवज्जो नही दी.
अभिजीत दीपके को लगा आम लोग अपना आम लोग अपना काम धाम छोड़कर भीड़ बन जाएंगे. मेरा सवाल है जब विपक्ष अच्छा काम कर रहा है तो कॉकरोच जनता पार्टी की क्या जरूरत है ?
अब आंदोलनों का चेहरा कोई भी हो कांस्टीट्यूशनल फ्रेम रखना होगा।
गांधी गोडसे किसकी गली में जन्मे, हर हाल अंबेडकर से प्रेम रखना होगा।
जय भीम, जय भीम के नारे लगेंगे ही लगेंगे। जातिवादी जज़्बातों पर कंट्रोल रखना ही होगा।
#JantarMantar@Cockroachisback
नेता ऐसे ही होते हैं। जब वे आते हैं तो रास्ते खाली कर दिए जाते हैं, मैदान भर जाते हैं, सरकारें हिल जाती हैं। पुलिस सुरक्षा में तैनात रहते है और कोई permission उनके लिए बड़ी चीज़ नहीं होती, वह तो उन्हें यूँ ही दे दी जाती है। Jai Bhim 🙏🏽