किसी भी पब्लिशर का काम किताबों की प्रिंटिंग तक सीमित नहीं हो सकता - यह तो पहला कदम होता है एक लम्बें सफ़र का। असल उद्देश्य तो लेखक, पाठक और प्रकाशक के बीच पारदर्शिता, बराबरी और विश्वास का रिश्ता है।
@UnboundScript
किताब, चैक और डैशबोर्ड। Thanks @theBookwalla@UnboundScript पहला पब्लिशर है जिसने ऑथर्स डैशबोर्ड बनाया है जहां लेखक अपनी किताब की बिक्री का हिसाब सीधा देख सकेगा। पढ़िए और गुनिए " हिट उपदेश" ।
दैनिक जागरण की जनवरी-मार्च 2026 की हिंदी बेस्टसेलर “कथेतर” में “राष्ट्र निर्माण में आदिवासी” को छटे नम्बर पर रखा गया है यह ऑनलाइन में हो रही बिक्री के आधार पर है। ऑफलाइन में अलग अलग दुकानों से हो रही बिक्री इसमें शामिल नहीं है।
हालांकि यह किताब ऑनलाइन की दुनिया में उतनी नहीं चली जितनी ऑफलाइन में ख़रीदी गई है। क्योंकि आदिवासियों की पहुँच अभी भी ऑनलाइन मार्केट तक नहीं है वे अभी भी सामाजिक कार्यकर्ताओं, छोटे दुकानदारों के माध्यम से इस किताब को मंगवा रहे है और पढ़ रहे है।
आदिवासी इतिहास के लिहाजा से ये काफ़ी महत्वपूर्ण है। खैर ये सब
आप सभी पाठकों की बदौलत है। आपने इसे यहाँ तक पहुंचाया है।
मेरे प्रकाशक @theBookwalla@UnboundScript और संपादक आशीष मिश्र ने इस काम को संभव बनाया है इनका तहेदिल से शुक्रिया।
जल्दी ही दूसरी किताब “संविधान सभा में आदिवासी” भी प्रकाशित होने वाली है तब तक आपने यदि “राष्ट्र निर्माण में आदिवासी” नहीं पढ़ी है तो पढ़ लीजिए।
किताब का लिंक कमेंट बॉक्स में।
एक लेखक के लिए इससे बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि क्या हो सकती है कि उसकी शुरुआती दोनों किताबें ही बेस्टसेलर बन जाएँ। वे अमेज़न की रैंकिंग में नंबर वन रहें, और दैनिक जागरण की बेस्टसेलर सूची में पूरे पिछले साल “प्रोफ़ेसर की डायरी” पहले स्थान पर बनी रहे।
इस वर्ष की तिमाही बेस्टसेलर रैंकिंग में भी “प्रोफ़ेसर की डायरी” चौथे स्थान पर है, जबकि हाल ही में प्रकाशित “जाति जनगणना” पहले स्थान पर पहुँच गई है। गाँवों, कस्बों और छोटे शहरों तक इन किताबों की हज़ारों प्रतियाँ पहुँच रही हैं।
यहाँ तक कि उनकी पायरेटेड कॉपियाँ भी हज़ारों की संख्या में पढ़ी जा रही हैं। लोग इन किताबों पर चर्चा कर रहे हैं, उन पर कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, और पाठक उन्हें एक-दूसरे को उपहार में दे रहे हैं।
और जब ये किताबें वैचारिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हों, तब यह उपलब्धि और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। यह इस बात का संकेत है कि गंभीर साहित्य, विचार और बहस की दुनिया में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
ऐसे समय में, जब सतही शोर को अधिक जगह मिलती है, तब किताबों के प्रति यह आकर्षण कलम की ताक़त, विचार की शक्ति और पाठकों के भरोसे को और मज़बूत करता है। यह विश्वास दिलाता है कि समाज में अब भी पढ़ने, समझने और सवाल करने वाले लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है।
इन दोनों किताबों के शानदार संपादन के लिए हिन्दी जगत के उत्कृष्ट संपादक आशीष का विशेष आभार। साथ ही @UnboundScript के प्रकाशक @theBookwalla का भी धन्यवाद, जिन्होंने इतने चुनौतीपूर्ण दौर में वैचारिक किताबों को पाठकों तक पहुँचाने की जिम्मेदारी निभाई। इस स्नेह, विश्वास और प्रेम के लिए सभी पाठकों, साथियों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार।
अगर आप किताब मँगवाना चाहें तो नीचे दिए गए लिंक पर जा सकते हैं:
प्रोफ़ेसर की डायरी – https://t.co/0XtSPGz6kP
जाति जनगणना – https://t.co/n4lea2oR6E
कभी सोचा नहीं था कि मेरा नाम वर्ष 2024–25 के 10 उभरते प्रभावशाली व्यक्तित्वों में शामिल होगा। यह मेरे लिए सम्मान की बात है और ज़िम्मेदारी भी। इस सफ़र का हिस्सा रहे हर एक साथी, मित्र और शुभचिंतक का आभार—यह उपलब्धि हम सबकी है।
#unboundyourself@UnboundScript@BharatDialogues
जोहार साथियों,
तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद *राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी* आप सभी के बीच आ गई है। ऐसे दौर में जब आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को लगातार छीना जा रहा है उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित किया जा रहा है उस समय में भारत के राष्ट्र के रूप में उदय में आदिवासियों के योगदान की चर्चा अति आवश्यक है।
*"इतिहास में किसी को नज़रअंदाज़ करना, वर्तमान में उसकी हिस्सेदारी छीनने का सबसे महीन तरीका होता है।"*
यह पुस्तक उसी ऐतिहासिक अन्याय के विरुद्ध एक सशक्त हस्तक्षेप है- जो सदियों से भारत के आदिवासी समुदायों के साथ होता आया है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक फैले इन समुदायों ने अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ सबसे शुरुआती और सबसे दीर्घकालिक विद्रोह किए, लेकिन मुख्यधारा के इतिहास में उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे।
‘राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी’ सिर्फ एक इतिहास पुस्तक नहीं, बल्कि एक वैचारिक यात्रा है जो हमें भारत के भूले-बिसरे पुरखों से मिलवाती है। यह पुस्तक यह भी दिखाती है कि आदिवासी भारत के राष्ट्र-निर्माण में कैसे केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं।
एक लेखक के तौर पर मैंने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाई है। आप Amazon वेबसाइट से अपनी प्रति ऑर्डर कर सकते है। आपकी समीक्षाएँ और प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा।
शुक्रिया 🙏
किताब का लिंक:- https://t.co/FyuHA93mK8
जोहार साथियों,
आज आपको एक बहुत शानदार किताब के बारे में आग्रह करता हूँ कि इस किताब को क्यों ज़रूर पढ़ना चाहिए. इस किताब को क्यों पढ़ने का आग्रह कर रहा हूँ, यह बात समझने के लिए पहले कुछ सवाल अपने आप से पूछिए, मसलन-
आदिवासी कौन हैं?
आदिवासियों की संस्कृति क्या है?
आदिवासियों के बुनियादी सवाल क्या हैं?
आदिवासी भारत में कब से कहाँ-कहाँ कैसे रहते आए हैं?
और सबसे बड़ी बात, आदिवासियों का राष्ट्र निर्माण में क्या योगदान है?
इन सवालों का बुनियादी जवाब देते हुए आपको अपने ही देश के सबसे पुराने लोगों से परिचित करेगी ये किताब. 'राष्ट्र निर्माण में आदिवासी' इस तरह का पहला प्रयास है, जो 12 आदिवासी आइकॉन के ज़रिये आइडिया ऑफ़ इंडिया से आपको रूबरू कराएगी. इसलिए इस किताब को ज़रूर मँगवा कर पढ़ लें.
दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफ़ेसर @JitendraMeenaDU ने यह शानदार काम किया है. डॉ. जितेंद्र मीणा देश के उन चंद लोगों में सबसे अव्वल हैं, जो लगातार आदिवासियों के मुद्दों पर लिखते और संघर्ष करते रहे हैं. साथ ही वे संविधान सम्मत हर आवाज़ में मुखर नाम रहे हैं. पिछले लंबे समय से वे आदिवासियों पर ही काम कर रहे हैं. उनके शोष का लाभ उठाते हुए इस ज़रूरी किताब को आज ही बुक करवा लें.
@UnboundScript से प्रकाशित यह शानदार किताब अमेजन से आज ही ऑर्डर कर सकते हैं, जो अगले कुछ दिनों में आपको मिल जाएगी।
प्री ऑर्डर के लिए अमेज़न लिंक :-
https://t.co/bgDlD694QE
@UnboundScript के पाँचवें प्रतिष्ठा दिवस पर हमारे लेखकों, पाठकों, सहयोगियों व शुभेच्छुओं का उनके विश्वास और सहयोग के लिए आभार।
आने वाले दिनों में हम नयी किताबों, नयी आवाज़ों और नयी ऊर्जा के साथ आपके सामने होंगे। और इस सफर में आप हमारे साथ रहेंगे, यही हमारी कामना है।
प्रिय पाठकों,
मैं दिल से आप सभी का धन्यवाद करना चाहता हूँ कि आपने मेरी पहली पुस्तक "कर दिखाओ कुछ ऐसा" को अपना प्यार और आशीर्वाद दिया। इतने कम समय में पहले संस्करण की सफलता और अब दूसरे एडिशन का आगमन, यह सब आपके अपार आशीर्वाद और विश्वास का परिणाम है।
आपकी सराहना और सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ ही मेरी प्रेरणा का स्रोत हैं। यह किताब केवल मेरे विचारों का प्रतिबिंब नहीं, बल्कि आपके दिलों की गहरी आवाज़ का हिस्सा भी है। यह देखकर मुझे अपार खुशी होती है कि "कर दिखाओ कुछ ऐसा" का संदेश सिर्फ युवाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हर उम्र और हर वर्ग के लोग इससे जुड़ पा रहे हैं। "कर दिखाओ कुछ ऐसा" ये शीर्षक हमें याद दिलाता है कि अगर हम प्रभु की सेवा, दुःखी मनुष्यों की मदद और अपने परिवार का ख्याल रखने के साथ अपना जीवन जीते हैं, तो हम असली सफलता को पा सकते हैं। आप सबका इस संदेश को समझकर अपना जीवन उसी दिशा में बदलते देखना, मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
आप सभी का धन्यवाद और सादर प्रणाम 🙏❤️
#RjKartik #Motivation
Invited to read my poems at the Annual Festival of Letters, Sahitya Akademi. If you are in New Delhi, around Rabindra Bhawan, consider listening to us. Looking forward to a poetry shaped Monday morning.
Hope you take a detour for us. Thanks for pausing and giving this a thought.
आज दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड बुक फेयर में सुपर 30 के संस्थापक, महान गणितज्ञ और प्रेरणास्त्रोत @teacheranand Sir ने मेरी पहली किताब 'कर दिखाओ कुछ ऐसा' का विमोचन किया। इस अवसर पर उनका आशीर्वाद मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षण मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है 🙏 इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखक @naveen1003 जी का स्नेह और सानिध्य मिला 🙏 और विशेष बात ये रही कि मेरे मेंटर @vikasyahaanhai Sir का सानिध्य और आशीर्वाद हमेशा की तरह इस विशेष पल में भी रहा 🙏 समाज सेविका मोना कपूर जी का भी विशेष धन्यवाद 🙏 अलिंद माहेश्वरी जी और टीम Unbound Script का पुनः आभार, जो मेरी पहली किताब के प्रकाशक हैं 🙏 #RjKartik #RjKartikBook #Motivation #AnandKumarSir #WorldBookFair
हम जल्द ही महादेवी वर्मा के सभी रेखाचित्रों की अलग-अलग किताब लेकर आ रहे हैं। ये सारे रेखाचित्र उनकी किताब ‘मेरा परिवार’ में संकलित हैं।
इस किताब का इलस्ट्रैटेड वर्ज़न में छापा जाए तो इसके पाठक बढ़ेंगे।
यह एक पूरी सीरीज़ होगी; हिन्दी और अंग्रेजी में हर कहानी एक स्वतंत्र किताब।
हिन्दी में पढ़ने वाले बढ़े हैं और लगातार बढ़ रहे हैं। अमेज़न की रैंकिंग इसका एक और प्रमाण है। दो दिन से किताब नंबर 1 की रैंकिंग में है।
किताब: प्रोफेसर की डायरी
लेखक : @DrLaxman_Yadav
प्रकाशक : उपक्रम युवान, @UnboundScript#amazonbestseller#hindibook
कुछ दिन बीत गए 3 साल पूरे हुए।
Thank you
Authors,
translators,
Editors,
Booksellers
and all our well-wishers.
with 📷
from Team Unbound
@UnboundScript#unboundyourself
…
यही प्रार्थना है प्रभु तुमसे
जब हारा हूँ तब न आइए।
वज्र गिराओ जब-जब तुम
मैं खड़ा रहूँ यदि सीना ताने,
नर्क अग्नि में मुझे डाल दो
फिर भी जिऊँ स्वर्ग-सुख माने,
मेरे शौर्य और साहस को
करुणामय हों तो सराहिए,
चरणों पर गिरने से मिलता है
जो सुख, वह नहीं चाहिए
प्रार्थना/सर्वेश्वरदयाल
नहीं नहीं प्रभु तुमसे
शक्ति नहीं माँगूँगा।
अर्जित करूँगा उसे मरकर बिखरकर
आज नहीं कल सही आऊँगा उबरकर
कुचल भी गया तो लज्जा किस बात की
रोकूँगा पहाड़ गिरता
शरण नहीं भागूँगा
नहीं नहीं प्रभु तुमसे
शक्ति नहीं माँगूँगा।
प्रार्थना / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना