किराड़ी विधानसभा का निठारी गांव का एक ऐसा नर्क जो आईना दिखा रहा है सरकार को
बन्द कर दो इन स्कूलों को, पांच स्कूल 6 हजार से ज्यादा बच्चे फिर भी इस तरह की व्यवस्था शर्म आनी चाहिए @ashishsood_bjp@LtGovDelhi@narendramodi@dpradhanbjp
किराड़ी विधानसभा का निठारी गांव का एक ऐसा नर्क जो आईना दिखा रहा है सरकार को
बन्द कर दो इन स्कूलों को, पांच स्कूल 6 हजार से ज्यादा बच्चे फिर भी इस तरह की व्यवस्था शर्म आनी चाहिए @ashishsood_bjp@LtGovDelhi@narendramodi@dpradhanbjp
@sharadsharma1@LtGovDelhi@PMOIndia@PMOIndia_RC किराड़ी विधानसभा में निठाडी गांव है , 5 स्कूल और एक जंचा बच्चा केन्द्र है हालत बहुत ख़राब है 14 हजार बच्चे पढ़ते हैं और गर्भवती महिलाओं का इलाज होता है, पानी में घुस कर स्कूल जाते है निवेदन है इस विषय पर ध्यान केंद्रित करते
पूर्व मुख्यमंत्री बिहार ,भारत रत्न ,जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों का उत्थान हमेशा उनकी राजनीति के केंद्र में रहा। अपनी सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण भाव को लेकर वे सदैव स्मरणीय एवं अनुकरणीय रहेंगे।
वह पहली बार हमें समझने की और हमारा नजरिया समझने की शुरुवात करते हैं।अब बाकी लोग बुरे नही लगते, किसी पर गुस्सा भी नही आता, बल्कि उनसे सहानुभूति होने लगती है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम जान जानतें हैं कि एक ऐसा सफर भी है, जिसे उन्होंने कभी जाना ही नही, जिस पर वो कभी चले ही नही
शुरुवात में हम झुकते हैं तो दूसरों को उनके जीतने की भ्रांतिहोने लगती है इसलिए उन्हें आनंद भी आता है, पर जब हम बार बार, हर बार झुकते हैं तो उनका वही आनन्द धीरे धीरे खत्म होने लगता है। तब कहीँ जाकर उनका ह्रदय परिवर्तन होना शुरू होता है
मन जो विद्रोह करता है उस मन का साथ देने वाले बहुत से लोग मिल जाते हैं परन्तु हमें अपने ही मन के विद्रोह का ही विरोध करना है यह समझाने वाला शायद ही बिरला कोई इस दुनिया में मिलता है। इसीलिए इस रण में कृष्ण और अर्जुन दोनों की भूमिका खुद ही निभानी पडती है।
सफर लंबा जरूर है पर यकीन मानिए इस पर चलने का अलग ही आनंद है यह रास्ता हमें इंसानियत और कुदरत के बहुत करीब ले जाता है।सबसे पहला पड़ाव की शुरुवात में झुकना हर किसी को खुद की हार जैसा लगता है, हर पल, हर क्षण हमारा अपना ही मन हमसे बार बार विद्रोह करता है।
झुकना किसी भी इंसान की बुनियादी फितरत नही है। सबसे पहले तो हमें यह समझना होता है कि झुकने का क्या महत्व है, आखिर झुकना क्यूँ जरूरी है उसके बाद ही झुकना सीख सकते है। यह रास्ता चुनौतियों भरा है और इस रास्ते पर काफी पड़ाव है, हमें यह सभी पड़ाव एक एक कर पार करने पड़ते हैँ।