मैं प्रतीक्षाओं का आदी रहा
घंटों प्रतीक्षा की बसों की
अपने घर तक पहुँचने के लिए
दिन भर खड़ा रहा दोस्तों की प्रतीक्षा में
मिलने की आस लिए
एक चुस्की के लिए खड़ा रहा
चाय की टपरियों पर प्रेम के लिए बिछाए रहा पलकें बरसों तक ये प्रतिक्षाएँ ही रह
जिन्होंने मुझे सब्र करना सिखाया
वो तुम❤️
कभी वक्त मिला तो अपने बारे में सच लिखूँगा , जो सबको दिखाया नहीं, वो हर एहसास खुलकर लिखूँगा
थके हुए उस चेहरे की मुस्कान लिखूँगा , जो हर दर्द छिपाकर भी "सब ठीक है" कहता है, उसका अरमान लिखूँगा
लोगों को संभालते-संभालते जो खुद टूट गया, उस बिखरे हुए हिस्से का भी एक मूकाम लिखूँगा
जीवन में जो भी शख़्स मिला मुझे
मिला कम और बिछड़ा बहुत
सबसे पहले अपने पिता से बिछड़ा
जब मैं दूसरी क्लास में था
अगले साल चौथी के लिए कह रखा था उन्होंने
उनको लगता था मैं पढ़ने में तेज़ हूँ
परंतु ऐसा कभी नहीं हो पाया
फिर मेरे जीवन में प्रेम आया
Photo:@askrajeshsahu
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मैं जा रहा हूं दोस्तो अब
पता नहीं कब लौटेंगे
पर लौटेंगे जरूर..
आप सभी के प्यार के लिए दिल की गहराइयों से धन्यवाद इस मंच पर आकर बहुत लोगों से बहुत चीज सिखा और आगे भी सीखेंगे।
आप लोगों का प्यार बेशुमार है।🤍🌻
आपका अपना "आदर्श"
धन्यवाद 🙏
Alt 📑 में आपके जीवन के लिए ख़ासー
हम भूख के पले बच्चे हैं
एक दिन आएगा हम सबकुछ खाएंगे
अब जब घर से निकले है
तो इतिहास लिखकर ही जाएंगे
ज़ाकिर खान //@Zakirism //जन्मदिन विशेष 🌻
#MadisonSqarGarden#HindiComedy
हमें लगता कि जो लोग जमीन से जुड़ी चीजों कठिनाइयां और तमाम तरह के परेशानियों को नहीं झेला तो ये जिंदगी तो हो सकती है जवानी कतई नहीं
हमें वो जीवन पसंद नहीं जिसमें कठिनाइयां न हो परेशानियां न हो कभी बैठ कर न सोचे कि ये मेरे साथ क्या हो रहा है?
प्रीमियम जरूरी है?लिख नहीं पा रहे है
सभ्यताओं का निर्माण पीढ़ियों के निरंतर परिश्रम से होता है। कोमलता और आलस्य के कारण सभ्यताएँ नष्ट हो जाती हैं। आइए, पतन से सावधान रहें।
- राजीव गांधी
#RajivGandhi // राष्ट्रीय सद्भावना दिवस 🌻✨
Alt 📑 में जानिए कुछ खासー
जानवर से मनुष्य होने के लिए
प्रेम का अविष्कार जरूरी था।
और
मनुष्य से समाज होने के लिए,
विरह का निर्माण जरूरी था।
आप मनुष्य हो प्रेम करते हैं
समाज होते ही-बिछुड़ना होता है।
और
ऐसी धार के बीच मैंने
जाने दिया तुम्हें।
पर
मनुष्य मैं रहा नहीं
और समाज कभी न होने दूंगा खुद को ।।