Chhatron Ki Goonj में छात्र कम, Congress का talent hunt ज़्यादा दिख गया! मंच पर “आम छात्र” बनकर अपनी परेशानियां बताने वाले congress worker निकल आए तो सवाल उठना लाज़मी है कि Rahul Gandhi के event में students की आवाज़ थी या Congress workers की rehearsed performance?
Tanay Sharma से Radha Malviya और फिर Ranjit Kisanvanshi तक, तीन किरदार, एक मंच और transparency गायब! पूरा मामला देखिए और समझिए क्यों इसे लोग “Chhatron Ki Goonj” नहीं, “Jhooth Ki Goonj” कह रहे हैं।
@harshkumarnayak
भाजपा की नीतियाँ और मोदी एक्ट का बवासीर अब 91% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में डिफेंड करने से ले कर IIT के प्रोफ़ेसरों को एक विषाक्त माहौल में जीने को विवश कर रहा है।
राहुल गांधी को लग रहा है कि वो ये सब करके चुनाव जीत जाएंगे। मोदी जी का जलवा है भाई। आप अब नहीं आने वाले!
कल आप DU में कुत्ते की तरह हारे हो, फिर भी आपको ये 'छात्रों की गूँज' करनी थी, क्योंकि ये pre-planned event है।
छात्रों की गूँज में अगर राहुल गांधी PM की माँ के बारे में कुछ बोलेंगे, तो आप अपनी माँ के लिए भी तैयार रहिए। IT Cell फिर पीछे नहीं रहेगा। एकमात्र काम यही है, जो IT सैलिए बढ़िया कर रहे हैं।
चुनाव वोटर्स से जीते जाते हैं, कॉकरोच से नहीं। GENZ ने जंतर-मंतर के गालीबाज और ड्रामेबाजों को नकारा
दिल्ली यूनिवर्सिटी में ABVP की बंपर जीत !
@himanshi__bisht
अकेला विष्णु तिवारी नहीं है - लाखों है लाखों
जिनका दर्द बरबाद परिवार व्यापार किसी ने नहीं देखा
Sc/St एक्ट के दुरुपयोग पर रोक लग कर रहेगी।
27 सितंबर पहली बैठक होगी।
Javed Akhtar claims Sholay's temple scene where Lord Shiva and Hinduism were mocked can't be screened in today's India.
Wrong, Javed saab. You can screen it even today, just that in today's India, Hindus will ask you why you never had the guts to mock Allah or Islam similarly.
चंद्रशेखर रावण ने 24 सितंबर को जंतर-मंतर पर कार्यक्रम का आह्वान किया है।
इनसे प्रश्न पूछो कि अरे रावण, तुमने वाल्मिकियों के अधिकारों के लिए क्या किया? तुमने डोम लोगों के लिए क्या किया?
तुम आरक्षण उन तक क्यों नहीं पहुँचने देना चाहते? तुम कोटा के अंदर कोटा के विरोध में क्यों हो? जिस जाति से तुम आते हो, अगर तुम्हारी जाति को disproportionate रूप से आरक्षण मिल रहा है, तो तुम सीट vacate क्यों नहीं करते?
घोंघा चुनकर खाने वालों को, कीचड़ से छोटी मछलियाँ निकालकर खाने वालों को, दूसरों के खेतों में बकरी चराकर गुज़ारा करने वालों को, दूसरों की गाछी-बगीचों से कटहल के पत्ते चुनकर अपनी बकरियों को खिलाने वालों को आरक्षण क्यों नहीं मिल पा रहा?
मिट्टी के उन घरों में रहने वाले लोग, जिनकी दीवारें बारिश में गल-गलकर बह जाती हैं, उन जातियों तक आरक्षण क्यों नहीं पहुँचता?
प्रश्न तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि क्या उनमें से बहुत से लोग आज तक अपने आरक्षित वर्ग का सर्टिफिकेट तक बनवा पाए हैं?
राष्ट्र-आराधक, सुशासन और जन-सेवा के प्रतीक, 140 करोड़ भारतीयों के कुशल मार्गदर्शक, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएं।
'राष्ट्र सर्वोपरि' के संकल्प के साथ आपकी यह कर्मयात्रा सेवा, समर्पण और अद्वितीय विकास की मिसाल बनी है। आपके सशक्त नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए शिखरों को छू रहा है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वे आपको दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और मां भारती की निरंतर सेवा की शक्ति प्रदान करें।
#HappyBdayPMModi
@RahulGandhi You have failed as a leader and as an opposition, overall you are a failed person. So do one thing, take up some small job so that in the last days you have at least some satisfaction .
One gets bail within days despite being caught on camera.
Other languishes in jail for six years without even a trial or hearing.
Same justice system. Very different approach.
उत्तरप्रदेश की हुकम सिंह कमिटी रिपोर्ट 2001
यादव जनसंख्या: 19.4%
यादव सरकारी नौकरी: 33%
कुर्मी जनसंख्या: 7.5%
कुर्मी सरकारी नौकरी: 12.5%
जाट जनसंख्या: 3.6%
जाट सरकारी नौकरी: 6.9%
गुर्जर जनसंख्या: 1.7%
गुर्जर सरकारी नौकरी: 2.1%
जाटव जनसंख्या: 55.7%
जाटव सरकारी नौकरी: 56.7%
मतलब ये सारी जातियाँ आज से 25 साल पहले ही आबादी से ज़्यादा प्रतिनिधित्व पा चुकीं थीं!
फिर इनको आज भी आरक्षण क्यों मिल रहा है?
इनको अब आर्टिकल 16-4 के अनुसार आरक्षण मिल ही नहीं सकता! फिर भी सामाजिक न्याय की धज्जियां उड़ाकर इनको आरक्षण आज भी दिया जा रहा है!
वंचित जातियों तक आरक्षण नहीं पहुंच पाने का यही कारण है कि कुछ जातियों को आबादी से अधिक आरक्षण मिल रहा है!
तो वंचित जातियों का असल दुश्मन सवर्ण नहीं, वो हैं जो दबंग होने के बाद भी आरक्षण छोड़ नहीं रहे!
@SauravDassss सब अपना अपना काम कर रहे हैं हर जगह काम हो रहा है, पर जो जन्मजात बेरोजगार हैं, जिनको मजा ही आता है ऐसे ही रहने में वे यह सब बातें नहीं समझ सकते। अरे कुछ काम धंधा करो तो समझ में आए।
BRICS Gala Dinner का Veg Menu सामने आते ही ecosystem का रोना-गाना शुरू हो गया।
लेकिन सवाल ये है, जब किसी दूसरे देश में Vegan Menu परोसा जाता है तो उसे sustainability, health और hospitality बताया जाता है, फिर भारत में nutritious vegetarian food पर इतनी परेशानी क्यों?
BRICS में 11 सितंबर को Non-Veg भी serve हुआ था। फिर हर भारतीय event में fault निकालना ही priority क्यों?
@shreya_arora22