Burger bro is back!
Dancing sensation Vijeta Dahiya who was sidelined by Ranka, Dickpe and Saurav Das for his Burger addiction- is now laughing on their detention news.
Pure cinema.. 😂😂
जब पूरे गाँव ने बूढ़े डाकिए को पागल समझ लिया,
बेटा उसे वृद्धाश्रम भेजना चाहता था… लेकिन मरने
से एक दिन पहले उसने पंचायत के सामने 17 पीले
लिफाफे रखे और कहा— “अब इन्हें खोलो”
साल 2022 की बात है।
मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव रामपुरा में 83 वर्षीय
जगन्नाथ तिवारी को लोग अब डाकिया नहीं, "पागल
बूढ़ा" कहने लगे थे।
कारण भी अजीब था।
जगन्नाथ तिवारी 38 साल तक डाक विभाग में काम
कर चुके थे। साइकिल पर गाँव-गाँव चिट्ठियाँ पहुँचाते
थे। किसके घर बेटा पैदा हुआ, किसकी नौकरी लगी,
किसका मनीऑर्डर आया—सबकी खुशियों और दुखों
के गवाह रहे थे।
लेकिन रिटायर होने के बाद उनमें एक अजीब आदत
आ गई।
जब भी किसी पुराने घर की सफाई होती, किसी संदूक
से पुरानी चिट्ठियाँ निकलतीं या कोई कागज़ फेंका
जाता, जगन्नाथ उसे उठा लाते।
लोग हँसते।
“काका फिर कूड़ा बटोर लाए।”
“अब इनसे कौन चिट्ठी पढ़ेगा?”
“जमाना मोबाइल का है।”
लेकिन जगन्नाथ कुछ नहीं कहते।
बस उन कागज़ों को एक पुराने कमरे में सँभालकर
रख देते।
उनका बेटा विनोद शहर में बैंक में नौकरी करता था।
उसे पिता की यह आदत शर्मिंदगी लगती थी।
एक दिन छुट्टी में गाँव आया तो देखा कि घर का पूरा
पिछला कमरा पुराने लिफाफों, पोस्टकार्डों और
चिट्ठियों से भरा पड़ा है।
वह गुस्से से बोला—
“पिताजी, यह घर है या कबाड़खाना?”
जगन्नाथ मुस्कुरा दिए।
“ये कबाड़ नहीं हैं बेटा।”
“तो क्या हैं?”
“लोगों की अधूरी कहानियाँ।”
विनोद ने माथा पकड़ लिया।
गाँव वालों को भी लगता था कि उम्र के साथ उनका
दिमाग कमजोर हो गया है।
क्योंकि जगन्नाथ रोज शाम को उन चिट्ठियों को
निकालकर बैठते, कुछ पढ़ते, कुछ अलग रखते और
कुछ पर लाल पेंसिल से निशान लगाते।
कई बार रात के दो-दो बजे तक कमरे में रोशनी जलती
रहती।
फिर एक दिन अचानक जगन्नाथ बीमार पड़ गए।
डॉक्टर ने साफ कह दिया—
“उम्र बहुत हो चुकी है। अब ज्यादा समय नहीं है।”
खबर पूरे गाँव में फैल गई।
लोग मिलने आने लगे।
लेकिन सबसे ज्यादा परेशान विनोद था।
उसे लगता था कि पिता के जाने के बाद उसे यह सारा
कबाड़ साफ करना पड़ेगा।
बीमारी बढ़ती गई।
एक शाम जगन्नाथ ने पंचायत के सरपंच को बुलवाया।
फिर गाँव के कुछ बुजुर्गों और अपने बेटे विनोद को भी
बुलाया।
सब लोग उनके आँगन में इकट्ठा हो गए।
जगन्नाथ ने चारपाई के नीचे रखा एक पुराना लोहे का
बक्सा बाहर निकलवाया।
बक्सा खुला।
अंदर ठीक-ठीक रखे हुए 17 पीले लिफाफे थे।
हर लिफाफे पर एक नाम लिखा था।
और नीचे एक तारीख।
कुछ तारीखें 20 साल पुरानी थीं।
कुछ 35 साल पुरानी।
सरपंच ने पूछा—
“काका, ये क्या है?”
जगन्नाथ ने कमजोर आवाज़ में कहा—
“ये वो चिट्ठियाँ हैं जो कभी अपने मालिक तक नहीं
पहुँचीं।”
सब लोग हैरान रह गए।
विनोद ने कहा—
“क्या मतलब?”
जगन्नाथ ने धीरे-धीरे बताया—
“बाढ़, दुर्घटना, पते बदलने और कई दूसरी वजहों से ये
चिट्ठियाँ कभी सही लोगों तक नहीं पहुँच सकीं।”
“मैंने नौकरी के दौरान इन्हें संभालकर रख लिया था।”
“सोचा था एक दिन इनके असली मालिकों को खोज
लूँगा।”
भीड़ में सन्नाटा छा गया।
जगन्नाथ ने काँपते हाथ से पहला लिफाफा उठाया।
उस पर लिखा था—
‘सुशीला देवी के नाम’
और तारीख थी—
1989
भीड़ में बैठी एक बुजुर्ग महिला अचानक खड़ी हो गई।
“ये... ये मेरा नाम है।”
जगन्नाथ मुस्कुराए।
“हाँ सुशीला, ये चिट्ठी तुम्हारे पति ने सेना से भेजी
थी।”
महिला के हाथ काँपने लगे।
उसके पति की मौत 30 साल पहले सीमा पर हुई थी।
उसे हमेशा लगता था कि आखिरी दिनों में पति ने उसे
याद भी किया होगा या नहीं।
फिर दूसरा लिफाफा खुला।
फिर तीसरा।
फिर चौथा।
हर लिफाफे के साथ गाँव का कोई न कोई पुराना राज
सामने आने लगा।
कहीं किसी बेटे का माफीनामा था।
कहीं किसी पिता की आखिरी इच्छा।
कहीं किसी प्रेमी का अधूरा इज़हार।
कहीं किसी बहन की राखी के साथ भेजा गया संदेश।
लोग रोने लगे।
लेकिन असली सन्नाटा तब छाया जब जगन्नाथ ने
आखिरी लिफाफा उठाया।
उस पर लिखा था—
“खोलना सिर्फ मेरी मौत के बाद।”
और नीचे नाम लिखा था—
विनोद तिवारी।
यानी उनका अपना बेटा।
विनोद के हाथ काँप गए।
“मेरे लिए?”
जगन्नाथ ने सिर हिलाया।
“हाँ बेटा...”
“इस चिट्ठी में वह बात है जो मैं जिंदगी भर तुम्हें मुँह
से नहीं कह पाया।”
There is no such thing as Islamophobia @sardesairajdeep.
A phobia is an irrational fear. It is NOT irrational to fear Islam, an ideology that explicitly calls for the killing of all non-Muslims. How can you sit back and watch the Islamic massacre and raping of Hindus and defend the Pakistani invaders in your country who wish to make India a Muslim country?
Don’t you have any sense of national pride and a desire to preserve your country as majority Hindu?
You do not have a strong survival instinct.
@theskindoctor13 You need to get the latest SCST form. You dare open eyes infront of one you will be jailed, and that's for greater good, how could we always remain privileged