भारत की प्रथम महिला शिक्षिका एवं महान समाज सुधारक माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं एवं आपके द्वारा किए गए सामाजिक कार्य से हम हमेशा आभारी रहेंगे । 🙏❤️
#प्रथम_महिला_शिक्षिका#माता_सावित्रीबाई_फुलेजी
बहुत ही अच्छी मुलाकात हुई भाई साहब से बहुत बहुत धन्यवाद भाई साहब जो आपने मेरे से बात की मैने सोचो नहीं था आपसे ऐसे मुलाकात मेरी होगी 🙏🏻🙏🏻 आप समाज की शान हो आपने जो बोले है मुझे वो हमेशा याद रखूंगा है ��र कायम रहूं है
जय भीम 🙏🏻 boss
@BhimArmyChief
आइए झुक कर सलाम करें उनको ,जिनके हिस्से में यह मुकाम आता है।
बहुत खुशनसीब होते हैं वह योद्धा, जिनका लहू मिशन के काम आता है।
2 अप्रैल बहुजनों के ऐतिहासिक आंदोलन में बलिदान हुए हमारे वीर शहीदों को नमन ,आ�� सब हमारे दिलों में हमेशा जिंदा है और रहेंगे।
#2अप्रैल_बलिदान_दिवस
राष्ट्र नायक, अखंड भारत के निर्माता एवं मानवता के प्रतिबिंब, चक्रवर्ती महान सम्राट अशोक मौर्य जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक मंगलकामनाएं।
सम्मान के लिए अगर अपना सबकुछ दांव पर लगाना पड़े तो लगा दो। आत्मसम्मान के लिए विद्रोह की प्रतीक एवं महिलाओं की प्रेरणास्रोत वीरांगना फूलन देवी जी के शहादत दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवँ विनम्रआदरांजलि। #फूलन_देवी_अमर_रहे
महिलाओं में जब भी सम्मान की बात उठेगी भाई चंद्रशेखर आजाद को याद किया जाएगा।
पूरे देश भर में महिलाएं ऐसे ही नहीं सम्मान करती देखा है उन्होंने अपनी लड़ाई लड़ते हुए।
उंगली तो बाबा साहब और मान्यवर कांशीराम साहब प�� भी बहुत उठी पर महान व्यक्ति कभी विचलित नहीं हुए।
@BhimArmyChief
आज नगीना की पवित्र धरती से सांस��� बने मुझे एक वर्ष पूरा हुआ। यह केवल एक पद की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस भरोसे, संघर्ष और आंदोलन की ताक़त का प्रतीक है, जिसे आप सबने अपनी मेहनत, अपने वोट और अपने विश्वास से संसद तक पहुँचाया।
मैं इस ऐतिहासिक अवसर पर बहुजन महापुरुषों, पूरे बहुजन समाज और नगीना की समस्त सम्मानित जनता को नमन करता हूँ।
मैं यह स्पष्ट करता हूँ कि हमारी राजनीति सिर्फ़ कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि संविधान बचाने, समानता स्थाप��त करने और सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई को मजबूत करने के लिए है — और इस एक वर्ष में मैंने संसद के अंदर और बाहर यही संकल्प दोहराया है।
मैं विशेष रूप से महिलाओं, किसानों, ग़रीबों, मज़दूरों, युवाओं, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और मुस्लिमों, सिक्खों, जैनों, ईसाई साथियों का धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने भरोसे और समर्थन से मुझे यह ज़िम्मेदारी सौंपी।
इस एक साल में मैंने —
• संसद में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार को लेकर कई सवाल उठाए। नारी गरिमा और स्वावलंबन की आवाज़ को मजबूती से रखा।
• किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देने, कर्ज़माफी और सिंचाई की समस्याओं पर बहस की।
• ग़रीबों को राशन, शिक्षा, इलाज और आवास जैसे बुनियादी अधिकारों की गारंटी दिलाने क�� लिए सरकार से जवाब माँगा।
• मज़दूरों और दिहाड़ी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की माँग को उठाया।
• बेरोज़गार युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में रिक्त पद भरने, पारदर्शी भर्तियों और प्रशिक्षण संस्थानों की मांग की।
• दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई — और बिना किसी भेदभाव के हर उस पीड़ित के पक्ष में खड़े हुए, जिसकी आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही थी।
• दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के अधिकारों एवं आरक्षण पर हो रहे हमलों का विरोध किया, और उनके साथ-साथ धार्मिक अल्पसंख्यकों के हक़ में भी आवाज़ बुलंद की।
यह एक वर्ष संघर्ष, सीख और सेवा का रहा।
मुझे यह ज़िम्मेदारी हमेशा याद है कि संसद में मेरी हर बात उस जनता की आवाज़ है, जो वर्षों से हाशिए पर धकेली जाती रही है।
मैं फिर दोहराता हूँ– मेरी राजनीति बहुजन महापुरुषों, तथागत गौतम बुद्ध, संत रविदास, गुरु नानक देव जी, गुरु घासीदास जी, भगवान वाल्मीकि जी, संत कबीर जी, रानी झलकारी बाई, छत्रपति शाहूजी महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज, टीपू सुल्तान, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, मां सावित्रीबाई फुले, मां फूलन देवी, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा, रानी अवंती बाई लोधी, सम्राट मिहिर भोज, दीना-भाना वाल्मीकि, नारायण गुरु, शहीद उधम सिंह, पेरियार ई.वी. रामास्वामी नायकर, सर छोटू राम, धन सिंह कोतवाल, सर सैयद अहमद ख़ान, रामस्वरूप वर्मा, वी. पी. मंडल, कर्पूरी ठाकुर, पेरियार ललई यादव, महाराजा बिजली पासी, रानी अहिल्याबाई होलकर, मोहम्मद अब्दुल जलील फरीदी, परम पूज्य विश्वरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, मान्यवर कांशीराम साहब, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, और अन्य सभी महापुरुषों के विचारों से प्रेरित है — जिनके सामाजिक परिवर्तन के सपनों को साकार करने का संकल्प मैंने लिया है।
अभी तो शुरुआत है। बदलाव का कारवां आगे बढ़ेगा।
जय भीम! जय भारत!
राजस्थान के झुंझुनूं ज़िले के विरमी गांव के दलित युवक सुभाष मेघवाल पर 16 मई को ज��नलेवा हमला किया गया। घटना के नौ दिन बाद सुभाष की मृत्यु हो गई।घटना अत्यंत दुखद और दंडनीय है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि शव तीन दिन तक मोर्चरी में प��़ा रहा। मृत्यु के तीन दिन बाद भी न कोई गिरफ्तारी हुई, न ही प्रशासन की ओर से कोई संवेदना जताई गई।
जब परिजनों और ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया, तब सर्व समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर न्याय की माँग की — और बदले में उन पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया!
अफसोस की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना और इतना सब होने के बाद भी अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp, क्या भाजपा ���ाज में दलितों का खून पानी से भी सस्ता हो गया है, जो अपराधियों को खुली छूट मिल रही है? क्या अब दलितों को न्याय माँगने पर लाठियाँ मिलेंगी? क्या अब लोकतंत्र में न्याय माँगना भी अपराध बन गया है?
मैं @RajGovOfficial से माँग करता हूँ :-
1. सुभाष मेघवाल की हत्या के सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
2. इस प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कर��ई जाए।
3. पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, सरकारी नौकरी और सुरक्षा प्रदान की जाए।
4. पुलिस लाठीचार्ज के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
5. SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
6. सभी आरोपियों का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए, ताकि शीघ्र न्याय मिल सके।
@RajCMO
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर ग्वालियर खंडपीठ में भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों वंचितों व महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न, उपरम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की प्रतिमा की स्थापना को लेकर कई दिनों से चल रहा विवाद अपमानजनक और हिंसक मोड़ पर पहुँच चुका है।
माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद बाबा साहेब की प्रतिमा को न केवल न्यायालय परिसर में प्रवेश से रोका जा रहा है बल्कि ये धमकी दी रही है "प्रतिमा ही नहीं बचेगी"। यह सीधा न्यायपालिका की अवमानना है। यह सिर्फ एक मूर्ति का सवाल नहीं है, यह हमारे आत्मसम्मान, इतिहास और संवैधानिक चेतना का प्रश्न है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि जब भीम आर्मी के निहत्थे कार्यकर्ताओं ने इस अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्वक विरोध किया, तब पुलिस की मौजूदगी में उन पर कायराना हमला किया गया।
यह हमला सिर्फ भीम आर्मी पर नहीं, बाबा साहेब के विचारों और बहुजन आत्मस���्मान पर हमला है।
मेरा सवाल है मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी, क्या आपकी सरकार उस सोच के सामने नतमस्तक हो चुकी है जो बाबा साहेब की विरोधी है और संविधान की आत्मा को कुचलना चाहती है?
हम इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठ सकते है। बहुत जल्द मैं ग्वालियर आऊंगा।
@MP_MyGov @CMMadhyaPradesh