उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक बेटी के साथ बलात्कार और निर्मम हत्या - और फिर परिवार को FIR दर्ज कराने से रोकने के लिए धमकियाँ, हिंसा।
हाथरस, कठुआ, उन्नाव और आज ग़ाज़ीपुर - यह एक पैटर्न है। मणिपुर की बेटी ने न्याय की राह देखते-देखते दम तोड़ दिया।
हर बार वही चेहरा - पीड़िता दलित, पिछड़ी, आदिवासी, ग़रीब।
हर बार वही सच्चाई - अपराधी को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना।
हर बार वही चुप्पी - सत्ता की, जिन्हें बोलना चाहिए था।
जिस देश और प्रदेश में माँ-बाप को अपनी बेटी की FIR लिखवाने के लिए भीख माँगनी पड़े, उस देश की सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं।
दोषी पुलिस अफ़सरों पर कार्रवाई हो, परिवार को सुरक्षा मिले - उच्च स्तरीय जांच हो और तुरंत न्याय मिले।
मोदी जी, मुख्यमंत्री जी जवाब दीजिए - आपके राज में बेटियाँ इतनी असुरक्षित क्यों हैं?
ऐसे हालात में न्याय माँगा नहीं, छीना जाता है - और हम छीनकर लाएँगे।
BPSC ने TRE- 4 भर्ती परीक्षा के पैटर्न में बदलाव
अभ्यर्थियों के लिए सभी जिलों का विकल्प अनिवार्य
मेरिट के आधार पर ही जिला का आवंटन होगा
46882 पदों पर भर्ती, 25 अप्रैल के बाद आवेदन
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