मैं लिख तो लेता हूँ,पर लेखक नहीं हूँ मेरे शब्द तो तुम हो तुम्हारे होने से ही मेरी हर पंक्ति को अर्थ मिलता है,हर एहसास को आवाज़ मिलती है जिस दिन तुम साथ नहीं होते,उस दिन सिर्फ मेरे शब्द ही नहीं,मेरा पूरा वजूद भी ख़ामोश हो जाता है...!
तुम सिर्फ़ एक इंसान नहीं हो मेरे लिए, तुम मेरी आदत हो, मेरा सुकून हो, मेरी सबसे ख़ूबसूरत रियल्टी हो।"
"कभी-कभी मुझे डर लगता है कि कहीं तुम दूर न हो जाओ, क्योंकि जितना मैं तुमसे जुड़ता जा रहा हूँ, उतना ही मैं खुद को तुम में खो रहा हूँ।"
"और फिर भी मैं खुश हूँ,
"कभी-कभी मैं बहुत खुश होता हूँ यह सोच कर कि मेरे पास तुम हो।"
"सच कहूँ तो ज़िंदगी पर्फ़ेक्ट नहीं है, लेकिन तुम हो तो सब ठीक लगता है।"
"सबके सामने स्ट्रॉंग बन जाता हूँ, हँसता हूँ, लेकिन अंदर से जो सुकून मुझे तुमसे मिलता है ना, वो कहीं और नहीं मिलता।"
मुझे लिखना नहीं आता मैं कोई लेखक नहीं हूँ ईश्वर ने मेरे अंदर लेखक वाले कोई गुण नहीं दियें मैं बस लिखता हूँ क्या लिखता हूँ, क्यों लिखता हूँ, मुझे आजतक पता नहीं चला मैं बस लिखता हूँ🖤🙏
पता तो बहुत पहले लग गया था
फेर भी दिल पर पत्थर टेकया ही
तुझे क्या लगे है
जो तू ने किया वो तेरे मेरे बीच रह गया
तेरा इलाज कर्मा बांधेगा डार्लिंग
क्योंकि ऊपर आले ने भी देख्या ही